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अपने पोर्टफोलियो में शामिल करें सुरक्षात्मक शेयर

संजय कुमार सिंह और तिनेश भसीन /  October 14, 2018

शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह मुश्किल महीना रहा है। एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स अगस्त में अपने अब तक के सर्वोच्च स्तर 38,896 अंकों से 4,000 अंक या 11 फीसदी लुढ़क गया है और रुपया 74 प्रति डॉलर का स्तर पार कर गया है जिससे निवेशक 2008 जैसी स्थिति के बारे में सोचकर चिंतित होंगे।  के आर चोकसी के एमडी देवेन चोकसी ने कहा, 'पिछले पखवाड़े में मिड-कैप में भारी गिरावट के बाद अब लार्ज कैप शेयरों में गिरावट शुरू हो गई है। विदेशी संस्थागत निवेशक बिकवाली कर रहे हैं। वे उन शेयरों की बिकवाली करते हैं, जो बाजार में बिक सकता हो। वे रुपये में और गिरावट की आशंकाओं के कारण बाजार से निकल रहे हैं। उनका मानना है कि रुपया लुढ़कर 74 से 76 प्रति डॉलर तक आ सकता है। वे करेंसी में नुकसान से अपने पोर्टफलियो को बचाने के लिए पैसे को भारतीय बाजारों से निकालकर बाहर ले जा रहे हैं। दुर्भाग्य से करेंसी से शुरू हुई गिरावट अब यह शेयरों तक जा पहुंची है। ऐसी गिरावट का सबसे खराब पहलू यह है कि इसमें ब्लूचिप कंपनियों के फंडामेंटल भी कोई काम नहीं कर पाते हैं। ब्लूचिप कंपनियों में हाल में गिरावट शुरू हुई है। इस रुझान के कारण अच्छी कंपनियों पर भी तगड़ी चोट पड़ सकती है। 

 
तकलीफ जल्द खत्म नहीं
 
तेल की बढ़ती कीमतों से ऊंची महंगाई और राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी की चिंताएं पैदा हुई हैं। इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक जी चोक्कालिंगम ने कहा, 'अर्थव्यवस्था और बाजारों के लिए तेल की ऊंची कीमतें सबसे बड़ी चिंता हैं। विनिमय दर में भारी गिरावट भी एक प्रमुख चिंता के रूप में उभरी है।' चोक्कालिंगम का कहना है कि निवेशकों के हाथ में नकदी की कमी से भी वर्तमान गिरावट आ रही है। संपत्ति में कमी इसलिए शुरू हुई है क्योंकि कंपनियां प्रशासनिक मुद्दों और बैलेंस शीट की दिक्कतों से जूझ रही हैं। फिर इसकी आंच फंसे हुए कर्ज में दबे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और ओवर वैल्यूड निजी ऋणदाताओं तक पहुंच गई। अब यह मुख्य सूचकांकों तक पहुंच गई है।  शुक्रवार को बाजारों को उम्मीद थी कि भारतीय रिजïर्व बैंक 2018-19 की अपनी चौथी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में बेंचमार्क दर बढ़ाकर रुपये में गिरावट को थामेगा, लेकिन केंद्रीय बैंक ने ऐसा कदम नहीं उठाया। बहुत से लोगों का मानना है कि रुपया आगे और कमजोर हो सकता है। 
 
सुरक्षित दांव लगाएं 
 
रिलायंस सिक्योरिटीज के अनुसंधान प्रमुख नवीन कुलकर्णी ने कहा, 'लार्ज कैप शेयरों पर दांव लगाएं, जो इस समय तुलनात्मक रूप से सुरक्षित हैं। बहुत से क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियों के शेयर आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हैं, जिनमें निवेशक लंबे समय में अच्छा पैसा बना सकते हैं।' जो म्युचुअल फंड निवेशक ज्यादातर पैसा मिड और स्मॉल-कैप फंडों में लगा रहे हैं, उन्हें अब अपना पैसा लार्ज कैप फंडों में लगाना चाहिए। डेट फंडों और अंतरराष्ट्रीय फंडों में कुछ पैसा लगाने से पोर्टफोलियो की अस्थिरता घटेगी। 
 
