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घर में किसी को था कैंसर तो खरीदें स्टैंडअलोन कवर

प्रियदर्शिनी माजी /  October 18, 2018

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अपने राष्टï्रीय कैंसर पंजी कार्यक्रम के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसके मुताबिक कैंसर के नए मामलों का आंकड़ा 2015 के 13 लाख से बढ़कर 2018 में 18 लाख तक पहुंचने की आशंका है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कैंसर के लगभग 60 से 70 फीसदी मामले 35 से 64 फीसदी के आयु वर्ग में होते हैं। इस खौफनाक बीमारी का इलाज बहुत महंगा होता है और उसमें 15 लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये के बीच कुछ भी खर्च हो सकता है। कुछ मामलों में तो खर्च और भी अधिक होता है। इसीलिए इस बीमारी के लिए बीमा कवर लेना जरूरी हो जाता है। चूंकि सामान्य स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में जो राशि मिलती है, वह कैंसर के इलाज के लिए नाकाफी साबित हो सकती है, इसलिए कई बीमा कंपनियों ने अलग से स्टैंडअलोन पॉलिसी बेचना शुरू कर दिया है, जिसमें विभिन्न प्रकार के कैंसर कवर हो जाते हैं।

 
क्या हैं ये पॉलिसी
 
स्टैंडअलोन कैंसर बीमा पॉलिसियां स्थिर लाभ योजनाओं की तरह होती हैं, जिनमें विभिन्न चरणों पर एकमुश्त रकम मिलती है। इन पॉलिसियों में बीमा राशि 2 लाख रुपये से शुरू होती है और 50 लाख रुपये तक जाती है। पॉलिसी की अवधि 5 साल से लेकर 70 साल तक हो सकती है। चूंकि यह विशुद्घ रूप से सुरक्षा प्रदान करने वाली बीमा योजना है, इसलिए यदि पॉलिसीधारक पूरी अवधि तक ठीक रहता है तो उसके हाथ कुछ भी नहीं आता। कैंसर के लिए खास तौर पर बनाई गई पॉलिसियां निदान के विभिन्न चरणों में बीमा सुविधा प्रदान करती हैं, चाहे वह मामूली हो, अधिक हो अथवा बहुत नाजुक हो। उनमें कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, अस्पताल में भर्ती होने और सर्जरी समेत विभिन्न प्रकार के इलाज शामिल होते हैं और उनका खर्च भरा जाता है।
 
कैसे मिलती है रकम
 
कैंसर के जो तीन चरण इस प्रकार की बीमा पॉलिसी में कवर किए जाते हैं, उनमें सबसे पहले कार्सिनोमा इन सिटू (सीआईएस) यानी गांठ अथवा ट्यूमर का तैयार होना आता है। उसके बाद कम गंभीर यानी माइनर चरण आता है और अंत में गंभीर यानी मेजर अथवा क्रिटिकल चरण आता है। बीमा की राशि का भुगतान इस बात पर निर्भर करता है कि पॉलिसीधारक का कैंसर किस चरण में बताया गया है। यदि पॉलिसीधारक की बीमारी को आरंभिक अथवा माइनर चरण में बताया जाता है तो बीमा की राशि का 20-25 फीसदी हिस्सा दे दिया जाता है। लेकिन यह आंकड़ा हरेक बीमा कंपनी के मामले में अलग-अलग होता है। यदि आरंभिक चरण में बीमा कंपनी ने पॉलिसीधार को आंशिक भुगतान कर दिया है तो गंभीर यानी मेजर चरण में होने वाले भुगतान में से उसे काट लिया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आरंभिक चरण में 25 फीसदी भुगतान कर दिया गया था तो बीमारी के गंभीर चरण में पहुंचने पर बीमा की केवल 75 फीसदी रकम ही दी जाएगी।
 
