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ज्यादा उतारचढ़ाव के लिए तैयार रहें निवेशक

कृष्ण कांत / मुंबई October 12, 2018

इक्विटी निवेशकों को ज्यादा उतारचढ़ाव और नकारात्मक रिटर्न के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि दुनिया के सबसे बॉन्ड व इक्विटी बाजार अमेरिका में बॉन्ड का प्रतिफल बढ़ रहा है। लंबी अवधि के आंकड़े अमेरिकी सरकार के 10 साल के बॉन्ड और एसऐंडपी 500 इंडेक्स (अमेरिका में सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाला इक्विटी इंडेक्स) के बीच नकारात्मक सह-संबंध का संकेत देते हैं।  मूल्यांकन का गुणक पीई का विस्तार होता है और शेयर कीमतें तब चढ़ती है जब बॉन्ड का प्रतिफल घटता है और ये चीजें विपरीत हो जाती है जब प्रतिफ बढ़ता है।  उदाहरण के लिए एसऐंडपी पीई गुणक पिछले 12 महीने के आधार पर 1982 के शुरू में घटकर 7 गुने के निचले स्तर पर आ गया था जब अमेरिकी बॉन्ड का प्रतिफल 1970 के दशक के आखिर व 1980 के दशक की शुरुआत में उछल गया था।
 
इसके विपरीत इंडेक्स का मूल्यांकन तब बढ़ा जब जून 1982 की 15.8 फीसदी की रिकॉर्ड ऊंचाई से बॉन्ड के प्रतिफल में लंबी अवधि की गिरावट शुरू हुई। इसके परिणामस्वरूप इक्विटी मूल्यांकन की दोबारा रेटिंग हुई और इसने अमेरिकी इतिहास में लंबे समय तक चलने वाला तेजी का माहौल तैयार किया, जो अंतत: साल 2000 में डॉट-कॉम के धराशायी होने के बाद समाप्त हुआ। एसऐंडपी 500 साल 1982 के 112 के स्तर से मार्च 2000 में 1,500 के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया, जिसमें मुख्य रूप से अन्तर्निहित गुणक में सतत बढ़ोतरी का योगदान रहा।
 
इंडेक्स का पीई गुणक करीब 2,100 आधार अंक चढ़ा, वहीं बॉन्ड प्रतिफल इस अवधि में 800 आधार अंक नीचे आया। वैश्विक इक्विटी में मौजूदा तेजी भी बॉन्ड प्रतिफल में लगातार हो रही गिरावट के चलते आई है, जो साल 2009 के मध्य में रहे 4 फीसदी के स्तर से साल 2016 के मध्य में घटकर 1.5 फीसदी के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। इस अवधि में एसऐंडपी 500 का आय गुणक 14 गुने से बढ़कर करीब 22 गुना हो गया और इस अवधि में इंडेक्स में हुई अतिरिक्त बढ़त में करीब आधे का योगदान किया जबकि कंपनियों की आय में बढ़त ने बाकी योगदान किया। पिछले महीने इंडेक्स सर्वोच्च स्तर 2,914 पर पहुंचा, जो लीमन संकट के बाद के निचले स्तर से 3.7 गुना ऊपर है।
 
विश्लेषकों को इससे आश्चर्य नहीं हुआ है। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा, बॉन्ड प्रतिफल ज्यादा होने का मतलब है जोखिम मुक्त परिसंपत्तियों सरकारी बॉन्डों में निवेशकों के लिए उच्च रिटर्न। यह जोखिम वाली परिसंपत्तियों के प्रति आकर्षण तब तक घटाता है, जब तक कि आय में बढ़त की तेज रफ्तार से इसकी भरपाई न हो। पिछली पांच तिमाहियों में अमेरिकी फर्मों ने आय में दो अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की है, लेकिन अमेरिकी-चीन व्यापार युद्ध के नकारात्मक असर और ब्याज दरों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के भार से आय का परिदृश्य मंदी का हो गया है। विश्लेषक अमेरिकी बॉन्ड के प्रतिफल में और बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं, जो इक्विटी के मूल्यांकन और शेयर की कीमत पर दबाव डालेगा। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक व प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, चूंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ा रहा है और अमेरिकी राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी से बॉन्ड की आपूर्ति बढ़ रही है, लिहाजा अमेरिका में बॉन्ड का प्रतिफल और बढ़ सकता है।
 
इस वजह से परिसंपत्ति वर्ग के तौर पर इक्विटी की दोबारी कीमत तय होगी और अमेरिका में शेयर की कीमतें घटेगी। हालांकि चोकालिंगम को भारतीय बाजार में मौजूदा स्तर से सीमित गिरावट की संभावना दिख रही है। उन्होंने कहा, मुझे आने वाले समय में भारत और वैश्विक बाजारों के बीच कमजोर सह-संबंध नजर आ रहा है। बेंचमार्क सेंसेक्स अभी अपनी पिछले प्रति शेयर आय के 22 गुने पर कारोबार कर रहा है, जो अगस्त के 25 गुने के मुकाबले कम है, लेकिन साल 2013 में हुई पिछली बड़ी गिरावट के दौरान रहे 16.5 गुने से ज्यादा है।
Keyword: equity, PE, market, share, bond,,
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