बिजनेस स्टैंडर्ड - तेज चाल के बाद मारुति सुजूकी में फिसलन के आसार
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तेज चाल के बाद मारुति सुजूकी में फिसलन के आसार

अजय मोदी / नई दिल्ली 10 08, 2018

नतीजे की भविष्यवाणी

विश्लेषकों को जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी के मुनाफे में कमी की आशंका
मार्जिन पर भी रह सकता है दबाव

मारुति सुजूकी नौ तिमाही के बाद पहली बार मुनाफे में तिमाही गिरावट दर्ज कर सकती है
जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन कम बिक्री, बढ़ती लागत व छूट के चलते मार्जिन पर दबाव और मजबूत जापानी येन के चलते प्रभावित हो सकता है
प्रभुदास लीलाधर का मानना है कि जुलाई-सितंबर की तिमाही में कंपनी के मुनाफे में 18 फीसदी की गिरावट दर्ज हो सकती है जबकि राजस्व में दो फीसदी की मामूली बढ़ोतरी की संभावना है

बिजनेस स्टैंडर्ड तेज चाल के बाद मारुति सुजूकी में फिसलन के आसार देश की सबसे बड़ी कार निर्माता और सबसे ज्यादा लाभकारी वाहन कंपनी मारुति सुजूकी नौ तिमाही के बाद पहली बार मुनाफे में तिमाही गिरावट दर्ज कर सकती है। विश्लेषकों ने कहा, यह गिरावट दो अंकों में रह सकती है। जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन कम बिक्री, बढ़ती लागत व छूट के चलते मार्जिन पर दबाव और मजबूत जापानी येन के चलते प्रभावित हो सकता है। कंपनी इसी महीने अपने नतीजे की घोषणा करेगी।

कंपनी की बिक्री वित्त वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही में 1.5 फीसदी घटकर 4,84,848 वाहन रही। इसका मतलब यह है कि तिमाही के दौरान राजस्व में बढ़त की रफ्तार मामूली होगी, जिसे मिश्रित उत्पादों में सुधार से मदद मिली क्योंकि साल के दौरान कीमतों में कुछ बढ़ोतरी हुई। ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर का मानना है कि जुलाई-सितंबर की तिमाही में कंपनी के मुनाफे में 18 फीसदी की गिरावट दर्ज हो सकती है जबकि राजस्व में दो फीसदी की मामूली बढ़ोतरी की संभावना है।

ब्रोकरेज फर्म ने इस महीने एक रिपोर्ट में कहा, मारुति सुजूकी की बिक्री साल दर साल के हिसाब से 1.5 फीसदी कम है और तिमाही के दौरान दी गई भारी छूट के साथ कीमत में खास बढ़ोतरी नहीं हुई, ऐसे में साल दर साल के हिसाब से कंपनी के राजस्व की रफ्तार सुस्त रह सकती है। इसके अलावा जिंस की कीमतों में बढ़ोतरी और येन के प्रतिकूल चाल से पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले मार्जिन में 270 आधार अंकों की कमी दर्ज हो सकती है। संयोग से वित्त वर्ष 2018 की दूसरी तिमाही सुजूकी के स्वामित्व वाली कंपनी के लिए लाभ के लिहाज से सबसे अच्छी तिमाही रही थी। इसने इस अवधि में 24.84 अरब रुपये का रिकॉर्ड तिमाही मुनाफा दर्ज किया था। अब गिरावट इसी रिकॉर्ड मुनाफे के हिसाब से दर्ज होगा।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने वित्त वर्ष 2019 के लिए कंपनी के मुनाफे का अनुमान 11 फीसदी घटाकर 81 अरब रुपये कर दिया है, वहीं शेयर की लक्षित कीमत 9,664 रुपये से घटाकर 8,252 रुपये कर दी है। दिसंबर 2017 के मुकाबले शेयर की कीमत पहली ही 31 फीसदी से ज्यादा टूट चुकी है, जब यह 10,000 रुपये की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी।

ब्रोकरेज ने कहा कि जिंसों की कीमतें, ज्यादा छूट, येन में मजबूती, अन्य आय में गिरावट और तेल की बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखते हुए लक्षित कीमतों में कटौती की गई है। निवेशकों को शेयर खरीद की सलाह देते हुए ब्रोकरेज ने कहा, हमारा मानना है कि सभी नकारात्मक चीजें पहले ही समाहित हो चुकी हैं। येन में मजबूती का मतलब यह है कि मारुति सुजूकी को अपनी मूल कंपनी सुजूकी को रॉयल्टी के तौर पर ज्यादा रकम देनी होगी। इससे कार निर्माता के लिए कलपुर्जे का आयात महंगा हो जाएगा।

देसी यात्री वाहन बाजार (कार, वैन और यूटिलिटी वाहन) में मारुति सुजूकी की हिस्सेदारी 50 फीसदी है। कई मायने में इसकी बढ़त की रफ्तार देसी उद्योग की रफ्तार की बढ़त तय करती है। हालांकि इसकी देसी यात्री वाहन की बिक्री सितंबर में महज 0.7 फीसदी बढ़ी जबकि त्योहारी सीजन करीब है। अगस्त में कंपनी ने देसी बिक्री में तीन फीसदी की गिरावट दर्ज की थी और केरल में भारी बढ़ा व देश के अन्य इलाकों में भारी बारिश को प्रदर्शन पर असर की वजह बताया था। जुलाई में भी देसी बिक्री 0.60 फीसदी घट गई थी।

कंपनी के कई मॉडलों मसलन बलेनो, डिजायर और स्विफ्ट की प्रतीक्षा अवधि खत्म हो गई है और डीलरोंं ने भी बिक्री बढ़ाने के लिए इन वाहनों में से कुछ पर छूट की पेशकश शुरू कर दी है। मारुति सुजूकी का प्रदर्शन उन चुनौतियों को प्रतिबिंबित करता है जिसका सामना देसी कार विनिर्माता कर रहे हैं मसलन र्ईंधन की उच्च कीमत, बीमा का बढ़ता भार और ब्याज दरों में इजाफा। ये सारे घटनाक्रम एक साथ सामने आए और खरीदारों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया। दूसरी सबसे बड़ी कंपनी कोरिया की कार निर्माता हुंडई ने भी अगस्त व सितंबर में गिरावट दर्ज की है और जुलाई में इसकी बिक्री महज एक फीसदी बढ़ी, जिसका मतलब यह हुआ कि जुलाई-सितंबर की देसी बिक्री साल दर साल के हिसाब से कम है। टाटा मोटर्स को छोड़कर ज्यादातर अन्य कंपनियों ने हाल के महीने में बिक्री में गिरावट दर्ज की है। उद्योग को हालांकि उम्मीद है कि दशहरा व दीवाली जैसे त्योहार से मौजूदा तिमाही में रुख पलट सकता है।
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