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सख्ती के डर से टूटा एनबीएफसी

बीएस संवाददाता / मुंबई October 08, 2018

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के शेयरों में सोमवार को भी गिरावट जारी रही क्योंकि निवेशकों ने इस डर से इन शेयरों की बिकवाली कर दी कि भारतीय रिजर्व बैंक के प्रस्तावित नियम से बढ़त और लाभ पर असर पड़ेगा। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को कहा था कि रोलओवर के जोखिम टालने के लिए वह एनबीएफसी के लिए नियमों को मजबूत करने पर विचार कर रहा है। आरबीआई ने वित्तीय फर्मों से कहा कि वे अल्पावधि वाली फंडिंग पर अपनी निर्भरता घटाए और इसके बजाय लंबी अवधि की फंडिंग का इस्तेमाल करे।
 
दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) का शेयर 18.5 फीसदी टूट गया और इस तरह से इस साल अब तक इस शेयर की गिरावट 61.7 फीसदी पर पहुंच गई। एडलवाइस फाइनैंशियल सर्विसेज का शेयर 13.7 फीसदी टूटा और इस साल अब तक इसकी गिरावट 49 फीसदी पर पहुंच गई। जेएम फाइनैंशियल, मैग्मा फिनकॉर्प और श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनैंस के शेयरों में भी 10-10 फीसदी से ज्यादा की फिसलन दर्ज हुई। सीएलएसए ने एक नोट में कहा कि व्यवस्था के लिहाज से कई एननबीएफसी महत्वपूर्ण बन रही हैं और अल्पावधि वाले स्रोतों मसलन वाणिज्यिक प्रतिभूतियों और म्युचुअल फंडों पर इनकी निर्भरता ज्यादा है। आरबीआई एनबीएफसी के लिए नकदी कवरेज अनुपात जैसी अनिवार्यताओं का विस्तार कर सकता है, जो अभी सिर्फ बैंक पर ही लागू है। 
 
आईएलऐंडएफएस के डिफॉल्ट के चलते एनबीएफसी क्षेत्र को लेकर निवेशकों का सेंंटिमेंट कमजोर हो गया है। इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंस दिग्गज की लंबी अïवधि वाली परियोजनाओं के लिए अल्पावधि वाले फंडों पर बड़ी निर्भरता को इस संकट की मुख्य वजह बताई जा रही है। आरबीआई ने कहा है कि नए सख्त नियम ऐसी संपत्ति-देनदारी (एएलएम) के बेमेल से पैदा होने वाली डिफॉल्ट की जोखिम पर लगाम कसने के लिहाज से बनाए जाएंगे। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने शुक्रवार को नीतिगत घोषणा के ऐलान के मौके पर कहा था कि उधारी बाजार की बड़ी हिस्सेदारी पर कब्जे के लिए अल्पावधि वाले कर्ज पर निर्भरता अदूरदर्शी रणनीति है।
 
मॉर्गन स्टैनली ने एक नोट में कहा, आरबीआई ने कहा है कि वह एनबीएफसी में एएलएम को मजबूत बनाने वाले कदमों पर विचार करेगा ताकि बेमेल रोका जा सके। हम विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं लेकिन लोन स्प्रेड व कर्ज की रफ्तार के लिए यह नकारात्मक हो सकता है। वाणिज्यिक प्रतिभूतियों वाली उधारी से लंबी अवधि वाले गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र या बैंक उधारी की ओर एक फीसदी बढऩे से फंडिंग की लागत 0.5 आधार अंक से एक आधार अंक तक बढ़ सकती है, जो क्रेडिट रेटिंग प्रोफाइल पर निर्भर करेगी।
 
ब्रोकरेज ने कहा कि निवेशकों को बड़े लेनदारों मसलन एचडीएफसी को प्राथमिकता देनी चाहिए, जो नकदी के लिहाज से अच्छी स्थिति में है। सोमवार को एचडीएफसी का शेयर 2.6 फीसदी टूटकर 1,670 रुपये पर बंद हुआ। मोतीलाल ओसवाल ने सोमवार को एक नोट में कहा, एएलएम पर बढ़ती नियामकीय सख्ती के साथ हमारा अनुमान है कि एनबीएफसी अपनी उधारी प्रोफाइल को सामान्य बनाएंगी, जो मौजूदा फंडिंग से स्थायी फंडिंग की ओर बढऩे से जुड़ा है। इससे फंडों की लागत उम्मीद से ज्यादा बढ़ेगी। हमें तेजी से बढऩे वाली एनबीएफसी की बढ़त की रफ्तार थमने की आशंका है।
 
ब्रोकरेज ने मौजूदा व अगले वित्त वर्ष के लिए एनबीएफसी के आय अनुमान में 4 से 7 फीसदी की कटौती की है। साथ ही आय मेंं कटौती व फंडिंग की ऊंची लागत को समाहित करते हुए इसने विभिन्न एनबीएफसी की लक्षित कीमत 8 से 27 फीसदी तक घटाई है। जेएम फाइनैंशियल ने एक नोट में कहा कि मजबूत प्रवर्तकों के समर्थन वाली एनबीएफसी व हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों को आने वाले समय में फंडिंग की असंगत हिस्सेदारी मिलेगी। साथ ही नई व छोटी एनबीएफसी की प्रतिस्पर्धा तेजी से घटेगी।  इसने कहा कि ब्रोकर के समर्थन वाली एनबीएफसी मसलन एडलवाइस और संपत्ति-देनदारी के बेमेल वाली एचएफसी मसलन डीएचएफएल, पीएनबी हाउसिंग, रेप्को होम फाइनैंस की बढ़त की रफ्तार सुस्त होगी।
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