बिजनेस स्टैंडर्ड - विदेशी बैंकों के लिए भारत घर से दूर एक घर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, December 11, 2018 05:58 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

विदेशी बैंकों के लिए भारत घर से दूर एक घर

रघु मोहन /  October 07, 2018

जब सिटीग्रुप के सीईओ (भारत) प्रमित जवेरी कहते हैं कि 'हमारा कारोबार पहले की तरह बहुत अच्छा चल रहा है' तो संभव है कि हम उन पर भरोसा न करें। उनके जैसे कुछ बैंकों का कारोबार बढ़ा है और किसी ने भी स्थानीय स्तर पर निगमित होने का विकल्प नहीं चुना है। हालांकि राष्ट्रीय बैंकों जैसी सेवाएं देने का वादा किया है। 

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ताजा उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2017 के अंत में 44 विदेशी बैंक थे, जिनकी 295 शाखाएं थीं, जो वर्ष 2016 में 46 विदेशी बैंक और 325 शाखाओं से कम हैं। यह गिरावट इस लिहाज से अधिक है कि बैंक शाखााओं के लाइसेंस बड़ी मुश्किल से मिलते हैं। वित्त वर्ष 2018 में विदेशी बैंकों का शुद्ध लाभ 103 अरब रुपये रहा, जो 12.7 फीसदी कम था। 

हालांकि उनका कुल कारोबार (अग्रिम एवं जमाएं) 7 फीसदी बढ़कर 7.72 लाख करोड़ रुपये रहा। फिर भी अगर आप लाभ और प्रतिफल अनुपात की तुलना करें तो पाएंगे कि विदेशी बैंक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और यहां तक कि निजी बैंकों से बेहतर स्थिति में हैं। इसकी वजह यह है कि विदेशी बैंक तुलनात्मक रूप से पूंजीगत संपत्तियां कम रखते हैं और फीस पर ज्यादा जोर देते हैं। इसलिए उनकी स्थानीय बैंकों से तुलना करना गलत होगा क्योंकि दोनों के कारोबार मॉडल अलग-अलग हैं। 

बदलाव के मोड़ पर 

जवेरी कहते हैं, 'हमारी सफलता हमेशा अपने चुने हुए ग्राहक वर्ग, प्लेटफॉर्म और नेटवर्क के हमारे क्रियान्वयन की गुणवत्ता पर आधारित होगी। हमारे पास भारत और शेष विश्व के बीच एक सेतु के रूप में काम करने का मौका है। यह सेतु कारोबार, निवेश और पूंजी आवक और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए कारगर है।'

कुछ विदेशी बैंक इसे खुले रूप से स्वीकार करेंगे, लेकिन अब देश में हो रहे बैंकिंग एकीकरण पर उनके मुख्यालयों की पूरी नजर है। कुछ इसे बड़ी हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए उपयुक्त मान रहे हैं। 

डॉयचे बैंक (भारत) के मुख्य कार्याधिकारी रवनीत गिल ने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय निपटान बैंक के मुताबिक वर्ष 2018 की पहली तिमाही में कुल ऋण के प्रतिशत के रूप में निजी गैर-वित्तीय क्षेत्र को ऋण 56 फीसदी दिया गया, जबकि उभरते बाजारों का औसत 128 फीसदी से अधिक रहा। एक अकेला आंकड़ा ही भारत में मौजूद ऋण के भारी अंतर को दर्शाता है।' बीते कुछ समय की नियामकीय अड़चनें चिंता का विषय हैं। 

नियामकीय अड़चनें 

विदेशी बैंकों को भारत में अपनी महत्त्वाकांक्षाओं में खुली छूट नहीं है क्योंकि ऐसा लगता है कि वे अपनी प्रतिबद्धताओं पर कायम नहीं रहते हैं। रिजर्व बैंक चाहता है कि उनकी राह का पहले से पता हो, ताकि वह उनके लिए लंबी अवधि का नजरिया अपना सके। ऐसे दो उदाहरण हैं, जिनमें विदेशी बैंकों ने स्थानीय स्तर पर अपना कारोबार मजबूूत किया है।

इनमें से एक स्टैंडर्ड चार्टर्ड के वर्ष 2000 में एएनजेड ग्रिंडलेज बैंक को खरीदना था, जो एक वैश्विक सौदा था। दूसरा उदाहरण आईएनजी बैंक के बेंगलूरु स्थित वैश्य बैंक का 2002 में अधिग्रहण था, जो एक भारत केंद्रित सौदा था। 

बैंक ऑफ अमेरिका ने वर्ष 1998 में अपना एशियाई खुदरा कारोबार एबीएन आमरो बैंक को बेच दिया। डच बैंक एबीएन आमरो ने 2007 में उम्मीद से हटकर काम किया। उस समय रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड (आरबीएस), सैंटानडेर ग्रुप और  फोर्टिस के एक बैंकिंग कंसोर्टियम ने इसे खरीद लिया। वर्ष 2015 में आरबीएस भारत से बाहर निकल गया। उसी साल एनबीएन आमरो ने कहा कि वह भारत में फिर से प्रवेश करना चाहता है। 