सुरक्षात्मक दांव 
 
बाजार रुझान को प्रभावित कर रहे मुद्दों का जल्द समाधान नहीं हो सकता है। ऐसे में विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेेशकों को अच्छे लार्ज कैप शेयर तलाशने चाहिए, जो तेजी के दौर में नहीं चढ़े हैं। मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट में कहा गया है, 'हम लार्ज कैप शेयरों को तरजीह दे रहे हैं क्योंकि लार्ज कैप की तुलना में मिड कैप शेयर महंगे हैं। दूसरी ओर चुनौतीपूर्ण वृहद आर्थिक आंकड़ों, घरेलू शेयर बाजार में निवेश घटने के आसार और आगे व्यस्त चुनावी कार्यक्रम का माहौल है।' निर्यात से जुड़े क्षेत्रों की आमदनी पर रुपये की गिरावट का सकारात्मक असर पड़ा है। कुलकर्णी ने कहा, 'हमारे मॉडल पोर्टफोलियो में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों का भारांश 25 फीसदी है।'  अमूमन रक्षात्मक शेयर अनिश्चित समय में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। इसलिए निवेेशक दवा कंपनियों के बारे में विचार कर सकते हैं। रोजमर्रा का सामान (एफएमसीजी) बनाने वाली कंपनियों के शेयर महंगे हैं, लेकिन कुछ बड़ी कंपनियों के शेयर बाजार की अगुआ कंपनियों के मुकाबले सस्ते बने हुए हैं। वे अगले 2-3 साल में बेहतर प्रतिफल दे सकते हैं। 
 
श्रेणी आवंटन में बदलाव 
 
म्युचुअल फंड निवेशक, विशेष रूप से जो हाल में तेजी के दौर में बाजार में आए हैं, उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि ऐसी गिरावट शेयरों में निवेश का हिस्सा हैं। एडलवाइस म्युचुअल फंड की मुख्य कार्याधिकारी राधिका गुप्ता ने कहा, 'निवेशकों ने जिन लक्ष्यों के लिए शेयरों में निवेश शुरू किया है, वे संभव है कि लक्ष्य से कम से कम 5, 7 या 10 साल दूर होंगे। उन्हें लघु अवधि के उतार-चढ़ाव के बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए और लंबे समय तक अपना निवेश बनाए रखना चाहिए।' इक्विटी फंडों में अपना सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) बंद न करें। निवेशकों को अपने सलाहकारों से भी इस बारे में विचार करना चाहिए कि क्या उन्होंने जिन योजनाओं में निवेश किया है, वे उनके जोखिम लेने की क्षमता के मुताबिक हैं। गुप्ता ने कहा, 'आपको अपनी जोखिम उठाने का सही पता तब चलता है, जब आप गिरावट से गुजरते हैं और आपको अपने पोर्टफोलियो में नुकसान होता है।' 
 
अमूमन नए निवेशक सबसे ज्यादा प्रतिफल देने वाली श्रेणियों के पीछे दौड़ते हैं। ये श्रेणियां 2017 में माइक्रो कैप, स्मॉल कैप और मिड कैप फंड रही हैं। मिंटवॉक के सह-संस्थापक निखिल बनर्जी ने कहा, 'अगर कोई निवेशक एसआईपी के जरिये मुख्य रूप से मिड और स्मॉल कैप फंडों में ही निवेश कर रहा है तो उसे अपने पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित बनाना चाहिए और लार्ज कैप फंडों में निवेश बढ़ाना चाहिए।' इक्विटी पोर्टफोलियो का कम से कम 60 से 70 फीसदी हिस्सा लार्ज कैप फंडों में निवेश किया जाना चाहिए। आवंटन में यह बदलाव मिड और स्मॉल कैप फंडों को बेचकर नहीं बल्कि लार्ज कैप फंडों में ज्यादा निवेश के जरिये करना चाहिए।
 
डेट फंडों में भी करें निवेश
 
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे निवेशक, जो अब तक सावधि जमा में निवेश कर रहे थे और पहली बार शेयरों में निवेश कर रहे हैं, उन्हें इक्विटी सेविंग फंड्स, एगे्रेसिव हाइब्रिड (बैलेंस्ड) फंड या बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स जैसे हाइब्रिड फंडों में निवेश करना चाहिए। अगर इस समय उनका निवेश केवल इक्विटी फंडों में है तो उन्हें अपने पोर्टफोलियो को ज्यादा स्थिर बनाने के लिए डेट फंडों में डायवर्सिफाई करना चाहिए। बनर्जी ने कहा, 'ब्याज दरें निकट भविष्य में कम नहीं होने के आसार हैं, इसलिए लिक्विड फंडों और अल्ट्रा शॉर्ट टर्म डेट फंडों में निवेश करें। अगर किसी की औसत परिपक्वता अवधि एक साल से अधिक होगी तो अवधि जोखिम होगा।' उन्होंने कहा कि अतिरिक्त प्रतिफल कमाने के लिए अत्यधिक ऋण जोखिम लेने वाले इन्वेस्टर्स फंडों से बचा जाना चाहिए।
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