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आईजीएसटी रिफंड मामले में निर्यातक फिर पहुंचे न्यायालय की शरण में

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली October 17, 2018

सरकार ने इस साल की शुरुआत में जीएसटी कानून में बदलाव करते हुए उन निर्यातकों को आईजीएसटी रिफंड देने से इनकार कर दिया था, जिन्होंने एडवांस अथरॉइजेशन लाइसेंस के तहत सीमा शुल्क लाभ का दावा किया हो। निर्यातकों ने इस नियम के खिलाफ गुजरात और दिल्ली उच्च न्यायालय से संपर्क साधा है। एडवांस अथरॉइजेशन लाइसेंस उन सामानों के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने के लिए जारी किया जाता है, जिनका इस्तेमाल निर्यात के उत्पाद तैयार करने में होता है।  जनवरी महीने में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) अधिनियम में संशोधन कर उसके नियम 96 में उपधारा 10 डाली गई थी, जिसके मुताबिक निर्यातकों द्वारा निर्यात पर किए गए एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) के भुगतान का रिफंड लेने पर रोक लगा दी गई है। यह नियम अक्टूबर 2017 से पूर्ववर्ती प्रभाव से लागू होगा। 
 
निर्यातकों द्वारा पहले भी याचिकाएं दायर की गई थीं, जिसके बाद सरकार ने इस महीने की शुरुआत में फिर से नियम में बदलाव कर दिया और इसमें से पूर्ववर्ती प्रभाव का प्रावधान हटा दिया, लेकिन आगे के मामलों में नियम बरकरार रखा गया है। इसे लेकर निर्यातकों ने एक बार फिर न्यायालय की राह पकड़ ली है।  निर्यातक इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड का दावा दो में से एक तरीके से करते हैं। वे रिफंड व्यवस्था के तहत निर्यात करने के बाद इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकते हैं। दूसरे, वे आईजीएसटी का भुगतान करने के बाद रिफंड का विकल्प चुन सकते हैं। दूसरे विकल्प को तकनीकी रूप से रिबेट विकल्प कहा जाता है। अगर निर्यातकों ने एडवांस अथरॉइजेशन के लाभ का दावा किया है तो निर्यातकों यह सुविधा दिए जाने से इनकार किया गया है। 
 
खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर और याचियों के वकील अभिषेक रस्तोगी ने कहा, 'यह नियम निर्यातकों के रिबेट विकल्प को सीमित करता है और मनमाने आधार पर पर्याप्त कठिनाई पैदा करता है।'  उन्होंने कहा कि अक्टूबर की अधिसूचना में जहां पूर्ववर्ती प्रभाव से लागू किए जाने की व्यवस्था खत्म करके इसे थोड़ा सरल करने की कवायद की गई है, लेकिन यह उस अवधि के लिए भी प्रभावी हो सकता है, जब यह पूर्ववर्ती प्रभाव से लागू किया गया। इस तरह से निर्यातकों ने इस महीने जारी अधिसूचना को भी चुनौती दी है। 
 
एडवांस अथरॉइजेशन के तहत लाभ दो तरीके से लिया जा सकता है। एक तो उन सामान पर जिनका इस्तेमाल निर्यात में होना है, यह कर मुक्त आयात है। अगर कोई व्यक्ति एडवांस अथरॉइजेशन लाइसेंस धारक के पास वस्तुओंं की आपूर्ति करता है जो संभावित निर्यातक है और उसे कर लाभ मिला हुआ है।  फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के महानिदेशक और सीईओ अजय सहाय का कहना है कि यह आईटीसी रिफंड प्रक्रिया में गड़बड़ी है।  
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