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सीबीआई घमासान पर एसआईटी करेगी जांच

अर्चिस मोहन / नई दिल्ली 10 24, 2018

आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना छुट्टी पर भेजे गए

संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव बनाए गए कार्यवाहक प्रमुख
वर्मा की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय
सरकार ने कहा कि सीवीसी की सिफारिशों पर लिया गया फैसला
सीबीआई ने कहा कि एसआईटी जांच होगी निष्पक्ष और पारदर्शी

बिजनेस स्टैंडर्ड सीबीआई घमासान पर एसआईटी करेगी जांचसरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में गुटबाजी खत्म करने के लिए एजेंसी के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना से सारे अधिकार वापस लेते हुए उन्हें मंगलवार रात छुट्टी पर भेज दिया। विपक्ष ने वर्मा को हटाने के सरकार के फैसले को अवैध बताते हुए इसे सीबीआई कानून का उल्लंघन बताया।

दूसरी ओर सरकार ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि दोनों अधिकारियों को केंद्रीय सतर्कता आयोग कानून, 2003 के तहत उनके कामकाज से हटाया गया है। सरकार ने दोनों अधिकारियों पर लगे आरोपों की जांच के लिए आज एक विशेष जांच दल भी गठित कर लिया। 1986 बैच के ओडिशा काडर के आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव को सीबीआई का कार्यवाहक प्रमुख बनाया गया है। 

देश की शीर्ष जांच एजेंसी के 55 साल के इतिहास में यह इस तरह का पहला मामला है। सरकार ने साथ ही एजेंसी में अहम मामलों की जांच कर रहे अधिकारियों का भी तबादला कर दिया। इसमें 15 अक्टूबर को अस्थाना और अन्य के खिलाफ दायर मामला भी शामिल है। लेकिन सरकार के इस कदम के बावजूद सीबीआई में जारी विवाद जल्दी खत्म होने की संभावना नहीं है। वर्मा ने उनसे अधिकार वापस लेने के सरकार के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। अपनी याचिका में उन्होंने कहा है कि सरकार का फैसला एजेंसी की स्वायत्तता में हस्तक्षेप है।

चयन समिति को किया गया दरकिनार : विपक्ष  

वर्ष 1979 बैच के अग्मुट काडर के अधिकारी वर्मा ने कहा कि केंद्र और सीवीसी का कदम अवैध है और इस तरह के हस्तक्षेप से सीबीआई की आजादी तथा स्वायत्तता को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि सीबीआई को कार्मिक  एवं प्रशिक्षण विभाग से अलग रखा जाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि सीबीआई इसी विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है और यह स्थिति उसके स्वतंत्र कामकाज को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। यह विभाग प्रधानमंत्री के अधीन होता है। 

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को वर्मा की याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। सीबीआई निदेशक का कार्यकाल दो साल का होता है और वर्मा को अगले साल जनवरी में सेवानिवृत्त होना था। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने तीन सदस्यीय चयन समिति को दरकिनार किया है जिसमें प्रधानमंत्री, देश के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता होते हैं। सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति और उसे हटाने का अधिकार इसी समिति को होता है। 

विपक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि सीबीआई निदेशक को इसलिए छुट्टी पर भेजा गया क्योंकि वह राफेल विमान सौदे में जांच के आदेश देने वाले थे। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष कपोल कल्पना कर रहा है। अलबत्ता पूर्व केंद्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी तथा वरिष्ठï अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने राफेल विमान सौदे में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करते हुए बुधवार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। भूषण ने कहा, 'वर्मा को इसलिए हटाया गया क्योंकि मैंने शौरी और सिन्हा के साथ मिलकर चार अक्तूबर को वर्मा के पास राफेल घोटाले की शिकायत दर्ज की थी।'

अपने बयान में सरकार ने वर्मा पर आरोप लगाया कि वह सीवीसी के कामकाज में जानबूझकर बाधा उत्पन्न कर रहे थे। आयोग उनके खिलाफ भ्रष्टïाचार के शिकायतों की जांच कर रहा था। सरकार ने कहा कि वर्मा और अस्थाना के बीच टकराव से एजेंसी में माहौल खराब हो रहा था जिससे इसकी विश्वसनीयता और छवि को नुकसान हो सकता है।

कांग्रेस प्रवक्ता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि वर्मा और अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले को सरकार एक जैसा दिखाने का प्रयास कर रही थी। उन्होंने कहा कि अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के 7 मामले दर्ज हैं लेकिन सीवीसी ने किसी भी मामले की जांच नहीं की। सरकार ने अपने बयान में कहा कि सीवीसी ने असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए वर्मा और अस्थाना की सभी शक्तियां लेने का आदेश दिया है।

इसमें बताया गया कि सीवीसी अधिनियम 2003 की धारा 8 के तहत सतर्कता आयोग ने डीपीएसई (सीबीआई) के कामकाज पर अपनी शक्तियों का उपयोग किया है, जहां तक कि यह भ्रष्टाचार निरोधन कानून 1988 के तहत अपराध की जांच से संबंधित है। बयान में कहा गया, 'इसे अंतरिम उपाय के तौर पर किया गया है और जब तक सीवीसी हालिया असाधारण और अभूतपूर्व परिस्थिति के लिए जिम्मेदार सभी मामलों की जांच नहीं कर लेती और सीवीसी या भारत सरकार इस पर जरूरी निर्णय लेती है, यह उपाय जारी रहेगा।'

अस्थाना ने 24 अगस्त को सरकार को भेजी शिकायत में वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जिसे सीवीसी को सौंप दिया गया है। सीवीसी ने सीबीआई से मांग की थी कि अस्थाना की शिकायत में दर्ज मामले की फाइल उसे सौंपी जाए। बयान में कहा गया, 'ये रिकॉर्ड देने के लिए बहुत से अवसर दिए गए और कई बार स्थगन के बाद सीबीआई ने 24 सितंबर 2018 को आयोग को तीन हफ्ते के भीतर रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया। बार बार आश्वासन मिलने के बाद भी सीबीआई निदेशक ये रिकॉर्ड तथा फाइलें आयोग के सामने प्रस्तुत करने में विफल रहे।'

Keyword: Government, CBI, Aalok Verma, CVC, Odisha Cadre, Rakesh Ashthana,
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