बिजनेस स्टैंडर्ड - डिजिटल लहर पर सवार भारतीय बैंक
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डिजिटल लहर पर सवार भारतीय बैंक

देवाशिष महापात्र /  10 14, 2018

चैट सलाहकार 'सिया' उपभोक्ताओं की पूछताछ पर तत्काल जवाब देती है

बिजनेस स्टैंडर्ड डिजिटल लहर पर सवार भारतीय बैंकअरुंधती भट्टाचार्य वर्ष 1977 में देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में प्रोबेशनरी अधिकारी के तौर पर शामिल हुई थीं। वह याद करती हैं कि उन दिनों बैंकों के सभी काम हाथ से ही होते थे। पासबुक में लेनदेन दर्ज करना हो या खातों का मिलान करना, सबके लिए मानव मदद की जरूरत थी।

उस समय बड़े और मोटे रजिस्टर भरे रहते थे। इन रजिस्टरों के लेकर जाना या इनमें किसी पुराने रिकॉर्ड को ढूंढऩा दुष्कर काम था। इसके बाद बाइंडरों का दौर आया, जिसमें बैंक कर्मचारी लेनदेन का पेज लगा देते थे। बाइंडरों के बाद बैंकों की शाखाओं में एक सिस्टम पर काम होने लगा और फिर पूरा बैंकिंग नेटवर्क एक साथ जुड़ गया।  

इस समय बैंकों के पास कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अनुमान विश्लेषण के आधार पर किसी बड़ी परियोजना के लिए कर्ज की फाइल को मंजूरी देने या अस्वीकृत करने की तकनीकी क्षमता मौजूद है। बैंक की नई 'इनटच' शाखाओं में 10 मिनट के अंदर ग्राहक खाता खोलकर एक्टिवेशन-की की सहायता से व्यक्तिगत डेबिट कार्ड जारी कर दिए जाते हैं।

भट्टाचार्य बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहती हैं, 'यह एक लंबी यात्रा रही। हमने तकनीक के क्षेत्र में एक लंबी दूरी तय की है। 'एसबीआई का यह सफर भारतीय बैंकिंग तंत्र का एक छोटा स्वरूप है। सभी बैंकों ने बड़ी संख्या में मानव-श्रम आधारित प्रक्रिया पर कामकाज शुरू किया और धीरे-धीरे वे डिजिटल बैंकों में तब्दील हो गए। आज, किसी भी ग्राहक को बैंक जाने की जरूरत नहीं है। 

चैटबॉट और एआई समर्थित एमेजॉन एलेक्सा की वॉइस तकनीक की सहायता से वित्तीय लेनदेन के साथ ही भारतीय बैंक बहुत से ऐसे कदम उठा रहे हैं जो इस परिदृश्य को पूरी तरह बदल देंगे। एसबीआई की एआई समर्थित चैट सलाहकार 'सिया' रोजाना के कामकाज में सहायता करने के साथ ही उपभोक्ताओं की पूछताछ पर तत्काल जवाब देती है।

इसी तरह निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी ने एआई समर्थित चैटबॉट 'ईवा' को विकसित किया है जो विभिन्न स्रोतों से जानकारियां जुटाकर 0.4 सेकंड से कम समय में उपभोक्ताओं को जवाब दे देती है। एचडीएफसी बैंक में डिजिटल बैंकिंग प्रमुख (भारत) नितिन चुघ कहते हैं, 'इसे पिछले साल शुरू किया गया और अभी तक इसने 80 लाख से अधिक सवालों का जवाब दिया है।' 

आईसीआईसीआई बैंक के पास भी 'आईपल' नामक चैटबॉट है। इस साल अप्रैल माह में कोटक महिंद्रा बैंक ने अपनी मोबाइल बैंकिंग सहायता नंबर पर वॉइस तथा एआई समर्थित बॉट 'कीया' को लॉन्च किया। इन क्षमताओं से एक कदम आगे जाते हुए इंडसइंड बैंक ने हाल में एआई समर्थित 'इंडसअसिस्ट' जारी किया, जो एमेजॉन इको और दूसरे एलेक्सा आधारित उपकरणों पर ग्राहकों को आवाज के साथ रुपये के लेनदेन में मदद करता है।

