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इक्विटास व उज्जीवन के शेयर नियामकीय चिंता से टूटे

हंसिनी कार्तिक / मुंबई October 26, 2018

इक्विटास होल्डिंग्स और उज्जीवन फाइनैंशियल सर्विसेज के शेयरों के लिए शुक्रवार के दिन अच्छा नहीं रहा और कारोबार के दौरान यह 2016 में सूचीबद्धता के बाद के अब तक के निचले स्तर को छू गया। हालांकि अंत में यह बीएसई पर क्रमश: 23.3 फीसदी और 17.6 फीसदी के नुकसान के साथ बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक ने दोहराया है कि दोनों कंपनियोंं को परिचालन शुरू करने के तीन साल के भीतर अपने-अपने स्मॉल फाइनैंस बैंक (एसएफबी) को सूचीबद्ध कराना होगा। इसी खबर के बाद दोनों कंपनियों के शेयर टूटे। विश्लेषकों ने कहा कि स्मॉल फाइनैंस बैंक को सूचीबद्ध कराने के मामले में आरबीआई ने कड़ा रुख बरकरार रखा है और इसे आश्चर्य के तौर पर देखा गया क्योंंकि होल्डिंग कंपनी का ढांचा एसएफबी के दिशानिर्देश की जरूरतों पूरी करने के लिए बनाया गया था। विशेषज्ञों ने कहा कि नियमों पर आरबीआई के टिके रहने के चलते ही शुक्रवार को इनके शेयरों की कीमत में गिरावट दर्ज हुई।
 
निवेशक चिंतित हैं क्योंकि इस पर स्पष्टता नहीं है कि सूचीबद्ध कंपनियों की मौजूदा शेयरधारिता के तहत कैसे एफएफबी में शेयरोंं का आवंटन किया जाएगा। क्या होल्डिंग कंपनी का ढांचा एसएफबी के पांच साल की लॉक इन अवधि के बाद ढह सकता है या फिर इसका विलय हो सकता है और इस समय तक प्रवर्तकों को अपनी हिस्सेदारी घटाकर 40 फीसदी पर लानी होगी। ये महत्वपूर्ण हैं क्योंकि होल्डिंग कंपनी व एसएफबी के तौर पर दोहरी सूचीबद्धता निवेशकोंं के लिए कीमत क्षरण का कारण हो सकती है। कोटक इंस्टिट््यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों ने कहा, होल्डिंग कंपनी के शेयरधारकों को लाभांश पर लाभांश वितरण कर लगेगा, जो एसएफबी शेयरधारकों के वैल्यू के लिए स्थायी नुकसान है।
 
इस बीच, बाजार को भी एसएफबी की सूचीबद्धता पर एतराज है। उदाहरण के लिए इक्विटास ने अपने खाते को विसाखित किया है और माइक्रोफाइनैंस कारोबार पर अपनी निर्भरता दो साल पहले के 50 फीसदी के मुकाबले जून 18 की तिमाही में 27 फीसदी पर ला दिया है। छोटे कारोबार को उधारी, वाहन कर्ज व प्रॉपर्टी लोन फाइनैंसर के लिए उधारी के प्रमुख क्षेत्र बन गए हैं, लेकिन ये लाभ व संपत्ति गुणवत्ता की कीमत पर हुए हैं। हालांकि हालांकि इसका शुद्ध ब्याज मार्जिन दो साल पहले के 12 फीसदी के मुकाबले घटकर 7.2 फीसदी रह गया और सकल गैर-निष्पादित आस्तियां 1.4 फीसदी से बढ़कर 2.8 फीसदी पर पहुंच गया। हालांकि नोटबंदी से लगे झटके से यह उबर गई है।
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