बिजनेस स्टैंडर्ड - पहाड़ी राज्यों में जीएसटी रिफंड में आ रहीं मुश्किलें
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पहाड़ी राज्यों में जीएसटी रिफंड में आ रहीं मुश्किलें

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 10 21, 2018

जम्मू-कश्मीर में स्थिति और ज्यादा विवादास्पद

बिजनेस स्टैंडर्ड पहाड़ी राज्यों में जीएसटी रिफंड में आ रहीं मुश्किलेंवस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत कंपनियों को पहाड़ी इलाकों में रिफंड लेने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जिसमें जम्मू कश्मीर अहम है। जीएसटी के पहले के दौर में पहाड़ी राज्यों में 100 प्रतिशत उत्पाद शुल्क रिफंड मिलता था, वहीं एक राज्य से दूसरे राज्य में सामान की आवाजाही पर उन्हें एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) का 20 प्रतिशत रिफंड ही मिल रहा है। जम्मू कश्मीर में स्थिति और ज्यादा विवादास्पद हो गई है क्योंकि वहां की इकाइयों को इनपुट पर सेवा कर से छूट मिलती थी।

इसके अलावा वहां संयंत्र लगाने वालों का कहना है कि प्रक्रिया संबंधी मसलों की वजह से जम्मू कश्मीर और अन्य पहाड़ी राज्योंं में 29 प्रतिशत रिफंड भी मिलने में मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे इन राज्यों में रोजगार सृजन पर बुरा असर पड़ेगा। जिंदल ड्रग्स लिमिटेड, जिसकी जम्मू कश्मीर में इकाई है, के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जीएसटी लागू होने के पहले यह कर निरपेक्ष राज्य था, जहां सेवा कर और केंद्रीय उत्पाद शुल्क नहीं लगता था। उ्होंने कहा, 'कर निरपेक्ष राज्य की जगह अब जीएसटी लागू हो गया है। इसकी वजह से अब यहां कारोबार अव्यावहारिक है क्योंकि सेवा कर लागू है और जीएसटी रिफंड केवल 29 प्रतिशत मिल रहा है।'  

इसे लेकर जम्मू कश्मीर न्यायालय में एक मामला भी लंबित है।  याची के वकील अभिषेक रस्तोगी ने कहा कि जम्मू कश्मीर में 2002 में औद्योगिक नीति लागू हुई, जिसमें राज्य में इकाइयां लगाने वाली कंपनियों के साथ 10 साल तक भुगतान किए जाने वाले उत्पाद शुल्क के 100 प्रतिशत रिफंड का वादा किया गया। इसे घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया, जिसके खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर की गई। इस मामले में अलग से एक मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है। बहरहाल जीएसटी के दौर में एक राज्य से दूसरे राज्य में सामान की आवाजाही पर भुगतान किए गए आईजीएसटी का रिफंड घटाकर 29 प्रतिशत कर दिया गया। 

प्रक्रिया संबंधी दिक्कतों के कारण 29 प्रतिशत रिफंड भी कुछ मामले में उपलब्ध नहीं हो रहा है।  संबंधित प्राधिकारी इसे व्यक्तिगत लेजर खाते (पीएलए) से जुड़े मसले से जोड़ रहे हैं। पहले की कर व्यवस्था में कंपनियां इसके माध्यम से करों के नकदी का हिस्सा देती थीं। नई कर वव्यवस्था में उनहें ट्रांस फॉर्म के माध्यम से भुगतान करना है। पीएलए को ट्रांस कैश फॉर्मों से जोडऩे में व्यवस्था संबंधी समस्या आ रही है, ऐसे में कंपनियां इसे ट्रांस क्रेडिट फॉर्म से जोड़ रही हैं।  राज्य के कर अधिकारियों ने सि पर आपत्ति की है। वे कंपनियों से पीएलए बैलेंस और अन्य नकदी लाभ वापस करने को कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर तत्काल राहत नहींं दी गई तो तमाम इकाइयां अव्यावहारिक हो जाएंगी। रस्तोगी ने कहा कि जीएसटी परिषद ने राज्य के अधिकारियों को लिखा है कि रिफंड दिया जाना चाहिए, लेकिन यह हो नहीं रहा है। 

जम्मू कश्मीर न्यायालय में इस मसले पर 22 नवंबर को सुनवाई होगी। इस आदेश का असर अन्य पहाड़ी राज्योंं हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम सहित पूर्वोत्तर भारत के राज्यों पर भी पड़ेगा।  जीएसटी के दौर में कुछ कंपनियों को अन्य समस्या है। यह कंपनियों के विनिर्माण के आउटसोर्सिंग से जुड़ा है। इसके बारे में लूपिन लिमिटेड के अप्रत्यक्ष कर के उपाध्यक्ष मोहन नुसेट्टी ने कहा कि पहले के दौर में विनिर्माताओं को शुल्क देना होता था। जीएसटी के तहत यह जरूरी नहीं है कि विनिर्माता को कर देना है। उन्होंने कहा कि तार्किक तो यह होगा कि छूट का विस्तार उस व्यक्ति तक करना चाहिए जो राज्य में कर का भुगतान करता है, न कि इसे सिर्फ विनिर्माता तक सीमित किया जाना चाहिए। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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