बिजनेस स्टैंडर्ड - आधा-अधूरा आदेश
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, December 13, 2018 03:09 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

आधा-अधूरा आदेश

संपादकीय /  October 10, 2018

देश के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व में सर्वोच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों के पीठ ने बुधवार को एक ऐसा आदेश दिया जिसमें काफी गुंजाइश रह गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद द्वारा सन 2016 में घोषित रक्षा लड़ाकू विमान सौदे के खिलाफ एक रिट याचिका की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार से केवल इस सौदे की निर्णय प्रक्रिया का ब्योरा पेश करने को कहा है। यह जानकारी सीलबंद तरीके से मांगी गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अदालत इस सौदे के मूल्य और तकनीकी ब्योरे के बारे में कोई जानकारी नहीं चाहती। हालांकि अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इस संवेदनशील सौदे की न्यायिक समीक्षा का विरोध किया लेकिन अदालत ने यह जानकारी देने के लिए 29 अक्टूबर की समय सीमा तय की। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 31 अक्टूबर की तारीख तय की है। अदालत की यह मांग सरकार के लिए एक झटका है क्योंकि उसने तमाम राजनीतिक और जन दबाव के बावजूद इस सौदे के बारे में अहम जानकारी देने से इनकार ही किया है। परंतु इसके बावजूद अदालत का आदेश अहम मुद्दों का समाधान नहीं करता। 

 
राफेल लड़ाकू विमान दो इंजन वाला एक मझोला मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है जिसे फ्रांस की विमानन कंपनी दसॉ एविएशन बनाती है। भारत द्वारा 36 लड़ाकू विमानों को उडऩे योग्य स्थिति में खरीदा जाना वायु सेना की क्षमताओं के उन्नयन की प्रक्रिया का हिस्सा है। बहरहाल यह सौदा एक के बाद एक विवादों में घिरता गया। सबसे पहले विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने 126 विमानों के खरीद सौदे को खारिज करके 36 विमान खरीदने का निर्णय लिया है। यह  देश की वायुसेना को कमजोर करने वाली बात है। 126 विमानों की खरीद का सौदा कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अंतिम दौर में था। इतना ही नहीं सरकार पर यह आरोप भी लगाया गया कि उन्हीं विमानों के लिए कहीं अधिक कीमत चुकाई गई। सरकार के खिलाफ कारोबारी सांठगांठ का आरोप भी लगा क्योंकि उसने ऑफसेट सौदे के लिए सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की अनदेखी करके एक निजी कंपनी का चयन किया। 
 
राफेल मामले पर सरकार का रुख जटिल है। गत वर्ष रक्षा मंत्री ने वादा किया था कि वह यह बताएंगी कि दसॉ ने रद्द निविदा में विमानों की क्या दर लगाई थी और मौजूदा सौदे में किस दर पर विमान खरीदे गए हैं। परंतु बाद में वह गोपनीयता के आधार पर पीछे हट गईं। इससे एक किस्म का भ्रम निर्मित हो गया और सरकार कुछ छिपाना चाहती है। पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति ओलांद, जिनके साथ भारतीय प्रधानमंत्री ने संधि पर हस्ताक्षर किए थे, उनके यह कहने के बाद आरोपों को बल मिलने लगा कि निजी क्षेत्र के साझेदार का चयन भारत की पसंद से किया गया। मोदी की निरंतर खामोशी सरकार के लिए हालात को और खराब कर रही है। सच तो यही है कि एक लोकतांत्रिक सरकार को जनता के धन के खर्च की जानकारी देनी चाहिए और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर इससे बचना एक गलत नजीर पेश करता है।
 
राफेल विमान की क्षमताओं के बारे में कोई सवाल नहीं किया गया है लेकिन भ्रष्टाचार के आरोप निरंतर लगते रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार से इस सौदे पर पूरी सफाई नहीं मांगी है। राफेल को लेकर जो जानकारी मांगी भी गई है वह केवल अदालत के पास रहेगी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि ऐसी कोई वजह नहीं है जिसके चलते सरकार से उन तथ्यों और आंकड़ों की मांग न की जाए जो इस सौदे पर लग रहे आरोपों को खत्म करने के लिए जरूरी हैं।
Keyword: supreme court, chief justice, ranjan gogoi, rafale,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या नए आरबीआई गवर्नर सरकार के साथ बैठा पाएंगे बेहतर तालमेल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.