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बकाया भुगतान के लिए लेनदारों से बात कर रही आर्सेलरमित्तल

ईशिता आयान दत्त / कोलकाता October 11, 2018

उत्तम गैल्वा स्टील्स और केएसएस पेट्रोन का बकाया चुकाने के लिए आर्सेलरमित्तल लेनदारों से बातचीत कर रही है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय की तरफ से तय समयसीमा करीब आ रही है। 4 अक्टूबर के फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने एस्सार स्टील की बोली के पात्र बनने के लिए आर्सेलरमित्तल और न्यूमेटल को अपनी-अपनी गैर-निष्पादित आस्तियों के भुगतान के लिए दो हफ्ते का वक्त दिया था। यह समयसीमा 18 अक्टूबर को समाप्त हो रही है। हालांकि संभावना है कि आर्सेलरमित्तल को 70 अरब रुपये से ज्यादा चुकाना होगा, जो इसने इस मकसद के लिए जमा कराई हुई थी। जब लेनदारों की समिति ने एनसीएलटी के आदेश के मुताबिक आर्सेलर व न्यूमेटल से कोई बकाया नहीं का प्रमाणपत्र मांगा था तब आर्सेलर ने चालू खाते में 70 अरब रुपये जमा करा दिए थे और लेनदारों के सामने शर्त के साथ पेशकश की थी। इस पेशकश में कहा गया था कि यह भुगतान तभी होगा जब आर्सेलर को एस्सार की बोली के लिए कामयाब व पात्र बोलीदाता घोषित किया जाएगा।

 
सूत्रों ने कहा, उस समय बैंकों ने उत्तम गैल्वा के लिए 55 अरब रुपये के तत्काल भुगतान और 15 अरब रुपये तीन साल मेंं चुकाने का संकेत दिया था। केएसएस पेट्रोन के लिए भुगतान 10 अरब रुपये था। बैंकों ने यह संकेत मई के मध्य में दिया था। इस भुगतान में मूलधन व ब्याज के अलावा जुर्माने के रूप में दिया जाने वाला ब्याज व अन्य शुल्क और भुगतान की तारीख तक बकाए की अतिरिक्त रकम शामिल थी। एक सूत्र ने कहा, उत्तम गैल्वा के लिए भुगतान 70 अरब रुपये से ज्यादा होगा और इस पर 18 फीसदी ब्याज (जुर्माना) अलग से देय होगा। आर्सेलरमित्तल ने इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया।
 
रकम चाहे जो भी हो, यह आर्सेलरमित्तल को सिर्फ और सिर्फ एस्सार के लिए बोली के पात्र बना देगा। आर्सेलर पहले ही एस्सार के लिए बोली संशोधित कर 420 अरब रुपये कर दी है। आर्सेलर लेनदारों के साथ भुगतान के लिए बातचीत कर रही है, वहीं कम से कम दो अन्य कंपनियां अकेले बोली लगाने पर विचार कर रही है और कानूनी राय मांग रही है क्योंकि न्यूमेटल का बकाया 390 अरब रुपये से ज्यादा रहने की संभावना है। न्यूमेटल कंसोर्टियम में वीटीबी प्रमुख साझेदार है और जेएसडब्ल्यू अपनी छोड़ी गई सहायक में निवेशक है।
 
मई में न्यूमेटल पर मूलधन व ब्याज 375.58 अरब रुपये बकाया है और जुर्माने का ब्याज व अन्य शुल्क 16.85 अरब रुपये। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक, न्यूमेटल को समाधान योजना जमा कराने से पहले रुइया समूह की अन्य कंपनियों के लिए भुगतान करना पड़ सकता है, जिन्हें एक साल से ज्यादा समय से गैर-निष्पादित आस्तियों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।  अगर वीटीबी अकेले बोली लगाती है तो इससे नया कानूनी मोर्चा खुल सकता है। सर्वोच्च न्यायालय में दशहरे की छुट्टी होगी और दोबारा अदालत खुलने से पहले भुगतान की समयसीमा पूरी हो जाएगी।
Keyword: Arcelor Mittal, court, NCLT, Uttam Galva Steels,,
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