बिजनेस स्टैंडर्ड - कैंटीन सेवाओं पर लगेगा जीएसटी
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कैंटीन सेवाओं पर लगेगा जीएसटी

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 10 22, 2018

आया फैसला
केरल के अपील प्राधिकरण ने पुष्ट किया कि कैंटीन सेवाओं पर जीएसटी लगेगा

अब कैंटीन के अलावा कर्मचारियों को लैपटॉप देने जैसी सेवाओं पर कर को लेकर भी करना होगा विचार

केंद्र ने 10 जुलाई 2017 को कहा था कि कर्मचारियों को अनुबंध के मुताबिक सुविधाएं देना जीएसटी के दायरे में नहीं

बिजनेस स्टैंडर्ड कैंटीन सेवाओं पर लगेगा जीएसटीकेरल के अपील प्राधिकरण ने कैंटीन सेवाओं के लिए नियोक्ताओं द्वारा कर्मचारियों से लिए गए खाद्य व्यय पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लगाए जाने के राज्य के एडवांस अथॉरिटी फॉर रूलिंग (एएआर) के आदेश को सही ठहराया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कंपनियों को अपने कर्मचारियों को दी जाने वाली सेवाओं का मूल्यांकन करना होगा कि वे सेवाएं जीएसटी के दायरे में आती हैं या नहीं। ऐसा इसलिए है क्योंकि सरकार के पहले के बयान में कहा गया था कि नियोक्ता द्वारा ठेके की शर्तों के मुताबिक अपने कर्मचारी को की गई कोई भी आपूर्ति जीएसटी के दायरे में नहीं होगी।  

केपीएमजी के अप्रत्यक्ष कर के पार्टनर हरप्रीत सिंह ने कहा, 'सभी कंपनियों के लिए मूल्यांकन के हिसाब से यह अहम है। न सिर्फ खाद्य व्यय की वसूली के मामले में, बल्कि कर्मचारियों को दिए जाने वाले अन्य लाभों को लेकर भी जीएसटी के असर का निर्धारण करना होगा।' उन्होंने कहा कि विभिन्न पहलुओं जैसे रोजगार कॉन्ट्रैक्ट, प्राप्तियां, सबके लिए उपलब्ध कराया जाने वाला लाभ, कुछ कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ आदि का मूल्यांकन किए जाने की जरूरत होगी।

इसके पहले फुटवीयर का निर्माण व बिक्री करने वाली कालटेक पॉलीमर्स लिमिटेड ने केरल एएआर से संपर्क कर जानना चाहा था कि कर्मचारियों को कैंटीन सेवा मुहैया कराने से मिलने वाले धन पर जीएसटी लागू होगा या नहीं। यह धन लागत के आधार पर लिया जाता है और इसमें कोई मुनाफा नहीं जोड़ा जाता।  

एएआर ने कहा था कि नियोक्ता द्वारा कैंटीन में कर्मचारियों को खाद्य पदार्थ बेचने से जो धन मिलता है, उस पर जीएसटी लगेगा। उसके बाद कालटेक  पॉलिमर्स ने अपीलायट अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग (एएएआर) केरल से संपर्क साधा था। एएएआर ने कहा, 'अपील करने वाली कंपनी द्वारा कर्मचारियों को कैंटीन के माध्यम से की गई खाद्य की बिक्री आपूर्ति की परिभाषा में आएगी और यह जीएसटी के तहत कर के दायरे में होगी।' केंद्र सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से 10 जुलाई 2017 को साफ किया था कि अतिरिक्त सुविधाएं देने पर कर लगना या न लगना निर्भर होगा।

इसमें साफ किया गया था कि अगर नियोक्ता अपने कर्मचारियों को कोई आपूर्ति कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के मुताबिक करता है, जो नियोक्ता और कर्मचारी के बीच हुआ है, तो वह जीएसटी के दायरे में नहीं आएगा। एक विशेषज्ञ ने कहा कि कंपनी द्वारा अपने सभी कर्मचारियों को खाद्य पदार्थ मुहैया कराना ऐसा ही हो सकता है, जैसे कर्मचारियों को लैपटॉप आदि दिया जाता है और उस पर जीएसटी लागू नहीं किया जा सकता। 

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