बिजनेस स्टैंडर्ड - व्यापार समझौतों का विनिर्माण पर विपरीत असर
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व्यापार समझौतों का विनिर्माण पर विपरीत असर

ज्योति मुकुल और शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 10 11, 2018

बढ़ रहा है व्यापार घाटा

चीन के कारोबारी समझौतों से भारत के विनिर्माण की वृद्धि घटी

बिजनेस स्टैंडर्ड व्यापार समझौतों का विनिर्माण पर विपरीत असरभारत के विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों का विपरीत असर स्थानीय विनिर्माण क्षेत्र पर पड़ ही रहा है, इसके बड़े व्यापारिक साझेदारों के साथ पिछड़े देशों के समझौतों से भी भारत के निर्यात की वृद्धि प्रभावित हो रही है। खासकर अगर साझेदार का भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता नहीं है तो उसके साथ कारोबार पर असर पड़ रहा है। सरकार ने निर्यात होने वाली 200 वस्तुओं का विश्लेषण किया है, जिनके कारोबार पर गरीब देशों के साथ चीन का मुक्त व्यापार समझौता असर डाल रहा है। 

2017-18 में चीन के साथ भारत के  कारोबार में 76 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष चीन के पक्ष में रहा, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। अध्ययन में कहा गया है, 'उन देशों के साथ कारोबार, जिनका भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता नहीं है और प्रतिस्पर्धी देशों के साथ उनका समझौता है, निर्यात की संभावनाएं सीमित होती हैं। इसकी वजह यह है कि उन देशों में समझौता कर चुके प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारत के निर्यातकोंं पर भारी आयात शुल्क लगता है।'

भारत को एशिया प्रशांत कारोबार समझौता (एपीटीए) के तहत सीमित छूट मिलती है। अधिकारियों ने कहा कि यह विश्लेषण अगले साल होने वाली एपीटीए वार्ता में भारत के तर्क रखने का आधार बनेगा। अध्ययन मेंं कहा गया है, 'भारत और चीन दोनोंं ही एपीटीए का हिस्सा हैं, ऐसे में इस समझौते के तहत भारत, चीन के साथ आगे की वार्ता की रूपरेखा बना सकता है।' 

जिन प्रतिस्पर्धी देशों का इसमें विश्लेषण किया गया है, उनमें पेरू, पाकिस्तान, ऑस्टे्रलिया, दक्षिण कोरिया व आसियान देश शामिल हैं। अध्ययन में आगे और सुझाव दिया गया है कि भारत एपीटीए के छोटे समूहों के साथ उदारीकरण की पृष्ठभूमि तैयार कर लाभ उठा सकता है। यह आरईसीपी के तहत समझौते से बेहतर होगा, जहां ज्यादा प्रतिस्पर्धी देश शामिल हैं।

प्रमुख 200 निर्यात वस्तुओं में झींगा, एल्युमीनियम ऑक्साइड, टेक्सटाइल जैसे असंबद्ध एकल कपास धागे शामिल हैं। इनके अलावा अरंडी के तेल, मेंथॉल और हीरे के कारोबार मेंं चीन ने शुल्क छूट नहींं दी है, इसके बावजूद उसके कुल आयात मेंं इसकी हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से ज्यादा है। अध्ययन मेंं कहा गया है, 'इससे पता चलता है कि भारत की इस तर्ज पर क्षमता बहुत ज्यादा है और अगर आगे शुल्क छूट मिलती है तो भारत की चीन के बाजार में हिस्सेदारी और बढ़ सकती है।'

भारत की उसके कुल निर्यात में आयातित इनपुट की मात्रा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी जारी है। इसमें से ज्यादातर चीन के साथ ऐसा है। रिपोर्ट के मुताबिक इसका प्रमुख उदाहरण मोबाइल और लैंडलाइन फोन है। भारत का इन वस्तुओंं का आयात 2014 के 6.34 अरब डॉलर से घटकर 2017 में 3.31 अरब डॉलर हो गया है, क्योंकि विनिर्माता भारत आए हैं।  बहरहाल इन उपकरणोंं के कल पुर्जों का आयात चीन व अन्य जगहों से हो रहा है क्योंकि विनिर्माता बार बार इन पुर्जों के आयात को सस्ता और भारत में इनके विनिर्माण के स्थानीय माहौल बेहतर न होने का हवाला दे रहे हैं। यह इसके बावजूद हो रहा है, जब भारत ने स्थानीय सोर्सिंग के मानक बढ़ाया है। अमेरिका की तकनीकी दिग्गज ऐपल ने इस फैसले को हानिकारक बताया है, कि उसका विनिर्माण संयंत्र भारत में लगाया जाए। 

रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने अपने निर्यात वस्तुओं के लिए आयात कम कर दिया है और उनके निर्यातक डिजाइन और और निर्माण के दौर मेंं हैं और घरेलू उपकरणों पर ध्यान दे रहे हैं।  चीन के साथ भारत का कारोबारी घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले 5 महीने में बढ़कर 80 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है क्योंकि रुपये का मूल्य बहुत ज्यादा गिरा है। 2017-18 में भारत का कुल कारोबारी घाटा 162 अरब डॉलर था, जिसमें से चीन के साथ कारोबारी घाटा 76 अरब डॉलर था। 
Keyword: india, america, trade, china,,
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