बिजनेस स्टैंडर्ड - माल ढुलाई पर रेलवे का जोर
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माल ढुलाई पर रेलवे का जोर

शाइन जैकब / नई दिल्ली 10 09, 2018

कोयला ढुलाई के लिए 990 अरब रुपये की परियोजनाओं पर काम

माल ढुलाई से कमाई की हिस्सेदारी बढ़ाने के मकसद से भारतीय रेल ने कोयले के परिवहन के लिए 989.77 अरब रुपये की लागत से 84 परियोजनाओं को चिह्नित किया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय करीब 14 परियोजनाओं की मासिक आधार पर निगरानी कर रहा है, जिससे इन्हें 2020 और 2022 के बीच पूरा किया जा सके।

एक सरकारी अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'हमने 9,259 किलोमीटर लंबी परियोजनाएं तैयार की है, जिन पर 989.77 अरब रुपये लागत आएगी। इनकी योजना कोयले की ढुलाई की सुविधा के मुताबिक बनी है। 84 परियोजनाओं में से 15 नई लाइनें हैं, जिनकी लंबाई 2178 किलोमीटर है।' शेष 6,445 किलोमीटर दोहरीकरण, तिहरीकरण और 4 लाइनें बिछाने और 636 किलोमीटर लंबी परियोजनाएं आमान परिवर्तन की हैं। 

इस मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इन 84 परियोजनाओं का प्राथमिक मकसद कोयले की ढुलाई की स्थिति में सुधार करना है, जिनमें से 14 परियोजनाओं की निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय सीधे कर रहा है। इन 14 परियोजनाओं में से 4 का क्रियान्वयन विशेष उद्देश्य इकाई के माध्यम से हो रहा है, जिसमें संबंधित राज्य सरकारों की भी अहम हिस्सेदारी है। एक बार कोयला परियोजनाएं लागू हो जाएं तो रेलवे को उम्मीद है कि इससे अगले 3 से 5 साल में माल ढुलाई कम से कम 200 करोड़ टन हो जाएगी। 

इस समय रेलवे करीब 55.5 करोड़ टन कोयले की ढुलाई करता है। अधिकारियों ने संकेत दिए कि एक बार यह परियोजनाएं लागू हो जाएं तो रेलवे की माल ढुलाई में हिस्सेदारी बढ़कर 80 से 100 करोड़ टन हो सकती है। इस साल अप्रैल से जुलाई के दौरान रेलवे की माल ढुलाई 39.754 करोड़ टन रहा, जो पिछले साल 2017-18 में 37.553 करोड़ टन रहा था।  

एसपीवी के माध्यम से लागू की गई बड़ी परियोजनाओं में शिवपुर-कठौतिया (झारखंड) का 47 किलोमीटर खंड, खरसिया और कोरीछापर (छत्तीसगढ़) का 136 किलोमीटर लंबा खंड, गेवरा रोड से पेंड्रा के बीच 122 किलोमीटर का खंड और अंगुल बलराम के बीच 14 किलोमीटर का खंड शामिल है।

इन परियोजनाओं में कोल इंडिया, रेलवे की सहायक इकाई इरकॉन और संबंधित राज्य सरकारें संयुक्त रूप से हिस्सेदार हैं। यह ऐसे समय में हो रहा है जब प्रधानमंत्री कार्यालय पूर्वी और पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे की प्रगति की निगरानी कर रहा है, जिसके ट्रैक की कुल लंबाई 3,360 किलोमीटर है। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान भारतीय रेल ने सबसे ज्यादा 1.17 लाख करोड़ रुपये माल ढुलाई से कमाया था, जो 2016-17 ते 80 अरब रुपये से ज्यादा है।  

अधिकारी ने कहा, 'समर्पित माल ढुलाई गलियारा तैयार होने के बाद भी रेलवे की माल ढुलाई, खासकर कोयले की ढुलाई प्रमुख होगी। इसलिए प्रधानमंत्री कार्यालय चाहता है कि इन 14 परियोजनाओं पर तेजी से काम हो।'  रेलवे के भविष्य के हिसाब से माल ढुलाई अहम है।

रेलवे के एक रुपये की कमाई में माल ढुलाई से कमाई 65 पैसे होती है, जिसका इस्तेमाल यात्रियों को सब्सिडी देने में होता है। वित्त वर्ष 2017-18 में रेलवे ने 116.2 करोड़ टन माल ढुलाई की थी, जो वित्त वर्ष 17 के  110.9 करोड़ टन से ज्यादा है। यह परियोजनाएं कोयला ढुलाई के हिसाब से अहम हैं क्योंकि ज्यादा मांग के वक्त बिजली क्षेत्र को कोयले की कमी से जूझना पड़ता है। 

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