बिजनेस स्टैंडर्ड - महंगे सोने से आशंकित सराफा कारोबारी
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महंगे सोने से आशंकित सराफा कारोबारी

सुशील मिश्र / मुंबई October 22, 2018

दशहरे के शुभ मुहूर्त में आभूषण खरीदने पहुंचे ग्राहकों के होश उड़ गए। सराफों के यहां दशहरे के मौके पर सोना तेजी के अब तक के सारे रिकॉर्ड पार कर चुका था। त्योहारी सीजन होने से उनके यहां ग्राहकों की भीड़ तो है, लेकिन सोने की बढ़ती कीमतों के चलते इस बार धनतेरस और दीवाली पर कारोबार फीका रहने की आशंका है। दशहरे पर पिछले छह साल में पहली बार सोना 30,000 रुपये के ऊपर बिका जबकि इसके पहले सोना कभी 31,000 के पार नहीं गया था। वैश्विक बाजार में सोने के दाम बढऩे और डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी से घरेलू बाजार में सोने की चमक लगातार बढ़ रही है। मगर यह चमक त्योहारी मांग फीकी कर सकती है। इस साल सोना पिछले साल के मुकाबले करीब सात फीसदी महंगा है। दशहरे के दिन सोने की कीमत 31,670 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। ऊपर से तीन फीसदी जीएसटी और मेकिंग चार्ज। पिछले दशहरे पर सोने की कीमत 29,695 रुपये थी। इस बार सोना सात साल बाद 31,000 के पार पहुंचा है। हालांकि यह रहा 30,000 रुपये से ऊपर ही। कारोबारियों का अनुमान है कि इस बार धनतरेस पर सोना 33,000 रुपये के ऊपर जा सकता है। 
 
सराफों को आशंका है कि तेजी के कारण धनतेरस और दीवाली पर ज्वैलरी की बिक्री पर असर पड़ सकता है। हालांकि कुछ सराफे कहते हैं कि सोना निवेश के लिए बेहतर विकल्प बन कर उभरा है इसलिए इस बार कीमतें ज्यादा होने के बावजूद बिक्री अधिक होगी। मुंबई ज्वैलर्स एसोसिएशन के सचिव कुमार जैन कहते है कि कीमतें बढऩे का बिक्री पर असर नहीं पडऩे वाला है क्योंकि लोग मान चुके हैं कि रुपये में अभी और गिरावट आएगी। ऐसे में कीमतें और बढ़ेगी। यह बात सोने के आयात से भी समझी जा सकती है। भारत में औसतन सालाना 800 टन सोना आयात होता है जो पूरा होने के करीब है। इस बार दशहरे पर हर तरीके के आभूषणों की मांग थी। यह रुझान आगे भी बना रह सकता है। जैन कहते हैं कि आने वाले दिनों में मांग बनी रहने वाली है क्योंकि त्योहारी सीजन के साथ शादी विवाह का भी सीजन शुरु होने वाला है जो अगले साल जुलाई तक चलेगा। 
 
इंडियन बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन सदस्य एवं संगम ज्वैल ऐंड गोल्ड के निदेशक रमन सोलंकी कहते हैं कि सोने की चमक का असर धनतेरस पर दिखेगा। त्योहारी सीजन पर कीमतें बढऩे से मध्य वर्ग खरीदारी से दूर हो जाता है। महाराष्ट्र के कई इलाकों में सूखे की स्थिति है जिससे ग्रामीण इलाकों में बिक्री पिछले साल की अपेक्षा कम रह सकती है। सोलंकी कहते हैं कि निवेशकों की संख्या भले ही बढ़े लेकिन आभूषण खरीदने वालों की संख्या में कमी आएगी। सोने की चमक बढऩे से सबसे ज्यादा आशंकित छोटे सराफे हैं। सांताक्रूज में आभूषण विक्रेता प्रवीण भाई कहते हैं कि 30 हजार के ऊपर जाने से लोगों को लग रहा है कि सोना महंगा हो गया है, थोड़ा रुक कर खरीदारी की जाए। यही धारणा इस बार त्योहारों को फीका करने वाली है। सबसे ज्यादा नुकसान छोटे ब्रांडों और सराफों को होने वाला है क्योंकि छोटे लोगों के ग्राहक कम पूंजी वाले और परांपरागत हैं। 
Keyword: gold,सराफा बाजार, आभूषण,
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