बिजनेस स्टैंडर्ड - गन्ने की फसल में कीड़े का प्रकोप
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गन्ने की फसल में कीड़े का प्रकोप

रॉयटर्स / मुंबई October 17, 2018

महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की फसल में सफेद कीटों के प्रकोप से भारत को चीनी के भारी स्टॉक की समस्या का समाधान मिल सकता है, मगर इससे गन्ना किसानों की परेशानी बढ़ेगी। गन्ने के भरपूर उत्पादन से देश में चीनी का भंडार पिछले साल की तुलना में करीब दोगुना हो गया है। चालू सीजन में भी गन्ने के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान है, इसलिए सरकार चीनी निर्यात पर सब्सिडी दे रही है। इससे वैश्विक बाजार में अति आपूर्ति की स्थिति पैदा होने की आशंका है, जहां पहले ही कीमतें 27 सितंबर को 10 साल के न्यूनतम स्तर पर थीं। 
 
लेकिन देश के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र और तीसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य कर्नाटक में गन्ने की फसल में सफेद कीड़े के प्रकोप से फसल वर्ष 2018-19 में चीनी का उत्पादन पहले के अनुमानों से 9 फीसदी कम रह सकता है।  गन्ने के कम उत्पादन से देश में चीनी के भंडार में कुछ कमी आ सकती है, जो इस समय करीब 100 लाख टन है। यह कीड़ा गन्ने की जड़ों को खाता है। इसे फसल को उखाड़कर ही खत्म किया जा सकता है। इससे खेत खाली हो जाएंगे और उनमें फिर से गन्ने की रोपाई करनी होगी, जिससे किसानों पर दबाव बढ़ेगा। 
 
एक गन्ने को उखाड़कर दिखाते हुए किसान सोपान सालुंखे ने कहा, 'सिंचाई के बावजूद अगस्त से गन्ने का तना सूखने लगा है। जब हमने इसकी वजह पता लगाने की कोशिश की तो पाया कि सफेद कीड़ा जड़ें खा रहा है।' सालुंखे 1 अक्टूबर से प्रारंभ विपणन सीजन 2018-19 में केवल 20 टन गन्ना उत्पादित कर पाएंगे, जबकि पिछले साल उनका उत्पादन 140 टन रहा था। मुंबई के दक्षिण-पूर्व में करीब 400 किलोमीटर दूर वाडवाल गांव में उनके 2.5 एकड़ के खेत में गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। महाराष्ट्र के करीब चार दर्जन किसानों ने रॉयटर्स को बताया कि कीड़े की वजह से उन्हें इस साल कम उत्पादन के आसार नजर आ रहे हैं। कीड़े का प्रकोप इसलिए फैला है क्योंकि इस बार अगस्त और सितंबर में कम बारिश हुई है। आम तौर पर मॉनसून की भारी बारिश से खेतों में पानी भर जाता है और कीड़े मर जाते हैं। 
 
राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक इस बार मॉनसून सीजन में सामान्य से 23 फीसदी कम बारिश हुई है। देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम बारिश हुई है, लेकिन वहां कीड़े का प्रकोप नहीं है।  नैशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) ने फसल वर्ष 2018-19 के लिए अपना उत्पादन अनुमान घटाकर 324 लाख टन कर दिया है। महाराष्ट्र के अनुमान को भी घटाकर 97 लाख टन कर दिया गया है। पहले राष्ट्रीय अनुमान 355 लाख टन और महाराष्ट्र का 115 लाख टन था। एनएफसीएसएफ के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे ने कहा, 'हम कीड़े के प्रकोप की वजह से उत्पादन के आंकड़े घटा रहे हैं।'
 
वेस्टर्न इंडिया शुगर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी बी थोंबरे ने कहा कि पहले भी कीड़े के प्रकोप की छिटपुट खबरें आती रही हैं, लेकिन इस बार प्रकोप इतना अधिक है कि इससे चीनी उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। थोंबरे ने कहा, 'किसान यह मानते थे कि गन्ना एक मजबूत फसल है और यह कीड़े और बीमारियों का प्रकोप झेल सकती है। लेकिन अब यह धारणा टूट गई है।' पूरे महाराष्ट्र में किसान कीड़े के प्रकोप को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।  पुणे जिले के दालज गांव के एक किसान अशोक गिरामकर ने कहा, 'हमने केरोसिन, नमक और विभिन्न कीटनाशक छिड़ककर कीड़ों को मारने की कोशिश की, लेकिन ये नहीं मरे क्योंकि ये जमीन से करीब एक फुट नीचे रहते हैं।'
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