बिजनेस स्टैंडर्ड - ईपीएफओ के रोजगार के आंकड़ों पर सवाल
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ईपीएफओ के रोजगार के आंकड़ों पर सवाल

सोमेश झा / नई दिल्ली 10 22, 2018

रोजगार के आंकड़ों में अब तक स्थिरता नहीं, बदल रहे आंकड़े

बिजनेस स्टैंडर्ड ईपीएफओ के रोजगार के आंकड़ों पर सवालएक साल बीतने के बाद भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के रोजगार के आंकड़ों में अब तक स्थिरता नहीं आई है और ये अभी 'अनंतिम' प्रकृति के बने हुए हैं। सरकार इस आंकड़े का इस्तेमाल रोजगार का अनुमान लगाने के लिए कर रही है, लेकिन रोजगार के अनुमान को लेकर आंकड़े की विश्वसनीयता पर अभी भी सवाल है।

इस साल अप्रैल महीने में ईपीएफओ ने सितंबर 2017 से शुद्ध रोजगार के अनुमान जारी करना शुरू किया था। उसके बाद से हर महीने ईपीएफओ आंकड़े जारी कर रहा है और हाल का अनुमान शनिवार को जारी किया गया, जिसके मुताबिक सितंबर 2017 के आंकड़ों में बदलाव हुआ है।  

आधिकारिक विज्ञप्ति से पता चलता है कि हाल के आंकड़ों में सितंबर 2017 के शुद्ध रोजगार अनुमान में 12 प्रतिशत की तेज गिरावट आई है। अप्रैल में जब पहला अनुमान जारी किया गया था तो सितंबर 2017 में शुद्ध रोजगार 5,96,493 था। हाल के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2017 में कुल रोजगार 4,25,022 रहा है, जिसमें सबसे पहले जारी किए गए आंकड़ों की तुलना में करीब 29 प्रतिशत की गिरावट आई है। वहीं पिछले महीने जो आंकड़े जारी किए गए थे, उसके मुताबिक सितंबर 2017 में 4,82,442 रोजगार मिले थे। 

इसका यह भी मतलब है कि नियोक्ता अपना रिटर्न ईपीएफओ को समय पर नहीं फाइल कर रहे हैं, जिसमें संस्थान, रोजगार, भविष्य निधि में योगदान के साथ अन्य ब्योरा होता है। आंकड़े जारी करते समय ईपीएफओ की ओर से दिए गए डिस्क्लेमर के मुताबिक, 'यह आंकड़े अनंतिम हैं क्योंकि कर्मचारियों के रिकॉर्ड को अद्यतन करना निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और यह आने वाले महीनों में अद्यतन होते रहेंगे।'

रिटर्न दाखिल करने में देरी एक साल से ज्यादा तक की हो जाती है, जबकि ईपीएफओ का स्पष्ट दिशानिर्देश है कि नियोक्ता को अगले महीने की 25 तारीख को उस माह का रिटर्न दाखिल करना चाहिए। इसका मतलब यह है कि सितंबर 2017 के आंकड़े नियोक्ता को आदर्श रूप में 25 अक्टूबर को दे देना चाहिए और अगर कंपनियां ऐसा नहींं कर पाती हैं तो उन्हें ईपीएफओ को जुर्माना देना होगा।

लेकिन हकीकत यह है कि नियोक्ता अभी भी अक्टूबर तक का रिटर्न दाखिल कर रहे हैं, जिसमें कर्मचारियों के संगठन छोड़ जाने या भविष्य निधि में योगदान की सूचना है। इससे निजी क्षेत्र के फर्मों के खराब अनुपालन का पता चलता है।  

आधिकारिक अनुमान के अन्य मामलों में जैसे थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा तैयार किए जाने वाले महंगाई दर के आंकड़ों में अनंतिम आंकड़े दो महीने के लिए होते हैं। उदाहरण के लिए सितंबर महीने के लिए अक्टूबर में डब्ल्यूपीआई के आंकड़े आए जबकि जुलाई के अंतिम आंकड़े आए थे।

रोजगार के मासिक आंकड़ों में गिरावट को देखते हुए ईपीएफओ ने पिछले महीने से अपनी पहले की नौकरी छोडऩे और नई नौकरी शुरू करने वालों के आंकड़े जुटाना शुरू किया है। इस तरह से शुद्ध रोजगार की गणना नई नौकरी शुरू करने और पुरानी नौकरी छोडऩे वाले अंतर से होगी। 

सोमवार को इंडियन एक्सप्रेस में छपे एक साक्षात्कार में भारत के मुख्य सांख्यिकीविद प्रवीण श्रीवास्तव ने माना था कि ईपीएफओ के आंकड़ों में त्रुटियां हैं और कहा था कि इसे औपचारिक प्रतिरूप के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि नौकरियों के सृजन के रूप में।

श्रीवास्तव ने कहा कि नियोक्ता देर से फाइलिंग पर जुर्माने का भुगतान करते हैं और जब वे ऐसा करते हैं तो तो उन आंकड़ोंं को ईपीएफओ के रोजगार अनुमान में शामिल किया जाता है। उन्होंने यह भी साफ किया कि नौकरी छोडऩे या सेवानिवृत्त होने वालों की सूचना देने को लेकर कोई समयसीमा नहीं तय है।  

हालांकि सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने कहा है कि ईपीएफओ के  आंकड़े औपचारिक क्षेत्र में रोजगार को लेकर एक 'दृष्टिकोण' देते हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न मौकों पर रोजगार सृजन के रूप में इन आंकड़ों को पेश करते रहे हैं।

मोदी ने जुलाई में एक साक्षात्कार के दौरान ईपीएफओ के आंकड़ों के आधार पर कहा था कि सितंबर 2017 और अप्रैल 2018 के बीच 41 लाख नौकरियां मिली हैं। अगस्त में जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि के बीच नौकरियों का पुनरीक्षित अनुमान बदलकर 33 लाख हो गया और सितंबर में जारी आंकड़ों के मुताबिक रोजगार की संख्या 37 लाख और अक्टूबर में जारी हाल के आंकड़ों के मुताबिक 39 लाख है। 

प्रधानमंत्री कार्यालय की सिफारिश पर पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद टीसीए अनंत की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है, जिसे यह बताना है कि उद्यम स्तर पर नौकरियों के तिमाही सर्वे की जगह ईपीएफओ के रोजगार के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। समिति को मई में रिपोर्ट पेश करनी थी, लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं आई है। 
Keyword: Employment, EPFO, data, job, government job, private job, release,
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