बिजनेस स्टैंडर्ड - आधार से भुगतान जारी रखेंगे बैंक
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आधार से भुगतान जारी रखेंगे बैंक

किरण राठी / नई दिल्ली October 18, 2018

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने साफ किया है कि बैंक जमा, निकासी, बैलेंस की जानकारी आदि सहित लेनदेन में आधार सक्षम भुगतान व्यवस्था जारी रख सकते हैं, क्योंकि यह प्रत्यक्ष नकदी हस्तांतरण योजना का हिस्सा है। आधार सक्षम भुगतान व्यवस्था या एईपीएस में यह अनुमति मिलती है कि जिन ग्राहकों के पास स्मार्टफोन या डेबिट कार्ड नहीं है, वे माइक्रो एटीएम पर बायोमीट्रिक सत्यापन के माध्यम से बुनियादी बैंकिंग जैसे नकदी जमा, नकद निकासी या इंट्राबैंक या इंटरबैंक फंड ट्रांसफर, बैलेंस की जांच या मिनी स्टेटमेंट की सुविधा हासिल कर सकते हैं। 
 
उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद एईपीएस के भविष्य को लेकर भ्रम था। न्यायालय ने बैंक खातों को आधार से अनिवार्य रूप से जोडऩे का नियम रद्द कर दिया था। इस सुविधा की शुरुआत पिछले साल अप्रैल महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्तीय समावेशन तेज करने के मकसद से की थी।  आधार जारी करने वाले प्राधिकरण ने कहा, 'कानूनी राय लेने के बाद यूआईडीएआई ने बैंकों से कहा है कि वे एईपीएस सुविधा निर्बाध रूप से जारी रख सकते हैं क्योंकि निकासी का यह तरीका प्रत्यक्ष नकदी हस्तांतरण (डीबीटी) योजना से जुड़ा हुआ है, जहां आधार के इस्तेमाल की अनुमति है। उच्चतम न्यायालय के फैसले के मुताबिक आधार अधिनियम की धारा 7 के तहत डीबीटी योजनाओं में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।' 
 
प्राधिकरण का मानना है कि एईपीएल उन लाभार्थियों के लिए बहुत मददगार है, जो दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। पहल और उज्जवला योजना के तहत लाभ पाने वालोंं की संख्या करीब 14 करोड़ है, जो गैस सिलेंडर सब्सिडी अपने बैंक खाते में हर महीने पाते हैं।  यूआईडीएआई ने कहा है, 'देश में करीब 6 लाख गांव हैं, जिनमें से 1.4 लाख गांव ही ऐसे हैैं, जहां प्रत्यक्ष बैंकिंग सुविधा है। ऐसे आवासीय इलाके भी हैं, जहां से बैंक 30 से 40 किलोमीटर दूर हैं। ऐसे मामलों में लाभार्थी अपना धन मोबाइल आधार से जुड़े माइक्रो एटीएम से अपने आसपास ही धन निकाल सकेंगे। इस समय 14 करोड़ से ज्यादा एईपीएल लेनदेन होते हैं और हर महीने करीब 8 करोड़ लोग इसका फायदा उठाते हैं।' इसी तरह से प्राधिकरण ने कहा है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में काम करने वाले अपनी मजदूरी एईपीएस के माध्यम से अपने गांव में माइक्रो एटीएम से निकाल सकेंगे। इस मसले पर प्रतिक्रिया देते हुुए यूआईडीएआई के सीईओ अजय भूषण पांडेय ने कहा, 'एईपीएस व्यवस्था से यह सुनिश्चित होता है कि सरकार की ओर से दिया जा रहा लाभ और सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थियों के हाथ में पहुंचे और इसमें से बिचौलियों व गलत लोगों को हटाया जा सके।' 
 
बहरहाल प्राधिकरण ने यह भी साफ किया है कि उच्चतम न्यायालय ने यह निर्देश नहीं दिया है कि जो मोबाइल नंबर आधार ईकेवाईसी के माध्यम से जारी किए गए हैं, उन्हें काट दिया जाए। यह सफाई एक रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें यह कहा गया था कि करीब 50 करोड़ मोबाइल कनेक् शनों के कटने का जोखिम है। यूआईडीएआई और दूरसंचार विभाग ने एक संयुक्त बयान में कहा है, 'न्यायालय ने यह नहींं कहा है कि 6 महीने के बाद   दूरसंचार उपभोक्ताओं के सभी ईकेवाईसी आंकड़े मिटा दिए जाएं। शीर्ष न्यायालय ने यह कहा है कि यूआईडीएआई से सत्यापन का काम 6 महीने से ज्यादा समय तक जारी नहीं रखा जाए। यह प्रतिबंध यूआईडीएआई पर है न कि दूरसंचार कंपनियों पर। इस तरह से देखें तो दूरसंचार कंपनियों को सत्यापन के आंकड़े मिटाने की जरूरत नहीं है।' 
 
बहरहाल फैसले मुताबिक अगर कोई ग्राहक अपने आधार ईकेवाईसी की जगह नया केवाईसी देना चाहता है तो वह सेवा प्रदाता से अनुरोध कर सकता है कि वह सत्यापन के नए दस्तावेज पेश कर रहा है और उसका नंबर आधार न जोड़े रखा जाए। लेकिन किसी भी स्थिति में मोबाइल कनेक् शन नहीं काटा जाएगा। संयुक्त बयान में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय ने आधार केवाईसी के माध्यम से नए सिमकार्ड जारी करने पर रोक लगाई है। इसमें कहा गया है, 'इसमें पुराने मोबाइल फोन को डिएक्टिवेट करने का कोई निर्देश नहीं है।' 
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