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बढ़ाएं स्वास्थ्य बीमा कवर ताकि महंगाई की न रहे फिकर

प्रियदर्शनी माजी /  October 18, 2018

सेहत पर बढ़ते खर्च के बीच स्वास्थ्य बीमा क्यों और कितना जरूरी है, इस बारे में जागरूकता लगातार बढ़ रही है। लेकिन अब भी लोग इस बात को ठीक ढंग से नहीं जानते कि स्वास्थ्य सेवा की महंगाई यानी इलाज पर होने वाला खर्च उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी आम महंगाई के मुकाबले बहुत तेजी से बढ़ रही है। इसलिए अपने परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा खरीदना तो अच्छा है ही, आपको यह भी देखना चाहिए कि बीमा की राशि पर्याप्त है या नहीं। बढ़ती महंगाई के हिसाब से ही आपको बीमा की राशि भी समय-समय पर बढ़ानी चाहिए।

 
पॉलिसी बाजार डॉट कॉम के प्रोडक्ट ऐंड इनोवेशन सेंटर (पीआईसी) ने हाल ही में 20 राज्यों में एक सर्वेक्षण कराया था, जिसमें 10,000 से अधिक उपभोक्ताओं के खरीदारी के तौर-तरीके पर नजर डाली गई। इस सर्वेक्षण के अनुसार ऑनलाइन स्वास्थ्य बीमा खरीदने वाले लगभग 40 फीसदी भारतीय कम से कम 5 लाख रुपये का कवर लेते हैं। चिकित्सा में महंगाई जिस तरह बढ़ रही है, उसे देखते हुए हो सकता है कि कुछ साल पहले खरीदे गए चिकित्सा बीमा की राशि से आज आपके इलाज का आधा खर्च भी नहीं निकल पाए। पॉलिसीबाजार में पीआईसी के प्रमुख वैद्यनाथन रमानी कहते हैं, 'पिछले चार-पांच साल में भारत में चिकित्सा पर खर्च 10-15 फीसदी सालाना की दर से बढ़ा है।'
 
सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस में प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रसून सिकदर बताते हैं, 'आज गुर्दा प्रत्यारोपण पर करीब 18 लाख रुपये का खर्च आता है। अगर खर्च में हर साल 15 फीसदी की दर से बढ़ोतरी होती रही तो इसी प्रत्यारोपण पर आपको करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।' जाहिर है कि जब भी आप स्वास्थ्य बीमा लेने की सोचते हैं तो आपके लिए सबसे मुश्किल सवाल यही होगा कि कितनी राशि का बीमा लिया जाए। यह फैसला करने से पहले आपको कई पहलुओं पर विचार करना होगा। सबसे पहले तो देखिए कि आप किस तरह के शहर में रहते हैं। विशेषज्ञों की राय है कि महानगर में रहने वाले व्यक्ति को 5 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा तो कराना ही चाहिए। अगर महानगर में रहने वाले किसी परिवार में 2 या 3 सदस्य हैं तो कम से कम 10 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा कवर से शुरुआत करनी चाहिए। परिवार थोड़े छोटे शहर में रहता है तो 5 लाख रुपये के बीमा कवर से काम चल सकता है। यह शुरुआती राशि है, जिसे कुछ अन्य पहलुओं पर विचार करते हुए बढ़ाया जाना चाहिए। स्टार हेल्थ ऐंड अलाइड इंश्योरेंस के कार्यकारी निदेशक आनंद रॉय का कहना है, 'सही राशि तब तय होगी, जब पॉलिसीधारक के पिछले इलाज और बीमारियों का रिकॉर्ड, बीमा पर खर्च करने की उसकी क्षमता, परिवार के आकार, बुजुर्गों की संख्या, पहले से मौजूद बीमारियों और जीवनशैली का पता लग जाएगा।'
 
लेकिन अगर आपको कोई खास जरूरत है तो उसके आधार पर आप देख सकते हैं कि किस तरह का व्यक्तिगत सम इंश्योर्ड अथवा फ्लोटर बीमा कवर आपके लिए सबसे ज्यादा मुफीद है। विशेषज्ञ बताते हैं कि फैमिली फ्लोटर बीमा योजना आम तौर पर सबसे किफायती विकल्प होता है और इसमें एक ही पॉलिसी के भीतर पूरे परिवार के लिए फ्लोटिंग इंश्योर्ड राशि का फायदा मिल जाता है। लेकिन यदि परिवार के किसी सदस्य की सेहत को ज्यादा जोखिम है तो उसके लिए अलग से बीमा योजना खरीदी जा सकती है। यदि परिवार में कोई बीमारी कई पीढिय़ों से चली आ रही है और मौजूदा पीढ़ी को भी वह बीमारी होने का खतरा है अथवा आपको मधुमेह या उच्च रक्तचाप की शिकायत है तो आपको देखना होगा कि इन समस्याओं के इलाज में कितना खर्च आ सकता है। इसका हिसाब लगाने के बाद उसी के मुताबिक बीमा राशि बढ़ाई जा सकती है।
 
अगर आप पॉलिसी में सदस्यों की संख्या बढ़ा रहे हैं तो आपको बीमा कवर की राशि भी बढ़ानी चाहिए। रमानी की सलाह है, 'बीमा पॉलिसी में पुत्रवधू जैसा कोई भी वयस्क सदस्य जोडऩे पर बीमा कवर में कम से कम 50-60 फीसदी इजाफा कर ही लेना चाहिए। जब भी पॉलिसी में कोई बच्चा जोड़ा जाता है तो बीमा कवर में 25-30 फीसदी इजाफा करना ठीक रहेगा।' बीमा कवर की राशि तय करते समय यह भी देखा जाना चाहिए कि पॉलिसीधारक कौन से शहर में रहता है। महानगरों में अस्पताल में भर्ती होने का खर्च आम तौर पर ज्यादा ही होता है क्योंकि वहां बेहतर सुविधाओं वाले अस्पताल होते हैं। छोटे शहरों के मुकाबले वहां ऑपरेशन या इलाज पर 50-60 फीसदी अधिक खर्च आता है। इसलिए अगर आप महानगर में रहते हैं तो स्वास्थ्य बीमा में आपको कवर की राशि अधिक ही रखनी चाहिए। रॉय भी कहते हैं, 'बीमा पॉलिसी लेने के बाद उसे भूल नहीं जाना चाहिए बल्कि हरेक 5 या 10 साल के बाद उसकी कवर राशि का जायजा लेना चाहिए और यह भी देखना चाहिए कि भविष्य में स्वास्थ्य पर कितने खर्च की जरूरत होगी। भविष्य की जरूरतों के लिए इंतजाम पहले ही कर लेना चाहिए क्योंकि उम्र बढऩे तथा बीमारी होने के साथ ही बीमा कवर में इजाफा कराना बहुत मुश्किल हो जाता है।'
Keyword: health, insurance, cancer, PIC,,
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