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शेयर पुनर्खरीद से पीएसयू की वित्तीय सेहत पर असर

कृष्ण कांत / मुंबई October 18, 2018

बड़ी सार्वजनिक कंपनियों (पीएसयू) की तरफ से शेयर पुनर्खरीद के जरिए विनिवेश लक्ष्य पूरा करने की सरकार की योजना से इनकी बैलेंस शीट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है, जो पहले से ही विकृत है। सूचीबद्ध पीएसयू (बैंकों व तेल और गैस कंपनियों को छोड़कर) ने वित्त वर्ष 2018 में शुद्ध कर्ज-इक्विटी अनुपात 0.7 गुना दर्ज किया, जो वित्त वर्ष 2018 का सर्वोच्च स्तर है और एक साल पहले के 0.54 गुने के मुकाबले ज्यादा है। पिछली बार शुद्ध आधार पर पीएसयू मार्च 2012 में समाप्त वित्त वर्ष में कर्ज मुक्त थीं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने मौजूदा वित्त वर्ष में संभावित शेयर पुनर्खरीद के लिए 11 पीएसयू के नाम छांटे हैं। इनमें कोल इंडिया, एनटीपीसी, नैशनल एल्युमीनियम कंपनी (नालको) और एनएमडीसी शामिल हैं। सूची की अन्य पीएसयू हैं एनएलसी इंडिया, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स, एनएचपीसी, एनबीसीसी (इंडिया), एसजेवीएन, केआईओसीएल और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स। इसके अलावा सरकार की योजना सार्वजनिक क्षेत्र की तेल व गैस कंपनियों की तरफ से शेयर पुनर्खरीद के जरिए 200 अरब रुपये जुटाने की है। इन कंपनियों के बाजार पूंजीकरण को झटका लगा है। पिछले 12 महीने में इनका संयुक्त बाजार पूंजीकरण 14.2 फीसदी घटा है, इस तरह से बाजार के मुकाबले इनका प्रदर्शन कमजोर रहा है क्योंकि एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स ने इस अवधि में 8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की।
 
पिछले कुछ सालों में कंपनियों के कर्ज में तेज बढ़ोतरी हुई है क्योंकि जिंसों के चक्र और पूंजीगत खर्च का चक्र प्रतिकूल रहने के चलते लाभ घटने के बावजूद लाभांश देने में पीएसयू उदार रही हैं। जिंसों के चक्र व पूंजीगत चक्र के अनुकूल रहने से आय आदि में बढ़ोतरी होती है। इस नमूने में शामिल पीएसयू ने मौजूदा साल के शुद्ध लाभ (लाभांश वितरण कर को छोड़कर) का करीब 72 फीसदी पिछले तीन साल में इक्विटी लाभांश के तौर पर वितरित किया है, जिससे कई कंपनियां लाभांश भुगतान के लिए अपने नकद भंडार (संचयी आय) का इस्तेमाल करने को बाध्य हुई। वित्त वर्ष 2018 के आखिर में इन कंपनियों की संयुक्त नकदी व नकदी समकक्ष घटकर 933 अरब रुपये रह गई, जो मार्च 2015 के आखिर में 1.65 लाख करोड़ रुपये और मार्च 2011 के आखिर में 1.98 लाख करोड़ रुपये के उच्चस्तर पर थी।
 
विश्लेषकों ने कहा कि पुनर्खरीद से इन कंपनियों के शेयर कीमतों को अल्पावधि में कुछ सहारा मिल सकता है, लेकिन इनमें से कई कंपनियों को उधारी के लिए बाध्य कर सकता है, जिससे उनकी वित्तीय सेहत प्रभावित हो सकती है। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक व प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, कोल इंडिया को छोड़ दें तो खुद के दम पर पुनर्खरीद के लिए किसी भी बड़ी पीएसयू के पास अतिरिक्त नकदी नहीं बची है। कई कंपनियों को ऐसी पुनर्खरीद के लिए उधार लेना पड़ सकता है, जिससे उनकी आय और बैलेंस शीट पर ऐसे समय पर असर दिखेगा जब ब्याज दरें बढ़ रही हैं।
 
नमूने में शामिल 32 सूचीबद्ध पीएसयू का कुल कर्ज मार्च 2018 के आखिर में करीब 3.8 लाख करोड़ रुपये था, जो मार्च 2015 के आखिर में 3.3 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस अवधि में उनके नकद भंडार में लगातार आई कमी के चलते पीएसयू का शुद्ध कर्ज बढ़ा। पिछले तीन सालों में उनका कुल शुद्ध कर्ज मार्च 2015 के 1.38 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले इस साल मार्च में 2.85 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। पुनर्खरीद से ऊर्जा क्षेत्र की पीएसयू पर वित्तीय दबाव पड़ सकता है, जिनका लिवरेज अनुपात अन्य गैर-वित्तीय क्षेत्र की पीएसयू के मुकाबले कम है।
 
विश्लेषकों ने कहा कि इससे कंपनियों की बैलेंस शीट पर ऐसे समय में असर दिखेगा जब ईंधन सब्सिडी का एक हिस्सा साझा करने के सरकाकरी आदेश से उनकी आय दबाव में आ सकती है। ऊर्जा पीएसयू का शुद्ध कर्ज-इक्विटी अनुपात वित्त वर्ष 2018 में औसतन 0.41 गुना रहा, जो एक साल पहले 0.32 गुना रहा था। इन कंपनियों का संयुक्त कर्ज वित्त वर्ष 2018 के आखिर में 2.26 लाख करोड़ रुपये था जबकि एक साल पहले यह 2.22 लाख करोड़ रुपये रहा था। उनका शुद्ध कर्ज हालांकि पिछले वित्त वर्ष में 15 फीसदी बढ़ा क्योंकि साल दर साल के हिसाब से उनके नकदी भंडार में पिछले वित्त वर्ष में 34 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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