बिजनेस स्टैंडर्ड - ईरान से ज्यादा तेल मंगाने की तैयारी में भारत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, December 11, 2018 05:58 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

ईरान से ज्यादा तेल मंगाने की तैयारी में भारत

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 10 08, 2018

ईरान, रूस और वेनेजुएला के साथ रुपये में कारोबार की तैयारी

बिजनेस स्टैंडर्ड ईरान से ज्यादा तेल मंगाने की तैयारी में भारतअमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद भारत खाड़ी देश ईरान के अलावा वेनेजुएला और रूस के साथ ज्यादा तेल खरीद के लिए बातचीत कर रहा है। प्रतिबंध लगाने के बाद अमेरिका ईरान से तेल आयात रोकने के लिए दबाव बना रहा है। बहरहाल इन देशों से तेल खरीद रुपये से कारोबार की व्यवस्था करने के लक्ष्य के साथ किया जाएगा, जिससे भारत की सबसे बड़ी आयात श्रेणी में अमेरिकी डॉलर के असर को कम किया जा सके।मामले से जुड़े एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि पिछले सप्ताह हुई अंतरमंत्रालयी बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने वाणिज्य, राजस्व व पेट्रोलियम विभागों से इन सभी देशों के साथ रुपये में कारोबार की संभावनाएं तलाशने को कहा था।

वहीं दूसरी ओर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि दो तेल रिफाइनरों ने नवंबर के लिए ईरान के कच्चे तेल के लिए सौदा किया है। नवंबर में ईरान पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध प्रभाव में आ जाएंगे। उन्होंने यहां द एनर्जी फोरम में कहा, 'हमारी 2 तेल कंपनियों ने नवंबर में ईरान से तेल खरीदने का ऑर्डर दिया है।

हमें नहीं पता कि हमें छूट (अमेरिकी पाबंदी) मिलेगी या नहीं।' उन्होंने कहा कि भारत की अपनी ऊ र्जा जरूरतें हैं जिन्हें पूरा किया जाना है। उन्होंने कहा, 'हम अपने राष्ट्र हित को देखते हुए फैसला करेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने सऊदी अरब से अनुरोध किया है कि वह कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाए।

बहरहाल इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के चेयरमैन संजीव सिंह ने कहा कि भारत ईरान के कच्चे तेल का भुगतान रुपये में करने पर विचार कर रहा है। इस समय ईरान भारत में कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है। सिंह ने कहा कि उनकी कंपनी उन दो कंपनियों में शामिल है जिन्होंने नवंबर के लिए ऑर्डर दिया है। उन्होंने कहा कि हमने अपनी जरूरत के मुताबिक तेल आयात का ऑर्डर दिया है।  

आईओसी और मैंगलोर रिफाइनरी ऐंड पेट्रोकेमिकल्स लि. (एमआरपीएल) ने मिलकर ईरान से कुल मिलाकर 12.5 लाख टन कच्चा तेल खरीदने का ऑर्डर दिया है। सिंह ने कहा कि ईरान तेल के लिए भुगतान के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। रुपये में भुगतान की व्यवस्था से भारत की डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सबसे बेहतर उपाय है।

साथ ही इससे भारतीय रुपये का मूल्य भी संभलेगा, जिसमें लगातार गिरावट आ रही है। डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने तेहरान के साथ परमाणु समझौता निरस्त कर दिया था और घोषणा की थी कि ईरान पर प्रतिबंध फिर से लागू होंगे। 4 नवंबर से लागू होने वाले प्रतिबंध का लक्ष्य कच्चे तेल का निर्यात है। पिछले 2 महीने से अमेरिका ने दुनिया भर की सरकारों व कंपनियों पर लगातार दबाव बनाया है, जिससे कि ईरान से निर्यात को रोका जा सके।  

इसी के कारण अमेरिका ने भारत के साथ मौजूदा कारोबार को भी निशाने पर लिया। वाणिज्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'भारत दौरे पर आए एक अमेरिकी अधिकारी ने सुझाव दिया था कि अमेरिका द्वारा एल्युमीनियम और स्टील के आयात पर लगाए गए शुल्क में छूट दी जा सकती है, बशर्ते भारत अपने पेट्रोलियम खरीद के तरीके में बदलाव को लेकर प्रतिबद्धता जताए।'

इसके पहले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार भी अमेरिका के नेतृत्व में लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की उपेक्षा की थी और ईरानी उत्पादकों को यूरो के इस्तेमाल से भुगतान करने का फैसला किया था। लेकिन इस बार भारत यूरोप की मुद्रा नहीं ले पा रहा है क्योंकि प्रमुख यूरोपीय देशों ने ट्रंप के प्रतिबंधों का समर्थन किया है। 

वहींं दूसरी ओर उद्योग जगत के वरिष्ठ लोगों ने कहा कि भारत कुछ उन देशों में बना हुआ है, जो वेनेजुएला को अमेरिकी डॉलर के माध्यम से भुगतान दे रहा है। बहरहाल सरकार का मानना है कि दक्षिण अमेरिकी देश इस समय आर्थिक संकट और बहुत ज्यादा महंगाई व खाद्य भंडारण के संकट से जूझ रहा है और वह अमेरिकी डॉलर से खरीद का महत्त्वपूर्ण स्रोत नहींं होगा।

राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'वेनेजुएला को बिटकॉइन से भुगतान के सुझाव आए, जिसे खारिज कर दिया गया क्योंकि हम ऑनलाइन मुद्रा से खरीद और बिक्री को व्यावहारिक नहीं पा रहे हैं, जिसके लिए कोई एकसमान कानून न हो।'  जहां तक रूस का प्रश्न है, भारत सोने और तेल के दो प्रमुख आयातों के लिए रुपये की व्यवस्था के अलावा लेन देन व्यवस्था का विकल्प भी अपना सकता है।  

इस साल की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतें उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं, जिसकी तुलना में अब वैश्विक दाम गिरे हैं क्योंकि निवेशकों ने ईरान की कम आपूर्ति के  बजाय सऊदी अरब जैसे प्रमुख निर्यातक सहित अन्य उत्पादकों पर ध्यान बढ़ा दिया है। 
Keyword: dharmendra pradhan, crude oil, price, iran, america, अमेरिका, भारत,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार के साथ मतभेद के कारण पटेल ने दिया इस्तीफा ?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.