कोई भी ग्राहक एलेक्सा आधारित उपकरण पर 'फंड ट्रांसफर' जैसा कोई भी आदेश दे सकता है। यह नैचुरल लेंग्वेज प्रोसेसिंग (एनएलपी) और एआई समर्थित बॉट की सहायता से एक सफल लेनदेन को निष्पादित करता है। 

भारतीय बैंक तकनीक पसंद और बेहतर अनुभव को वरीयता देने वाले नई पीढ़ी के ग्राहकों तक पहुंच बनाने के लिए काफी उत्सुकता से आगे बढ़ रहे हैं। इसके कारण कई बैंक विभिन्न सुविधाओं के साथ विशेष डिजिटल शाखाएं खोल रहे हैं। एसबीआई की 'इनटच' शाखाएं इसी तरह के ग्राहकों को ध्यान में रखकर खोली गई हैं।  

अपने कार्यकाल में इस योजना को शुरू करने वाली भट्टाचार्य कहती हैं, 'हम इसे इनटच इसलिए कहते हैं क्योंकि यहां अधिकांश सुविधाएं टच स्क्रीन पर उपलब्ध हैं। इस तरह की बहुत सी शाखाएं मॉल में खोली गई हैं जिससे युवा इन शाखाओं में आकर इसका अनुभव ले सकें।' 

केनरा बैंक का डिजिटल बैंकिंग ब्रांच इनीशिएटिव 'कैंडी' भी नई पीढ़ी के ग्राहकों को काफी रास आ रहा है। बैंक मित्रा और कैंडी रोबोट की सहायता से दैनिक बैंकिंग कामकाज के साथ वीडियो बैंकिंग सुविधा जैसी सेवाएं भी उपलब्ध करा रहा है। निर्बाध बैंकिंग सेवा उपलब्ध कराने के लिए कई बैंकों ने ऐप जारी किए हैं।

एसबीआई का मोबाइल बैंकिंग ऐप 'योनो' अपने प्लेटफॉर्म पर 85 ई-कॉमर्स वेबसाइटों के उत्पाद उपलब्ध कराता है। लॉन्च होने के 10 महीनों के भीतर गूगल प्ले स्टोर और ऐप स्टोप पर योनो (यू ओनली नीड वन) को 1 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।  

सुरक्षा के उद्देश्य से फर्जी लेनदेन और जोखिम प्रबंधन की पहचान के लिए भी एआई और डेटा विश्लेषण तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। ट्रांजेक्शन एनालिटिक्स की सहायता से बैंकों को संदेहास्पद लेनदेन की जांच में सहायता मिलती है।

इंडसइंड बैंक में सेविंग, डिजिटल तथा पेमेंट कारोबार प्रमुख और ईवीपी रितेश राज सक्सेना कहते हैं, 'अगर किसी खाते में रोजाना की गतिविधियों से अलग बड़े मूल्य का कोई लेनदेन हुआ है तो इन तकनीकों की सहायता से इसे जांचा जा सकता है और धन-शोधन या दूसरी किसी संभावना की जांच की जा सकती है। सबसे महत्त्वपूर्ण यह है कि ये सब तत्काल हो जाता है।' 

इसी तरह, किसी ग्राहक को कर्ज देने से पहले विभिन्न पैमानों पर क्रेडिट एनालिटिक्स काफी उपयोगी साबित हो रही है। उदाहरण के लिए, क्रेडिट एनालिटिक्स की सहायता से बैंक किसी ग्राहक के वेतन, खाते में जमा राशि, मेसेज अलर्ट आदि वित्तीय जानकारियों को देख सकते हैं। इससे बैंक ग्राहक की कर्ज लौटाने की क्षमता का पता लगा सकता है।  

भारतीय बैंकिंग प्रणाली चुनिंदा बैंक खातों में भविष्योन्मुखी विश्लेषण का उपयोग कर रही है। आईटी फर्म एम्फैसिस और रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के साथ मिलकर एसबीआई बड़ी परियोजनाओं के लिए कर्ज का आवेदन करने वालों से संबंधित संगठित और असंगठित आंकड़े इकट्ठा करता है और भविष्योन्नमुखी विश्लेषण की सहायता से उनकी क्रेडिट पात्रता का पता लगाता है।  

विज्ञापन के जनक कहे जाने वाले डेविड ओहिल्वी के कहा था, 'ग्राहक मूर्ख नहीं है। वह आपकी पत्नी की तरह है।' लगता है बदलते परिवेश में भारतीय बैंकों ने इस बात पर तेजी से अमल किया है। 

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