बिजनेस स्टैंडर्ड - चुनावी साल में सरकारी नौकरियों की झड़ी
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चुनावी साल में सरकारी नौकरियों की झड़ी

शाइन जैकब और संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 10 21, 2018

सरकारी पदों पर जमकर नियुक्तियां

बिजनेस स्टैंडर्ड चुनावी साल में सरकारी नौकरियों की झड़ीअगले साल होने वाले आम चुनावों में बेरोजगारी एक अहम मुद्दा हो सकता है। यही वजह है कि केंद्र और राज्यों में सरकारी पदों पर जमकर नियुक्तियां की जा रही हैं। इसमें रेलवे में दुनिया का सबसे बड़ा भर्ती अभियान शामिल है। यह सब ऐसे वक्त हो रहा है जब कथित बेरोजगारी को लेकर मोदी सरकार को विपक्ष के आरोपों का सामना करना पड़ता है।  अगस्त में बेरोजगारी दर बढ़कर 6.4 फीसदी पर पहुंच गई जो एक साल पहले 4.1 फीसदी पर थी। अनुमानों के मुताबिक 2019 के अंत तक देश में विभिन्न पदों और श्रेणियों में 330,000 से अधिक लोगों को भर्ती किया जा सकता है। 

देश का सबसे बड़ा नियोक्ता रेलवे 2018-19 के दौरान 127,000 लोगों को भर्ती करेगा जिसके लिए 2.37 करोड़ अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। इसमें सहायक लोको पायलट, तकनीशियन, गैंगमैन सहित तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कई पद शामिल हैं। रेलवे ने अगस्त में यह अभियान शुरू किया था।  मोदी के कार्यकाल में यह दूसरा मौका है जब रेलवे रिक्त पदों पर भर्ती कर रहा है। वर्ष 2016-17 में रेलवे ने 18,000 कर्मचारियों की भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की थी जिसमें 92 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। 

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार के बड़े सार्वजनिक उपक्रम इस साल 25,000 से अधिक रोजगार देंगे। उद्योग के एक सूत्र ने कहा, 'तेल क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनियां करीब 5,000 लोगों को भर्ती कर सकती हैं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन करीब 1,000 कर्मचारियों की भर्ती करेगा जबकि ओएनजीसी 800 से 1,000 नौकरियां दे सकती हैं।' सरकार ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत 2022 तक 10 करोड़ रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा है और कई कंपनियां इसी के अनुरूप भर्तियां कर रही हैं। पिछले 15 वर्षों में 12 तेल कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या में 13 फीसदी कमी आई है। इसमें अनुबंध वाले कर्मचारियों की संख्या शामिल नहीं है। 

बिजनेस स्टैंडर्ड चुनावी साल में सरकारी नौकरियों की झड़ीसार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की शीर्ष संस्था स्टैंडिंग कॉफ्रेंस ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेज के आंकड़ों के मुताबिक सार्वजनिक कंपनियों में 11.3 लाख कर्मचारी हैं। इनमें अस्थायी और अनुबंध वाले कर्मचारी शामिल नहीं हैं।  इस बीच राज्यों ने भी सरकारी पदों पर भर्ती का अभियान तेज किया है। सूत्रों के मुताबिक दस राज्यों में विभिन्न स्तरों पर शिक्षकों के 78,000 पदों पर भर्तियां की जारी है। इनमें से 51,000 पद चुनावी राज्य मध्य प्रदेश और राजस्थान में हैं। अधिकारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार जून 2019 तक 100,000 पुलिसकर्मियों की भर्ती करेगी। इसमें से अधिकांश पद कॉन्सटेबल के हैं। राज्य में पुलिसकर्मियों के 42,000 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। 

इसे राज्य में पुलिस की सबसे बड़ी भर्ती माना जा रहा है।  इसके अलावा केंद्र और राज्यों में दूसरे विभागों में भर्तियां की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में तेजी का मुख्य कारण यह है कि केंद्र और राज्यों में कई विभागों में कई पद सालों से रिक्त पड़े हैं।  मोदी सरकार ने हर साल दस लाख रोजगार पैदा करने का वादा किया था लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि वह इस वादे को निभाने में नाकाम रही है। इस पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है क्योंकि देश में रोजगार के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। 

विश्लेषकों का दावा है कि देश में हर साल 1.2 करोड़ युवा रोजगार बाजार में प्रवेश करते हैं लेकिन उनके लिए पर्याप्त नौकरियां नहीं हैं। अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय कराए गए अध्ययन के मुताबिक देश में बेरोजगारी की दर पिछले 20 वर्षों में सर्वाधिक है। अलबता सरकार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा कर रही है कि देश में रोजगार पैदा हो रहे हैं।

एसबीआई समूह के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष और भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलूरु में प्रोफेसर पुलक घोष द्वारा कराए गए अध्ययन के मुताबिक 2017-18 में संगठित क्षेत्र में 70 लाख नौकरियां सृजित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साक्षात्मकार में इस अध्ययन का जिक्र किया था। इसी साक्षात्कार में उन्होंने असंगठित क्षेत्र में रोजगार सृजन की बात करते हुए 'पकोड़े बेचने वाले' का उदाहरण दिया था जिसकी बहुत आलोचना हुई थी। 

अब ईपीएफओ के आंकड़ों को सार्वजनिक कर दिया गया है। इसके मुताबिक इस वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में संगठित क्षेत्र में 32 लाख नौकरियों का सृजन किया गया। अलबत्ता इन आंकड़ों की अपनी सीमाएं हैं जिनमें दोहराव भी शामिल है। साथ ही ताजा आंकड़ों के मुताबिक संगठित क्षेत्र में नौकरी पाने वाले लोगों में एक-चौथाई ऐसे हैं जो नौकरियां बदल रहे हैं। 
Keyword: govt, jobs, railway, EPFO,,
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