बिजनेस स्टैंडर्ड - ईंधन के दाम अभी भी विनियंत्रित : इंडियन ऑयल
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ईंधन के दाम अभी भी विनियंत्रित : इंडियन ऑयल

शाइन जैकब / नई दिल्ली October 08, 2018

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के चेयरमैन संजीव सिंह ने कहा कि तेल विपणन कंपनियां- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसी) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल) को भारत में कीमतें तय करने की स्वतंत्रता है और पिछले सप्ताह तेल के दाम में 1 रुपये प्रति लीटर कटौती करने के बावजूद तेल के दाम विनियंत्रित हैं।  कीमतों मेंं कटौती से आईओसी को वित्त वर्ष के दौरान करीब 2300 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। बहरहाल उन्होंने उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में रुपया मजबूत होगा। हालांकि उन्होंंने संकेत दिए कि कच्चे तेल के दाम आगे और बढ़ सकते हैं। 
 
ओएमसी की ओर से कीमतों में कटौती और केंद्र सरकार द्वारा डीजल व पेट्रोल पर 1.5 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क घटाने के बाद विभिन्न राज्य सरकारों ने भी मूल्यवर्धित कर मेंं कटौती की है। इसके बावजूद ईंधन के दाम में बढ़ोतरी जारी है। शनिवार और रविवार को भी कीमतें बढ़ीं। रविवार को पेट्रोल का दाम 14 पैसे बढ़कर 81.82 रुपये लीटर और डीजल का दाम 29 पैसे बढ़कर 73.53 रुपये लीटर पर पहुंच गया।  सिंह ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'तीन बड़े हिस्सेदार- केंद्र सरकार, राज्य सरकारें व तेल विपणन कंपनियां खुदरा दाम कम करने का बोझ उठा रही हैं। उत्पाद के दाम में अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुताबिक बढ़ोतरी जारी है और इससे घरेलू दाम प्रभावित होंगे।' 
 
खुदरा मूल्य विपणन मुनाफे में कटौती से आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल का सालाना मुनाफा करीब 45 अरब रुपये घट सकता है।  शनिवार को एचपीसीएल ने भी कम अवधि के लिए उठाए गए सरकार के कदम को अपना लिया।  रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी पर सिंह ने कहा, 'कच्चे तेल के दाम और रुपये के मूल्य का अनुमान अलग अलग चीजें हैं। हम विश्वास करते हैं कि मुद्रा स्थिर होगी। हम देख रहे हैं कि कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं और वह मूल धारणा को समर्थन नहीं कर रहे। विभिन्न एजेंसियां कह रही हैं कि यह 85 के आसपास कीमतें स्थिर हो सकती हैं।' ब्रेंट क्रूड का दाम रविवार को 84.16 डॉलर प्रति बैरल रहा।
 
सिंह ने कहा कि जब कीमतें ऊपर जाती हैं तो कंपनी को कार्यशील पूंजी की जरूरतें भी बढ़ती हैं और इस तरह से आईओसी की निवेश योजना पर कोई असर नहीं होगा। कंपनी को यह भी उम्मीद है कि विपणन मुनाफा सकारात्मक बना रहेगा।  रुपया 73 के पास पहुंचने पर भारतीय रिजर्व बैंंक ने ओएमसी को सीधे विदेशी बाजारों से डॉलर लेने की अनुमति दे दी और कार्यशील पूंजी जरूरतों के हेजिंग की जरूरत नहीं है। शीर्ष बैंक ने उधारी की न्यूनतम परिपक्वता 3 साल और 5 साल रखी है, जबकि इस योजना के तहत 10 अरब डॉलर सीमा रखी गई है।
 
एचपीसीएल के अधिकारी ने एक कॉन्फ्रेंस कॉल में कहा, 'ओएमसी अन्य कदम (जैसे लॉजिस्टिक लागत, परिचालन व्यय, भंडारण लाभ) उठाकर नुकसान घटाने की कवायद करेंगी। प्रबंधन को विश्वास है कि दीर्घावधि के हिसाब से, जब कच्चे तेल के दाम स्थिर हो जाएंगी तो इस फैसले पर फिल से काम किया जाएगा।'   
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