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एनबीएफसी को ज्यादा कर्ज

अभिजित लेले और हंसिनी कार्तिक / मुंबई October 19, 2018

नकदी संकट से जूझ रहीं गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए तरलता बढ़ाने के वास्ते भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को नियमों में ढील देने की घोषणा की। इससे बैंक एनबीएफसी और आवासीय वित्तीय कंपनियों (एचएफसी) को और ज्यादा ऋण दे सकेंगे।

अलबत्ता आरबीआई का यह कदम बाजारों को पसंद नहीं आया और वित्तीय कंपिनयों के शेयरों में चार से 18 फीसदी तक की गिरावट आई। बैंकरों का कहना है कि केंद्रीय बैंक के इन उपायों से एनबीएफसी को तुरंत कोई राहत मिलने की संभावना नहीं है। आरबीआई ने एनबीएफसी के लिए एकल उधारकर्ता कर्ज सीमा बैंक की पूंजी के 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी है। यह सुविधा बुनियादी क्षेत्र को कर्ज देने वाली एनबीएफसी के लिए उपलब्ध नहीं होगी। 

केंद्रीय बैंक ने साथ ही बैंकों को एनबीएफसी और एचएफसी पर 19 अक्टूबर की स्थिति के ऊपर के अपने बकाया कर्ज के बराबर राशि की सरकारी प्रतिभूतियों को रिजर्व बैंक से धन लेने के लिए इस्तेमाल करने की छूट दे दी। इससे बैंकों को अपनी नकदी कवरेज अनुपात (एलसीआर) जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। इन प्रतिभूतियों को बैंकों की उच्च गुणवत्ता वाली नकदी परिसंपत्तियों की तरह माना जा सकता है जो नकदी निकासी की स्थिति से बचने के लिए पर्याप्त है।

आरबीआई के इस कदम को इस क्षेत्र के लिए सकारात्मक माना जा रहा है लेकिन यह एनबीएफसी के शेयरों में विश्वास जगाने में नाकाम रहा। इंडियाबुल्स फाइनैंशियल सर्विसेज और दीवान हाउसिंग फाइनैंस के शेयरों में गुरुवार को क्रमश: 17 फीसदी और 10 फीसदी की गिरावट आई जबकि एनबीएफसी के शेयर 5 से 20 फीसदी तक लुढके।

आरबीआई की तरफ से अच्छी खबर के बावजूद यह एनबीएफसी क्षेत्र की धारणा को बल देने में नाकाम रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र की समस्या फंड की कमी नहीं है बल्कि यह है कि बैंकों की तरफ से फंडिंग में ठहराव आ गया है।

एक सरकारी बैंक के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि नियमों में ढील से तुरंत नकदी प्रवाह की संभावना नहीं है। लेकिन निश्चित रूप से इससे यह सकारात्मक संदेश जाएगा कि आरबीआई एनबीएफसी की अहमियत को समझता है। यह आरबीआई के पहले के रुख के उलट है जब उसने नियमों को सख्त बनाने की बात कही थी। इससे बैंक वित्तीय कंपनियों को ज्यादा फंड देने को लेकर सतर्क हो गए थे और नियमों में संशोधन का इंतजार कर रहे थे। 

एक अन्य बैंकर ने कहा कि ऐसा लगता है कि आरबीआई बाजार में वित्तीय कंपनियों के लिए चीजों के सामान्य होने तक इंतजार करने को तैयार है। लेकिन इससे कोई बहुत फर्क नहीं आएगा। 11 सरकारी बैंक त्वरित उपचारात्मक कार्रवाई (पीसीए) व्यवस्था में शामिल हैं और वे कंपनियों को ऋण नहीं दे सकते हैं। साथ ही चार से पांच सरकारी बैंक पीसीए में शामिल होने की कगार पर है। इसलिए वे उधार देने में सतर्कता बरतेंगे। साथ ही बैंकों को एनबीएफसी और एचएफसी को बाहर से मिलने वाली रेटिंग पर भी गंभीर आपत्ति है। 

ऐक्सिस कैपिटल ने अपने हालिया नोट में कहा है कि बैंक एनबीएफसी को मंजूर ऋण भी नहीं देना चाहते हैं। आवास क्षेत्र में सुस्ती ने पहले ही एनबीएफसी की चिंता बढ़ा रखी है। गैर बैंकों के रियल्टी क्षेत्र को उधारी कम करने की आशंका है जिससे रियल एस्टेट क्षेत्र में संकट बढ़ेगा। 
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