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बाजार में तेजी, एनबीएफसी शेयरों में निकासी

हंसिनी कार्तिक /  October 14, 2018

हाल की गिरावट में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के शेयरों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि बुधवार को बाजार की तेजी में इन्हीं शेयरों को सबसे ज्यादा फायदा भी हुआ। ये शेयर 16 फीसदी तक चढ़े। इस अच्छी बढ़त ने इन्हें अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर से काफी ऊपर उठा दिया है। फिर भी, विशेषज्ञों ने निवेेशकों से कहा है कि वे कमजोर एनबीएफसी शेयरों से निकलने के लिए ऐसी तेजी का इस्तेमाल करें।  आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसंधान प्रमुख पंकज पांडेय ने कहा, 'इस क्षेत्र में कम से कम मध्यम अवधि में नकदी की किल्लत बनी रहेगी, इसलिए क्षेत्र की आमदनी भी कमजोर रहने के आसार हैं। निवेशकों को बुधवार जैसी तेजी का इस्तेमाल एनबीएफसी शेयरों से निकलने में करना चाहिए।'

 
विश्लेषकों की यह राय तब भी है, जब मंगलवार को देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने एनबीएफसी का 450 अरब रुपये का ऋण खरीदने की योजना बनाई है। बैंक ने पिछले साल एनबीएफसी का 150 अरब रुपये का कर्ज खरीदा था।  इस सतर्कता की एक वजह है। विशेषज्ञों का कहना है कि कम पूंजी के कारण लाभ पर असर और संपत्ति-देनदारी प्रबंधन (एएलएम) में अंतर का ऐसे शेयरों पर असर पड़ेगा। पिछले कुछ महीनों से ब्याज दरें बढ़ रही हैं। ऐसे में पहले से ही यह माना जा रहा है कि एनबीएफसी के मार्जिन पर असर पड़ेगा। इसके अलावा संपत्ति गुणवत्ता पर दबाव भी बढ़ रहा है। 
 
विश्लेषकों का कहना है कि जिन एनबीएफसी को लेकर निवेशकों का रुझान कमजोर रह सकता है, उनमें चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट्स, दीवान हाउसिंग फाइनैंस, गृह फाइनैंस, इंडियाबुल्स हाउसिंग और रेपको होम फाइनैंस आदि शामिल हैं। हाल के घटनाक्रम के कारण ब्रोकरेज कंपनियों ने एनबीएफसी खंड से वित्त वर्ष 2020 में अपनी आमदनी का अनुमान घटाकर 7 से 15 फीसदी कर दिया है। मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषक ने कहा, 'हमारा अनुमान है कि बाजार एनबीएफसी को ऋण देने में ज्यादा रूढि़वादी बनेंगे, जिससे कीमत (ब्याज लागत) में बढ़ोतरी के आसार हैं।' इससे भी बड़ी चिंता यह है कि उनकी ऋण वृद्धि की दर में गिरावट आई है। पहले अच्छी ऋण वृद्धि की बदौलत ही एनबीएफसी शेयरों का मूल्यांकन शीर्ष बैंकों बैंकों से भी अधिक बना हुआ था। अब शीर्ष विश्लेषक एनबीएफसी क्षेत्र में बजाज फाइनैंस और एचडीएफसी पर दांव लगाने की सलाह दे रहे हैं। बजाज फाइनैंस उपभोक्ता उत्पादों पर ऋण देती है, जबकि एचडीएफसी आवासीय ऋणों में बाजार की अगुआ है। 
 
विशेषज्ञों का कहना है कि इन दो नामों के अलावा अब बैंकों के ज्यादा शेयर खरीदने का समय है। एसएमसी ग्लोबल के सिद्धार्थ पुरोहित ने कहा, 'मध्यम अवधि के लिहाज से एनबीएफसी शेयरों की तुलना में बैंकों के शेयर ज्यादा आकर्षक नजर आ रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'हाल की गिरावट में बैंकों के शेयर कम प्रभावित हुए हैं, जो बाजार के फंड को जुटाने की उनकी ताकत दिखाता है।'  मॉर्गन स्टैनली, नोमुरा और सीएलएसए ने बैंकिंग शेयरों को तरजीह दी है।  एक अन्य कारक यह है कि बैंकिंग क्षेत्र को फंसे ऋणों की अच्छी वसूली के चक्र के निकट माना जा रहा है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेेषकों ने अपनी सितंबर तिमाही की आमदनी के प्रीव्यू में कहा, 'समाधान की रफ्तार तेज हो रही है, इसलिए बैंकों की फंसे ऋणों में भारी कमी आने के आसार हैं।'
 
इसके अलावा जब अर्थव्यवस्था में नकदी की कम उपलब्धता होती है तो बैंक कम लागत वाला फंड जुटाने के लिए बेहतर हालत में होते हैं। इसकी वजह यह है कि उनके पास चालू एवं बचत खातों की जमाएं होती हैं। इतना ही नहीं, अगर एनबीएफसी की वृद्धि सुस्त पड़ जाती है तो बैंकों के लिए खुदरा ऋणों में प्रतिस्पर्धा कम हो जाएगी। इससे बैंकों को अपना ऋण मार्जिन बढ़ाने में मदद मिलेगी। मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषकों ने कहा, 'इससे खुदरा ऋण देने वाले बैंको को अपना राजस्व बढ़ाने में मदद मिलेगी।' ब्रोकरेज बैंकिंग क्षेत्र में आईसीआईसीआई बैंक, इंडसइंड बैंक, ऐक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और एसबीआई को खरीदने की सलाह दे रहे हैं। हाल की गिरावट से वे और आकर्षक बन गए हैं। 
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