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चौथी बार अपनी बारी

साप्ताहिक मंथन
टी. एन. नाइनन /  October 19, 2018

इस हफ्ते चौथी औद्योगिक क्रांति केंद्र के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि चौथी क्रांति में भारत का योगदान समूचे विश्व को 'स्तब्ध' कर देगा। यह भी कि भारत 'स्थानीय समाधान' से 'वैश्विक अनुप्रयोग' की तरफ बढ़ रहा है। हालांकि हम इसे मोदी का शब्दाडंबर कह सकते हैं लेकिन उनकी बात में दम है। 

चौथी औद्योगिक क्रांति व्यापक शब्दावली है जिसमें इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर 3डी प्रिंटिंग एवं ब्लॉकचेन और विशिष्ट सामग्री और नैनो तकनीक से लेकर स्वायत्त वाहन और 5जी संचार तकनीक तक शामिल हैं। यह क्रांति डिजिटल तकनीक और भौतिक दुनिया को एक साथ लाकर उत्पादों एवं सेवाओं का नया दायरा बनाने की कोशिश है। लेकिन भारत इनमें से अधिकांश क्षेत्रों में अग्रणी नहीं है। वैसे भारत और यहां के लोग उदीयमान डिजिटल-भौतिक विश्व में अपना योगदान शुरु कर चुके हैं। 

थॉलान्स सर्विसेज ग्लोबलाइजेशन सूचकांक के मुताबिक भारत शीर्ष 10 डिजिटल देशों की सूची में सबसे ऊपर है। मोबाइल डेटा के उपयोग में भारत की भूमिका वैश्विक नेतृत्व की हो चुकी है, आधार प्रत्येक नागरिक को विशिष्ट पहचान मुहैया कराने में सफल रहा है और वीजा एवं मास्टरकार्ड जैसी वैश्विक कार्ड कंपनियों की तुलना में रुपे कार्ड का प्रयोग एवं स्वीकार्यता बढ़ी है। ये प्लेटफॉर्म कम लागत और व्यापक फलक का समावेश हैं जो भारतीय बाजारों को परिभाषित करते हैं। 

सरकार और कारोबारी संस्थान अपने नागरिकों एवं उपभोक्ताओं को क्लॉउड-आधारित उत्पाद एवं सेवाएं मुहैया कराने के लिए इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। जीएसटी प्रणाली में पंजीकृत एक करोड़ कारोबारी प्रतिष्ठानों के बहुत बड़े हिस्से के पास संस्थागत ऋण तक पहुंच नहीं है।

नई तकनीक एवं जीएसटी नेटवर्क जैसे डेटा प्लेटफॉर्म पर एक करोड़ प्रतिष्ठानों का पंजीकरण और कंपनी पहचान संख्या प्रणाली लागू होने और पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री के लिए रिजर्व बैंक के समर्थन जैसे कदम वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता सुधारने में काफी मददगार हो सकते हैं। इसका मतलब है कि कोई क्रेडिट इतिहास या बड़ी परिसंपत्ति न होने पर भी छोटे प्रतिष्ठान अपने नकदी प्रवाह के आधार पर कर्ज ले सकते हैं। यह लाखों छोटे कारोबारी संस्थानों का कायांतरण कर सकता है।

अगर क्लॉउड-आधारित प्लेटफॉर्म सार्वजनिक फलक में रखे जा सकते हैं तो उन पर आधारित नए कारोबार भी बनाए जा सकते हैं। उबर ने जीपीएस प्रणाली के उपयोग से इसे साबित किया है। बेंगलूरु की फर्म आईस्पर्ट चिकित्सा सेवाओं के लिए ऐसा ही एक प्लेटफॉर्म बना रही है।

आईस्पर्ट के शरद शर्मा बताते हैं कि कम लागत एवं व्यापक स्तर पर सेवा मुहैया कराने वाले ऐसे प्लेटफॉर्म पर आधारित कारोबार नई क्रांति में भारत को अग्रणी बना सकते हैं। डिजिटल बैंकिंग पहले से ही हकीकत बन चुकी है जबकि चेन्नई की एक फर्म का क्लॉउड-आधारित बिज़नेस सॉफ्टवेयर जोहो छोटे कारोबारियों को किफायती समाधान मुहैया करा रहा है जो ओरेकल की अग्रिम लागत के चलते वंचित थे।

रणनीतिक (आलोचक इसे राष्ट्रवादी कहेंगे) आकलन पहले से चल रहे कुछ कार्यों को स्थापित करता है। एक धारणा यह है कि प्रमुख डेटा प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण का अभाव संघर्ष की स्थिति में देश के लिए संवेदनशील हो सकता है। अमेरिकी आपत्ति के बावजूद डेटा को स्थानीय स्तर पर रखने के लिए कहने की यही वजह हो सकती है।

अमेरिकी नौवहन प्रणाली जीपीएस के विकल्प के तौर पर उपग्रह-निर्देशित प्रणाली 'नाविक' का विकास ऐसी ही सोच का नतीजा है। जहां संभव हो, वहां चीन की नकल करने का लोभ भी है। चीन ने गूगल को किनारे रखते हुए अपने सर्च इंजन बैदू का विकास किया और अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड कंपनियों को परे रखते हुए अपने यूनियनपे को बढ़ावा दिया। चीन ने इलेक्ट्रिक बसों के मामले में जिस तरह कामयाबी हासिल की, क्या घरेलू बाजार तक पहुंच का लाभ अन्य क्षेत्रों में भी भुनाया जा सकता है? हमें इंतजार करना होगा।

एक विचार यह है कि घरेलू चुनौतियों से निपटने के लिए विकसित प्लेटफॉर्म अफ्रीका के उन देशों के लिए मुफीद हो सकते हैं जिनके लिए पश्चिमी विकल्पों का इस्तेमाल काफी महंगा है। विश्व बैंक ने मोरक्को को संशोधित आधार प्रणाली की तर्ज पर विशिष्ट पहचान प्रणाली शुरू करने के लिए पिछले साल कर्ज दिया था। इस बिंदु पर मोदी की स्थानीय समाधानों के वैश्विक अनुप्रयोग की बात समीचीन लगती है।

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