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तेल की ऊंची कीमतों से उत्साह पड़ा ठंडा

उज्ज्वल जौहरी /  October 21, 2018

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और रुपये में गिरावट से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एïवं गैस कंपनियों के मुनाफे को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, जिससे उनके शेयरों की कीमतों में 7 से 19 फीसदी गिरावट आई है। हाल में सरकार के एक फैसले में तेल विपणन कंपनियों से खुदरा कीमतों में कमी के हिस्से का बोझ वहन करने को कहा गया है। इससे तेल विपणन कंपनियों के विपणन मार्जिन पर 1 रुपये प्रति लीटर का असर पड़ा है। बाजार का मानना है कि सरकार का यह कदम पेट्रोल एवं डीजल की नियंत्रण मुक्त कीमत प्रणाली के अपने रुख से पीछे हटना है। 

 
हालांकि सरकार ने कहा है कि यह एकबारगी का उपाय  है, लेकिन निवेशक आगामी चुनावों को लेकर सशंकित रहेंगे। उन्हें चिंता है कि सरकार कीमतों में बढ़ोतरी होने पर हस्तक्षेप कर सकती है। इन सब घटनाक्रमों और रुपये में गिरावट से न केवल तेल विपणन कंपनियों बल्कि ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों को लेकर भी अनिश्चितता पैदा हो गई है। हालांकि इस समय अपस्ट्रीम कंपनियों को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये में गिरावट से फायदा हो रहा है। रुपये में गिरावट से उनका विदेशी तेल क्षेत्रों से उत्पादन और लाभप्रद हो जाता है। गैस की ऊंची कीमतें भी ओएनजीसी, ऑयल इंडिया और गेल के लिए अच्छी हैं। ओएनजीसी का गैस का उत्पादन बढऩे से उसकी आमदनी में इजाफा होगा। इस तरह शुरुआत में गिरावट के बाद उनके शेयरों की कीमतों में सुधार आया है। 
 
माना जा रहा है कि किसी संभावित सब्सिडी का बोझ वहन करने वाली अंतिम कंपनी गेल होगी। हालांकि इस कंपनी को सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है। गेल को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का बड़ा लाभ मिला है क्योंकि इससे कंपनी के एनपीजी उत्पादन कारोबार में स्प्रेड्स सुधरेंगे। इससे कंपनी को एलएनजी की ट्रेडिंग में ऊंचा मार्जिन भी मिलेगा। एलपीजी का मतलब लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस और एलएनजी का लिक्विफाइड नैचुरल गैस है।  हालांकि एकसमान कीमत को लेकर फैसला लंबित है, लेकिन नियामक ने हाल में गेल की चार गैस पाइपलाइनों के लिए शुल्क में बढ़ोतरी की मंजूरी दे दी है। गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का मतलब है कि गेल के ऊंची कीमत के अमेरिकी और रूसी टेक-ओर-पे अनुबंध अब कंपनी के लिए बेचना व्यवहार्य एवं आसान बन गए हैं। टेक-ओर-पे अनुबंधों के तहत खरीदार तेल एवं गैस खरीदने के लिए करार करता है। अगर खरीदार बाद में खरीदारी नहीं करने का फैसला करता है तो उसे शुल्क का भुगतान करना होता है। भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के रिफाइनिंग कारोबार में कुछ नरमी आ सकती है क्योंकि बेंचमार्क सकल रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) में गिरावट आई है। हालांकि कंपनी के विभिन्न राजस्व स्रोत है, इसलिए उसे नुकसान की कुछ भरपाई करने में मदद मिलेगी। उदाहरण के लिए पेट्रोकेमिकल मार्जिन बेहतर रहने के आसार हैं। वहीं क्षमता में विस्तार से इस खंड का उत्पादन बढ़ेगा। अनुकूल विनिमय दर से आरआईएल को मदद मिलेगी। 
Keyword: crude oil, price, iran, america, अमेरिका, भारत, चीन,
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