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शुल्क घटने से एयरलाइंस को राहत की उम्मीद कम

अभिषेक वाघमारे और अरिंदम मजूमदार / नई दिल्ली 10 11, 2018

एटीएफ पर उत्पाद शुल्क मेंं कटौती से सिर्फ अस्थायी राहत

कच्चे तेल के दाम में तेजी के कारण बढ़ी लागत से जूझ रहे एयरलाइन ऑपरेटरों को विमान ईंधन (एटीएफ) पर उत्पाद शुल्क मेंं कटौती से सिर्फ अस्थायी राहत ही मिलेगी। हवाई यात्रा करने वालों को किराये में राहत मिलने की संभावना नहीं है क्योंकि 26 सितंबर से मूल सीमा शुल्क में बढ़ोतरी का असर आने वाले सप्ताहों में एटीएफ की कीमतों पर नजर आएगा।

एयरलाइन के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कहा कि उच्च सीमा शुल्क और घटे उत्पाद शुल्क के असर एक दूसरे का नफा नुकसान खत्म कर देंगे। सूत्रों ने कहा कि सरकार के राजस्व पर असर भी मामूली रहेगा क्योंकि दो शुल्क अलग अलग दिशा में चल रहे हैं।  

स्पाइसजेट के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने कहा कि वास्तविक लाभ तभी होगा ज राज्य व तेल विपणन कंपनियां कीमतों और कर में कमी करें, जैसा पेट्रोल व डीजल के मामले में हुआ है। सिंह ने कहा, 'हम तेल कंपनियों से अनुरोध करेंगे कि वे अपना मुनाफा 1 रुपये कम करें और राज्य सरकारें भी इतना ही कर कम करें। उसके बाद एयरलाइंस के ईंधन की लागत में करीब 10 प्रतिशत की कमी आएगी। अगर ऐसा होता है तो यह अहम होगा।'  

एक एयरलाइंस द्वारा साझा की गई गणना के मुताबिक उत्पाद शुल्क में 3 प्रतिशत कमी करने से एक यात्री के प्रति किलोमीटर किराये पर महज 0.04 रुपये का असर पड़ेगा। सस्ती उड़ान सेवाएं मुहैया कराने वाली एयरलाइंस की यूनिट लागत अब 1.5 रुपये के करीब है।  

केंद्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क के अलावा राज्यों द्वारा एटीएफ पर मूल्यवर्धित कर लगाया जाता है, जो कुछ राज्यों में 3 प्रतिशत के निम्न स्तर पर है, जबकि आंध्र प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में 30 प्रतिशत से ज्यादा है। एक एयरलाइंस के अधिकारी ने कहा कि जब तक राज्य मूल्यवर्धित कर (वैट) नहीं कम करते, एटीएफ के दाम में कमी का कोई मतलब नहीं होगा। सिंह ने कहा, 'जेट ईंधन के दाम में भारी बढ़ोतरी से राज्यों को वैट से भारी कमाई हुई है।

अब उनके लिए मौका है कि वे कुछ लाभ एयरलाइंस को दें, जिससे उनके राज्यों में हवाई यातायात को बढ़ावा मिलेगा।' विशेषज्ञों ने भी इस बात को लेकर चिंता जताई है कि उत्पाद शुल्क में कटौती और सीमा शुल्क में बढ़ोतरी एक साथ किए जाने से कोई असर नहीं होगा। 

ईवाई में टैक्स पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा, 'एटीएफ पर उत्पाद शुल्क दरों में कटौती विमानन उद्योग के लिए राहत है, खासकर ऐसे समय में जब हाल ही में एटीएफ के आयात पर सीमा शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। इससे मूल सीमा शुल्क से बढ़ी लागत से राहत मिलेगी।'  

सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने विमान ईंधन के दाम में अक्टूबर में 7.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। इस समय नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में एटीएफ के दाम सर्वोच्च स्तर पर हैं और दिल्ली में इसके दाम 74,567 रुपये प्रति किलोलीटर हैं। एटीएफ अक्टूबर 2013 में दिल्ली में सबसे महंगा 77,089 रुपये प्रति किलोलीटर था।  

पिछले सप्ताह आई क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस साल एयरलाइंस की परिचालन लागत में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, इसकी प्रमुख वजह यह है कि कच्चे तेल के दाम में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और रुपये के दाम में 9 प्रतिशत की गिरावट आई है।  

इस महीने की शुरुआत में इंटरनैशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने कहा था कि एयरलाइंस के लागत ढांचे में वैश्विक रूप से ईंधन की हिस्सेदारी 24.2 प्रतिशत होती है। भारत में यह 34 प्रतिशत है, जिससे भारत के विमान सेवा प्रदाताओं के लिए ईंधन के दाम ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं।

पेट्रोल एवं डीजल के दाम में अंतरराष्ट्रीय मानक मूल्यों के हिसाब से रोजाना बदलाव हो रहा है, जिसकी वजह से कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी से रोज ही उपभोक्ता मूल्य बढ़ जाते हैं।  

बहरहाल एटीएफ के दाम में सामान्यतया हर महीने की शुरुआत में बदलाव होता है। 1 अक्टूबर को हुए बदलाव में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन जैसे एटीएफ आपूर्तिकर्ताओं ने मूल सीमा शुल्क मेंं बढ़ोतरी के मुताबिक दाम नहीं बढ़ाए क्योंकि बढ़े सीमा शुल्क पर आने वाले नए शिपमेंट का तेल रिफाइनिंग चक्र में नहीं आया था। 
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