बिजनेस स्टैंडर्ड - एनबीएफसी को खास सुविधा नहीं
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एनबीएफसी को खास सुविधा नहीं

सोमेश झा / नई दिल्ली 10 24, 2018

एनबीएफसी का मामला

भारतीय रिजर्व बैंक ने तरलता बढ़ाने के लिए विशेष सुविधा देने से किया इनकार
आरबीआई के मुताबिक एनबीएफसी में अभी व्यापक नकदी संकट की स्थिति नहीं
सरकार ने आरबीआई से पीसीए नियमों में ढील देने का किया आग्रह
बोर्ड की अगली बैठक में पीसीए में ढील पर हो सकता है विचार
पिछले हफ्ते आरबीआई ने एनबीएफसी में नकदी बढ़ाने के किए थे उपाय

बिजनेस स्टैंडर्ड एनबीएफसी को खास सुविधा नहींभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को पुनर्वित्त के लिए विशेष सुविधा देने से इनकार कर दिया है। सूत्रों ने कहा कि आरबीआई को लगता है कि फिलहाल कोई व्यवस्थागत जोखिम नहीं है। मामले के जानकार एक शख्स ने बताया, 'ऋण के लिए विशेष सुविधा की अभी जरूरत नहीं दिख रही है। नियामक फिलहाल पूरी तरह से हस्तक्षेप करने के पक्ष में नहीं है। देश में 11,000 से अधिक एनबीएफसी में से केवल 200 ही जमा लेती हैं, ऐसे में प्रणालीगत मामला नहीं है।' 

सूत्रों के मुताबिक आरबीआई का यह रुख वित्त मंत्रालय के विचार से अलग है। सरकार के प्रतिनिधियों का मानना है कि एनबीएफसी, खास तौर पर छोटी और आवास ऋण कंपनियां नकदी संकट का सामना कर रही हैं जबकि आरबीआई का मानना है कि नकदी का संकट व्यापक स्तर पर नहीं है।

मंगलवार को आरबीआई की बोर्ड बैठक में एनबीएफसी में नकदी की स्थिति के साथ ही त्वरित उपचारात्मक कार्रवाई (पीसीए) नियमों में ढील देने के सरकार के अनुरोध पर विचार किया गया। सूत्रों के अनुसार सरकार चाहती है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पूंजी मुक्त करने के लिए पीसीए में ढील दी जाए जिससे बैंकों को अपने कारोबार के विस्तार में मदद मिल सके।

आरबीआई के बोर्ड में सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल आर्थिक मामलों के सचिव एस सी गर्ग और वित्तीय सेवाओं के सचिव राजीव कुमार भी बैठक में मौजूद थे। सूत्रों ने कहा कि आरबीआई दीवाली के बाद फिर बोर्ड की बैठक बुलाएगा, क्योंकि एनबीएफसी से जुड़ी सभी जानकारियां उपलब्ध नहीं हो पाई थीं। 

सूत्रों ने कहा, 'आम तौर पर बोर्ड की बैठक इतनी जल्दी नहीं होती है। एनबीएफसी पर कोई निर्णय लेने से पहले बोर्ड एक बार फिर दीवाली के बाद बैठक करेगा।' बीते शुक्रवार को आरबीआई ने कुछ नियामकीय ढील और प्रोत्साहनों की घोषणा की थी, जिससे बैंकों के पास एनबीएफसी और आवास ऋण कंपनियों को ज्यादा कर्ज देने में सहूलियत होगी। आईएलऐंडएफएस मामले के बाद कर्ज मिलने में आ रही दिक्कत को देखते हुए ये कदम उठाए गए थे।

इस माह की शुरुआत में सरकार ने पात्र आवास ऋण कंपनियों के लिए राष्ट्रीय आवास बैंक के पुनर्वित्त की सीमा को 240 अरब रुपये से बढ़ाकर 300 अरब रुपये करने की घोषणा की थी। बोर्ड बैठक में सरकार के अनुरोध और बैंकरों की मांग को देखते हुए पीसीए नियमों में ढील देने और कुछ बैंकों को इसके दायरे से बाहर निकालने पर भी विचार किया गया। सूत्रों ने कहा, 'पीसीए नियमों में ढील को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया। बैंकों ने अभी दूसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा नहीं की है और उनके प्रदर्शन के आधार पर बोर्ड की अगली बैठक में विचार किया जाएगा।' 

हालांकि सरकार के एक अधिकारी का कहना है कि अगले कुछ हफ्ते में पीसीए प्रारूप में कुछ बदलाव होने की उम्मीद है। एक वरिष्ठï अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, 'आर्थिक नीति को लचीला बनाने की जरूरत है। हम उम्मीद करते हैं कि इस वित्त वर्ष में कुछ बैंक पीसीए से बाहर आ सकते हैं। दिवालिया अदालतों में समाधान प्रक्रिया और सरकार के पुनर्पूंजीकरण से इन बैंकों को मदद मिलेगी।' 

सरकार को उम्मीद है कि गैर-निष्पादित आस्तियों के 12 बड़े मामलों के समाधान से  बैंकों को करीब 1 लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं। सरकार का मानना है कि पीसीए नियमों में ढील से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के करीब 600 से 650 अरब रुपये मुक्त हो सकते हैं। हालांकि आरबीआई ने हाल ही में संकेत दिया था कि वह बैंकों के लिए पीसीए नियमों में ढील देने के पक्ष में नहीं है। 

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा था कि पीसीए से बैंकों के जोखिम को स्थिर करने में मदद मिलती है और इसके नियमों में ढील देने से बचा जाना चाहिए।आरबीआई पीसीए को बैंकों की वित्तीय सेहत की चेतावनी के तौर पर इस्तेमाल करता है। 

बैंकों की निश्चित पूंजी संपत्ति की गुणवत्ता और एनपीए सीमा बढऩे के बाद आरबीआई संबंधित बैंक को पीसीए के दायरे में लाता है। पीसीए को 2022 में लाया गया था लेकिन 2017 में इसके नियमों को सख्त बनाया गया है। आरबीआई ने 21 सार्वजनिक बैंकों में से 11 को इसके दायरे में रखा है।  (साथ में अरूप रायचौधरी) 

Keyword: RBI, NBFC, Debt, Regulator, Government, Cash crisis, PCA,
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