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बेनामी मामलों को निपटाने के लिए अपील न्यायाधिकरण

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली October 24, 2018

बेनामी लेनदेन से जुड़े मामलों को जल्दी से जल्दी निपटाने के लिए कैबिनेट ने बुधवार को अपील  न्यायाधिकरण और निर्णयन प्राधिकरण की स्थापना को मंजूरी दे दी। इस तरह के लेनदेन काल्पनिक नामों से होते हैं। सरकार ने निर्णयन प्राधिकरण की स्थापना को मंजूरी दी है। साथ ही अपीली न्यायाधिकरण को भी मंजूरी दी गई है, जहां प्राधिकरण के आदेश को चुनौती दी जा सकेगी। 

इस समय बेनामी मामलों पर धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गठित प्राधिकरण फैसला करता है। आयकर विभाग द्वारा बेनामी संपत्तियोंं को जब्त करने के आदेश को संपत्ति जब्त किए जाने के एक साल के भीतर प्राधिकरण में चुनौती देनी होती है, वर्ना इसकी अवधि खत्म हो जाती है।

इस महीने की शुरुआत में सरकार ने 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सत्र न्यायालय अधिसूचित किया था, जो बेनामी लेनदेन कानीन के तहत हुए अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय के रूप में काम करेंगे।  बेनामी लेनदेन उन लेनदेन को कहते हैं, जो फर्जी नामों से किया जाता है।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक  निर्णयन प्राधिकरण और अपीली न्यायाधिकरण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में स्थित होंगे। निर्णयन प्राधिकरण का पीठ कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में भी हो सकता है और इस सिलसिले में जरूरी अधिसूचना प्रस्तावित निर्णयन प्राधिकरण के चेयरपर्सन से सलाह के बाद जारी की जाएगी। 

विज्ञप्ति में कहा गया है, 'इस मंजूरी से प्रभावी और बेहतरीन प्रशासन मिल सकेगा और निर्णयन प्राधिकरण के माध्यम से ऐसे मामलों पर तेजी से फैसला हो सकेगा।'  इसके अलावा निर्णय देने वाले प्राधिकरण के आदेश के खिलाफ दाखिल अपील को जल्द से जल्द निपटाने में मदद मिलेगी।

बेनामी लेनदेन पर अंकुश लगाने के लिए एक नवंबर 2016 को बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम पारित किया गया था। इसके प्रभावी होने के बाद मौजूद बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम 1988 का नाम बदलकर बेनामी संपत्ति लेनदेन पर निषेध का अधिनियम 1988 हो गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक आयकर विभाग ने इस साल 30 जून तक 43 अरब रुपये की बेनामी संपत्तियां जब्त की हैं। 

Keyword: Benami Transaction, Cabinet, Government, PMLA,
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