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इंडियाबुल्स हाउसिंग के पास 200 अरब रु. नकद

अद्वैत राव पालेपू / मुंबई October 08, 2018

निवेशकों की इस चिंता के बाद कि हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों में नकदी की समस्या है, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस (आईबीएचएफएल) ने सोमवार को कहा कि कंपनी के पास अच्छी खासी नकदी है और सितंबर 2018 में यह 200 अरब रुपये थी। यह मानते हुए कि कंपनी कोई नई उधारी नहीं लेगी, आईबीएचएफएल का 6 महीने का नकदी कवरेज अनुपात अभी 135 फीसदी बैठता है। कंपनी ने बीएसई को भेजी सूचना में ये बातें कही। वित्त वर्ष 2018 में जनवरी-मार्च की तिमाही में कंपनी के पास 165 अरब रुपये की नकदी थी, जबकि वित्त वर्ष 2018 में अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही में यह 211 अरब रुपये रही थी। तिमाही दर तिमाही नकदी में बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी की नकदी वित्त वर्ष 2017 की अप्रैल-जून तिमाही के मुकाबले वित्त वर्ष 2018 में जनवरी-मार्च के दौरान घटकर सबसे निचले स्तर पर आ गई।
 
पिछले 15 दिनों में आईबीएचएफएल ने द्वितीयक बाजार से 18.2 अरब रुपये की पुनर्खरीद की है और प्राथमिक प्रतिभूतियों से करीब 36.2 अरब रुपये जुटाए हैं। कंपनी ने कहा, आईबीएचएफएल की 4.1 अरब रुपये की ऋण प्रतिभूतियों की ट्रेडिंग हुई है। आरबीआई के नियम अल्पावधि फंडिंग (1-14 दिन, 15-30 दिन और एक साल) में 15 फीसदी बेमेल की अनुमति देता है, ऐसे में आईबीएचएफएल की पोजीशन 30 दिन की संचयी फंडिंग के क्षेत्र में 10 फीसदी (1.1 गुना) और एक साल वाले मामले में 5 फीसदी (1.05 गुना) सकारात्मक है।
 
कंपनी ने कहा कि इसने सभी अवधि (एक साल, एक से पांच साल और 5 साल से ऊपर) संपत्ति देनदारी का प्रबंधन ठीक से कर लिया है और यह बेमेल नहीं है।कंपनी ने 2-3 साल के लिए बीमा कंपनियों से 9.5 फीसदी की दर पर 5 अरब रुपये जुटाए हैं, वहीं वाणिज्यिक प्रतिभूतियों की उधारी लागत 8.25 फीसदी है। संपत्ति-देनदारी में बेमेल से जुड़ी चिंता आईएलऐंडएफएस की सहायक कंपनियों की तरफ से कर्ज व ऋणपत्र में डिफॉल्ट के बाद पैदा हुई, जो महत्वपूर्ण एनबीएफसी व बुनियादी ढांचा कंपनी है।
 
इसके परिणामस्वरूप पिछले दो हफ्ते में कई एनबीएफसी शेयर स्टॉक एक्सचेंजों पर गिरने शुरू हो गए। डीएचएफएल, आईबीएचएफएल, बजाज फिनसर्व, पीएनबी हाउसिंग फाइनैंस, महिंद्रा फाइनैंस आदि पर बाजार के सेंंटिमेंट का चोट पड़ा। एनबीएफसी ने वाणिज्यिक प्रतिभूतियों और गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र के जरिए पिछले कुछ सालों में काफी रकम जुटाई है। 
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