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एनबीएफसी के मुकाबले बेहतर दिख रहे बैंक

हंसिनी कार्तिक /  October 21, 2018

बैंकों के बारे में कहा जाता है कि एक बैंक का नुकसान दूसरे के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। एनबीएफसी क्षेत्र के समक्ष पैदा हुए नकदी संकट से भी बैंकों को खुदरा ऋण क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने और अपना ऋण आधार बढ़ाने में फायदा मिल सकता है। विश्लेषक निजी बैंकों के लिए 15-20 फीसदी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए 8-10 प्रतिशत वृद्घि का अनुमान जता रहे हैं। हालांकि वित्त वर्ष 2019 के ज्यादातर समय अन्य आय का रुझान कमजोर बना रह सकता है। प्रभुदास लीलाधर के प्रितेश बंब का कहना है, 'बैंकों के लिए अन्य आय पर दबाव बना रहेगा और परिचालन प्रदर्शन अस्थिर रहेगा।' परिचालन के लिहाज से बैंकों के लिए गैर-बैंकिंग ऋणदाताओं की प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है, जिससे उन्हें कोष की बढ़ती लागत का बोझ उपभोक्ता पर डालने में मदद मिल सकती है। लेकिन इससे मुनाफे में संभावित गिरावट से जुड़ी चिंताएं दूर नहीं होंगी। विश्लेषकों ने कहा, 'शुद्घ ब्याज मार्जिन (एनआईएम) पर दबाव पडऩे की आशंका है क्योंकि उधारी पोर्टफोलियो में वित्त वर्ष 2019 की दूसरी छमाही के दौरान बदलाव आएगा। इसके अलावा कोष की लागत बढ़ी है और कई बैंकों के सीएएसए (चालू खाता-बचत खाता)पर दबाव बना हुआ है।' फिर भी, कुल मिलाकर इस क्षेत्र को परिसंपत्ति गुणवत्ता चक्र की मजबूती से लाभ मिलने की संभावना है। बैंकों के संदर्भ में विश्लेषकों का मानना है कि अब असली मुद्दा कर्ज समाधान होगा, न कि फंसे कर्ज की पहचान, जैसा कि अतीत में देखा गया है। बंब कहते हैं, 'परिसंपत्ति गुणवत्ता पूरे क्षेत्र में मजबूत रह सकती है, बशर्ते कि स्लिपेज की समस्या न हो और एनसीएलटी के पास आए खातों से कुछ वसूली दर्ज की जाए।' इसके परिणामस्वरूप, सरकार के स्वामित्व वाली इकाइयों समेत इस क्षेत्र द्वारा दिसंबर तिमाही से अच्छा शुद्घ लाभ दर्ज किए जाने की संभावना है। कुल मिलाकर, हालात बैंकों के पक्ष में हैं और आईसीआईसीआई बैंक तथा ऐक्सिस बैंक इस क्षेत्र में खरीदारी के लिहाज से प्रमुख शेयरों में शुमार हैं। अगस्त के अंत में आई गिरावट के बाद से एचडीएफसी बैंक और इंडसइंड बैंक भी कई ब्रोकरों के पसंदीदा शेयर बने हुए हैं। 

 
एनबीएफसी
 
अभी भी कई समस्याएं एनबीएफसी की राह में बरकरार हैं और इनमें नकदी की किल्लत का व्यापक प्रभाव मुख्य रूप से शामिल है। जहां ज्यादातर मौजूदा नकदी संकट का असर सितंबर तिमाही के परिणामों में नहीं दिख सकता है, वहीं विश्लेषकों को यह तिमाही इन ऋणदाताओं के लिए आसान रहने के आसार नहीं दिख रहे हैं। क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों का मानना है कि म्युचुअल फंड (एमएफ) उद्योग अगले दो महीनों के दौरान एनबीएफसी के लिए अपने निवेश में 10 प्रतिशत तक की कमी कर सकता है। विश्लेषकों का कहना है, 'एनबीएफसी के लिए आधे से ज्यादा निवेश अल्पावधि वाणिज्यिक पत्रों के जरिये होता है जिससे अगले कुछ महीनों में एनबीएफसी की मुश्किलें बढ़ेंगी' इसके परिणामस्वरूप, यदि एनबीएफसी को कोष उपलब्धता की चुनौती की वजह से अपनी ऋण बुक के सुस्त विस्तार से जूझना पड़ता है तो विश्लेषकों को वित्त वर्ष 2019 में ऋण वृद्घि 10 प्रतिशत से नीचे रहने का अनुमान है।
 
मैक्वायरी कैपिटल के सुरेश गणपति का कहना है कि यदि अल्पावधि ऋण पत्रों तक पहुंच में कमी आती है तो एनबीएफसी क्षेत्र के लिए पूंजी पर प्रतिफल (आरओई) पर 3 प्रतिशत तक का प्रभाव देखा जा सकता है। वह कहते हैं, 'यदि परिसंपत्ति देनदारी प्रबंधन की राह में सख्त नियम सामने आते हैं, अल्पावधि फंडिंग के लिए पहुंच सीमित होती है तो आरओई 18-20 प्रतिशत से घटकर 15-17 प्रतिशत रह जाएगा।'अल्पावधि में ऋण बुक में गिरावट का प्रभाव एनबीएफसी की वित्तीय स्थिति पर अधिक देखा जा सकता है। बाजार दिग्गज एचडीएफसी ने 10 वर्षीय उधारी को हाल में बढ़ाकर 9.05 फीसदी (सामान्य से 80 आधार अंक अधिक) किया है जो इस बात का संकेतक है कि पूंजी किस तरह से महंगी हो रही है। 
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