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राजकोषीय घाटे के कठिन लक्ष्य से जूझ रही सरकार

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली October 14, 2018

सरकार को विश्वास है कि वह इस साल राजकोषीय घाटे का लक्ष्य पूरा कर लेगी। हाल में पेट्रोल डीजल के उत्पाद शुल्क में कटौती के बावजूद सरकार ने यह भरोसा जताया है। उत्पाद शुल्क कटौती  से 10,500 करोड़ रुपये का कुल राजस्व नुकसान हो सकता है। इसमें से केंद्र सरकार 6,100 करोड़ रुपये का बोझ उठाएगी क्योंकि शुल्क की शेष 42 प्रतिशत राशि राज्यों को मिलती है।  प्रत्यक्ष कर संग्रह उत्साहजनक है, वहीं अन्य संकेतकों से पता चलता है कि केंद्र्र का लक्ष्य मुश्किल है। उपलब्ध आंकड़ोंं को देखें तो वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के माध्यम से उम्मीद से 1 लाख करोड़ रुपये कम कर आने की संभावना है। इसके साथ ही अतिरिक्त अनुमानित व्यय 28,000 करोड़ रुपये है। सरकार को गैर कर राजस्व और विनिवेश, गैर जरूरी व्यय को घटाकर बजट में अनुमानित प्रत्यक्ष कर की तुलना में 1.5 लाख करोड़ रुपये ज्यादा जुटना होगा, अगर वह चाहती है कि राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.3 प्रतिशत रहे। भारतीय स्टेट बैंक में मुख्य अर्थशास्त्री सौम्यकांति घोष ने कहा, 'उम्मीद से सुस्त जीएसटी संग्रह और अतिरिक्त व्यय प्रतिबद्धताओं की वजह से सरकार नाजुक संतुलन स्थापित करने का काम कर रही है।' 
 
वित्त वर्ष के पहले 5 महीने में राजकोषीय घाटा लक्ष्य के 94.7 प्रतिशत पर पहुंच चुका है। यह 5.91 लाख करोड़ रुपये रहा है। ऐसे में अगले 7 महीने में राजस्व से अतिरिक्त खर्च करने के मामले में सरकार के हाथ बंधे रहेंगे।  पिछले साल  की तुलना में (बजट का 96.1 प्रतिशत) में इस साल राजकोषीय घाटा ज्यादा रहा है, ऐसे में अंतिम लक्ष्य चूक सकता है और यह जीडीपी के 3.2 प्रतिशत की तुलना में 3.5 प्रतिशत पर पहुंच सकता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दावा किया कि जीएसटी प्राप्तियां कम रहने की वजह से ऐसा दिख रहा है। बहरहाल सरकार ने वास्तविक पूंजीगत व्यय बजट अनुमान की तुलना में 15 प्रतिशत तक कम कर दिया है। 
 
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी ने कहा, 'यह हासिल करने के लिए आसान लक्ष्य नहीं है और लक्ष्य हासिल करने के लिए यह आसान साल नहीं है।'  केंद्र सरकार के आंतरिक व्यय अनुमान से पता चलता है कि सिर्फ हाल में मोटे अनाज और दलहन के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य बाध्यताओं को पूरा करने के लिए 20,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त आवंटन की जरूरत होगी। यह बजट में अनुमानित 1.69 लाख करोड़ रुपये खाद्य सब्सिडी के ऊपर होगा। इस साल के लिए ईंधन सब्सिडी 25,000 करोड़ रुपये रखा गया है। बहरहाल कच्चे तेल की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण सरकार को अब इस मद में भी 12,500 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे।  
 
सरकार ने घोषणा की थी कि वह सरकारी विमान कंपनी एयर इंडिया को बजट में घोषित 16,300 करोड़ रुपये धन के अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये मुहैया कराएगी। वहीं आयुष्मान भारत का बजट 3,500 करोड़ रुपये बढ़ सकता है।  इस साल अप्रैल-अगस्त के दौरान कुल व्यय 10.7 लाख करोड़ रुपये है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 9.5 लाख करोड़ रुपये था। इस साल अनुदानों के लिए पूरक मांग और अतिरिक्त प्रतिबद्धताओं के पहले बजट का आकार 24.4 लाख करोड़ रुपये है। 
Keyword: fiscal deficit, ICRA, GDP, राजकोषीय घाटा,
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