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कर्ज मुक्त कंपनियां कर रहीं बेहतर प्रदर्शन

समीर मुलगांवकर और सचिन मामबटा /  October 07, 2018

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी 50 सूचकांक में शामिल कंपनियों के प्रतिफल का एक विश्लेषण दर्शाता है कि जो कंपनियां अपनी वृद्धि के लिए धन अपने आंतरिक कोष से जुटाने में सक्षम हैं, वे कर्ज पर निर्भर कंपनियों की तुलना में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। 

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने इन कंपनियों को उनकी नकदी आवक, कर्ज के स्तर और ऋण के बजाय आंतरिक कोष से वित्त पोषित संपत्तियों के अनुपात के आधार पर शॉर्ट लिस्ट किया है। यह विश्लेषण दर्शाता है कि इन कारकों के आधार पर जो कंपनियां मजबूत हैं, उन्होंने निफ्टी 50 सूचकांक से भी बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि यह सूचकांक नई ऊंचाइयों पर है। इस विश्लेषण में वित्त कंपनियों को शामिल नहीं किया गया है। 

विश्लेषण में 2013 की शुरुआत से अब तक के प्रतिफल की पड़ताल की गई है। जो कंपनियां अपने खुद के संसाधनों पर निर्भर रही हैं, उन्होंने आलोच्य अवधि में 30 फीसदी अधिक प्रतिफल दिया है। विश्लेषण में आलोच्य अवधि के दौरान दोनों तरह की कंपनियों के निवेशकों की संपत्ति में बदलाव का आकलन किया गया है। 

इन कंपनियों का बेहतर प्रदर्शन, विशेष रूप से अप्रैल, 2018 में शुरू हुए वित्त वर्ष में प्रारंभ हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस साल पहले ही दो बार दरों में इजाफा कर चुका है। जून और अगस्त में बढ़ोतरी के जरिये कुल 50 आधार अंक की बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही हाल में ऋण के जरिये पूंजी जुटाना भी मुश्किल हुआ है।

बाजार के कमजोर रुझान के कारण कई बॉन्ड निर्गम नहीं लाए गए हैं। ऋणदाता कंपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज के अपना कर्ज चुकाने में डिफॉल्ट करने से बाजार में रुझान कमजोर हुआ है। जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के कार्यकारी निदेशक सतीश मेनन ने हाल में ब्याज दरों में बढ़ोतरी को मद्देनजर रखते हुए कहा कि कर्ज मिलने की कड़ी होती शर्तों के समय बिना कर्ज वाली कंपनियां बेहतर स्थिति में हैं। 

उन्होंने कहा, 'जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो इसका लाभ पर असर पड़ता है। बिना कर्ज वाली कंपनियां इसलिए बेहतर स्थिति में होती हैं क्योंकि इसका उनके लाभ पर असर नहीं पड़ता है।' आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के मुख्य निवेश अधिकारी पीयूष गर्ग ने कहा कि कम कर्ज हमेशा ही फायदेमंद नहीं होता है, लेकिन वर्तमान जैसे कुछ चक्रों में यह बेहतर प्रदर्शन में मददगार बनता है।

यह विशेष रूप से उन कंपनियों के मामले में सही है, जिन्हें शेयर बाजार में भी पूंजी जुटाने की जरूरत नहीं है। शेयर बाजार में भी पूंजी नहीं जुटाने का मतलब है कि वर्तमान शेयरधारकों की इक्विटी कम नहीं होगी। 

उन्होंने कहा, 'आम तौर पर अच्छे कारोबारी मॉडल और शानदार वृद्धि वाली जिन कंपनियों को शेयर बाजार से पूंजी जुटाने की जरूरत नहीं होती, उनके बेहतर प्रदर्शन करने के आसार होते हैं।' दरों में बढ़ोतरी और आईएलऐंडएफएस समूह के मसलों के कारण स्थानीय बाजार में पूंजी मिलना मुश्किल हो गया है। लेकिन इसके साथ ही वैश्विक बाजारों से भी धन जुटाना महंगा हो गया है। 

फिच रेटिंग्स और उसकी भारतीय इकाई इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के 28 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने हाल में ब्याज दरों में बढ़़ोतरी की है और यह आगे भी जारी रहेगी। इससे दुनियाभर में पूंजी उपलब्धता कम होगी। एजेंसी ने कहा कि घरेलू स्तर पर भी पूंजी की उपलब्धता में कमी आने के आसार हैं। हाल में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। कमजोर रुपये से कंपिनयों के लिए विदेशी से उधार लेना और महंगा हो जाता है। 

एवेंडस कैपिटल अल्टरनेटिव स्ट्रेटजीज के सह-मुख्य कार्याधिकारी वैभव सांघïवी ने कहा, 'ऐसे समय जब दुनियाभर में अनिश्चितता है और घरेलू स्तर पर ब्याज दरें बढ़ रही हैं, तब बाजार उन कंपनियों को तरजीह देता है, जहां आमदनी के आसार नजर आते हैं।

अपना पोर्टफोलियो चुनने में अच्छी नकदी आवक वाली कंपनियों पर जोर दिया जा रहा है।' इस बीच सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया के नोट में कहा गया है कि घरेलू स्तर पर कर्ज की लागत बढऩे के आसार हैं। इसका मतलब है कि कर्ज के कम बोझ वाली कंपनियां आगे भी बेहतर प्रदर्शन करती रहेंगी। विश्लेषक सुरेंद्र गोयल और विजित जैन की 25 सितंबर की इंडिया स्ट्रेटजी रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ खंडों में ऊंचे मूल्य और कम वृद्धि के जोखिमों के चलते उतार-चढ़ाव अधिक रहने के आसार हैं। 

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