गिल इस मुद्दे को लेकर सतर्क हैं। उन्होंने कहा, 'हम भारत में करीब 40 साल से मौजूद हैं। करीब 2 अरब यूरो का यहां निवेश किया गया है, इसलिए हम अपनी घरेलू फ्रैंचाइजी की वृद्धि को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। हमने अपने स्थानीय कारोबार को बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्त्वाकांक्षी निवेश योजनाएं बनाई हैं और बैंक के वैश्विक नेतृत्व पूरी तरह हमारा समर्थन कर रहा है।'

हालांकि फिर भी इस तथ्य की अनदेखी नहीं की जा सकती कि डॉयचे बैंक ने वर्ष 2011 में अपना कार्ड कारोबार इंडसइंड बैंक को बेच दिया था। इसने अप्रैल, 2018 में अपने शेष खुदरा एवं निजी संपत्ति कारोबार को को बेचने की बातचीत रद्द की थी। 

विदेशी बैंकों की रणनीतिक सोच के बारे में सेंट्रम कैपिटल के चेयरमैन और स्टैंडर्ड चार्टर्ड एशिया के पूर्व सीईओ जसपाल सिंह बिंद्रा कहते हैं, 'बहुत से वैश्विक बैंकों के वैश्विक शुद्ध लाभ में भारतीय कारोबार का हिस्सा बहुत कम है। इन बैंकों का कारोबार किसी पोर्टफोलियो पर केंद्रित है। ये पूरी सेवाएं नहीं मुहैया कराते हैं।

अगर प्राथमिकताओं का पुनर्गठन किया जाता है तो इसमें भारत सहायक बन जाता है। यही कड़वा सच है।' ऐसा नहीं कहा जाता है, लेकिन भारत उनका एक छोटा अड्डा है। इसके विपरीत यह तर्क दिया जाता है कि विदेशी बैंकों के साथ नियामकीय भेदभाव किया जाता है और तर्क में कुछ दम भी है। 

जून, 2004 में एचएसबीसी के भारत में प्रमुख नियल बुकर ने ऐक्सिस बैंक (यूटीआई) बैंक में 14.62 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए निजी इक्विटी फंड एक्टिस को 6.76 करोड़ डॉलर का भुगतान किया। एचएसबीसी इस हिस्सेदारी को आगे बढ़ाकर 20 फीसदी करना चाहता था। लेकिन उस समय रिजर्व बैंक के गवर्नर वाई वी रेड्डी ने एचएसबीसी को यह हिस्सेदारी एक साल में बेचने का निर्देश दिया। 

लेकिन दो साल पहले जब बिमल जालान आरबीआई के गवर्नर थे, तब एवाल्ड किस्ट (डट हॉकी ओलंपिक विजेता) ने आईएनजी बैरिंग्स के चेयरमैन के रूप में तगड़ी सफलता हासिल की। उन्होंने ब्रुसेल्स लैंबर्ट बैंक (समूह की कंपनी से कम नहीं) को वैश्य बैंक में 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने में मदद दी, जिसने यह हिस्सेदारी 2015 तक बनाए रखी। उस समय उसने यह हिस्सेदारी कोटक महिंद्रा बैंक को बेच दी।  

विदेेशी बैंकों के लिए एक अन्य सिरदर्दी स्थानीय प्रबंधन हैं। उन्हें अपने घरेलू देशों के जोखिम प्रबंधन और स्थानीय नियामक के समावेश को बढ़ावा देने के बीेच संतुलन साधना होता है। भारत में वितरण मॉडलों यानी शाखाओं को लेकर बहुत कम लचीलापन है। निस्संदेह डिजिटल बैंकिंग के अमल में आने से इसमें बदलाव आ रहा है। 

स्टैंडर्ड चार्टर्ड की भारत में सीईओ जरिन दारुवाला ने कहा, 'हां, हमारे लिए दोहरे नियामक होते हैं, लेकिन हम प्राथमिक क्षेत्र को ऋण सहित अन्य मामलों में स्थानीय नियामकों की अनुपालना पर ज्यादा ध्यान देते हैं।' प्राथमिक क्षेत्र को ऋण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक के पास एक अलग टीम है। बैंक का प्राथमिक क्षेत्र को ऋण का पोर्टफोलियो नियामक द्वारा तय न्यूनतम सीमा से 22 फीसदी अधिक है।

विदेशी बैंकों के बहुत कम अधिकारी यह बताएंगे कि यहां कारोबार करना संतुलन का एक बड़ा मुश्किल काम है। जवेरी का यह कहना सही है कि विदेशी बैंक, कम से कम कुछ बैंक पहले की तरह अच्छा कारोबार कर रहे हैं और वह मुकाम वह हासिल करना चाहेंगे। 

Keyword: City, RBI, Foreign Bank, PSB, fee, Local bank,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार के साथ मतभेद के कारण पटेल ने दिया इस्तीफा ?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.