किसे नहीं मिलेगा बीमा
 
यदि पहले से ही कैंसर हो तो इस तरह की पॉलिसी नहीं मिल सकती क्योंकि पहले से मौजूद कैंसर को वे कवर ही नहीं करतीं। कुछ खास प्रकार के कैंसर जैसे त्वचा कैंसर और यौन संचारी रोगों (एसटीडी) के जरिये होने वाले कैंसर के लिए भी इन पॉलिसियों में कवरेज नहीं मिलती। पॉलिसीबाजार के असोसिएट निदेशक एवं क्लस्टर प्रमुख - जीवन बीमा संतोष अग्रवाल की सलाह है, 'यह जानना बहुत जरूरी है कि क्या-क्या पॉलिसी में कवर नहीं होता। इसीलिए जो भी ये पॉलिसी खरीद रहे हैं, उन्हें एक-एक शब्द ध्यान से पढ़ लेना चाहिए।'
 
क्यों हैं सबसे बेहतर
 
गंभीर बीमारी के लिए जो क्रिटिकल इलनेस कवर लिया जाता है, उसमें भी कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों के लिए एकमुश्त बीमा मिलता है। लेकिन इस तरह के बीमा में कैंसर के इलाज के दौरान होने वाले सभी खर्चों को कवर नहीं किया जाता। पॉलिसी दस्तावेज में जिन गंभीर बीमारियों का जिक्र किया गया है, उनमें से कोई भी हो जाती है तो उतनी ही रकम दी जाती है, जो पॉलिसी लेते समय तय की गई होती है। यदि आपके पास मेडिक्लेम पॉलिसी है तो वह इलाज का खर्च तो उठाएगी, लेकिन एक सीमा के बाद भी वह भी हाथ खड़े कर देगी। हां, अगर आप शुरुआत में बताई गई स्टैंडअलोन कैंसर बीमा पॉलिसी खरीदते हैं तो बीमारी का पता लगने पर आपको पहले से तय रकम दी जाएगी और बाद के चरणों में भी आपको रकम मिलेगी। उस रकम का इस्तेमाल आप इलाज के लिए कर सकते हैं और उस वक्त होने वाले दूसरे खर्च भी पूरे कर सकते हैं।
 
अगर आपके पास स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी है तो अस्पताल में भर्ती होने पर जो भी खर्च होगा, उसकी भरपाई पॉलिसी के जरिये हो जाएगी। लेकिन उस दौरान कई ऐसे खर्च भी होते हैं, जो पॉलिसी में कवर नहीं होते। मगर कैंसर के लिए ये स्टैंडअलोन बीमा पॉलिसी बुनियादी स्वास्थ्य बीमा योजना के अलावा होती हैं और उनकी भरपाई करती हैं। पीएनबी मेटलाइफ इंश्योरेंस के उत्पाद प्रमुख खालिद अहमद कहते हैं, 'अगर परिवार में कैंसर के इतिहास को देखते हुए किसी व्यक्ति को कैंसर होने का औसत खतरा है तो उसे स्टैंडअलोन कैंसर बीमा पॉलिसी खरीद लेनी चाहिए। लेकिन यह बात ध्यान रहे कि कैंसर बीमा पॉलिसी किसी भी सूरत में बुनियादी यानी सामान्य स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी की जगह नहीं ले सकती।'
 
ध्यान रहें ये बात
 
इस तरह की बीमा पॉलिसी की खास बात यह होती है कि जैसे ही कैंसर होने का पता चलता है, आगे के प्रीमियम माफ कर दिए जाते हैं। इस पॉलिसी के जो भी प्रीमियम अदा किए जाते हैं, उनके एवज में आयकर अधिनियम की धारा 80 डी के तहत कर लाभ का दावा भी किया जा सकता है। ऐसी पॉलिसी के लिए प्रीमियम तय करते समय कई कारकों पर नजर डाली जाती है। सबसे पहले यह देखा जाता है कि कितनी राशि एश्योर्ड कराई गई है। उसके बाद देखा जाता है कि बीमाधारक पुरुष है अथवा महिला। उसकी उम्र देखी जाती है, पॉलिसी की अवधि देखी जाती है, मौजूदा स्वास्थ्य समस्याओं का जायजा लिया जाता है और यह भी देखा जाता है कि उसके परिवार में कैंसर की बीमारी का इतिहास कैसा रहा है। इन सबके आधार पर ही प्रीमियम तय किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति को पहले कैंसर हो चुका है तो उसका बीमा नहीं किया जाता क्योंकि कैंसर दोबारा उभरने का खतरा आम होता है।
Keyword: health, insurance, cancer, ICMR,,
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