बिजनेस स्टैंडर्ड - सब्सिडी जोखिम के बाद भी मजबूत ओएनजीसी
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सब्सिडी जोखिम के बाद भी मजबूत ओएनजीसी

उज्ज्वल जौहरी /  October 07, 2018

भारत की सबसे बड़ी गैस उत्पादक ओएनजीसी सरकार द्वारा 1 अक्टूबर से प्राकृतिक गैस कीमतों में वृद्घि की प्रमुख लाभार्थी होगी। प्राकृतिक गैस की कीमत 3.36 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) तय की गई है और साथ ही गैस उत्पादन बढऩे से भी राजस्व में सुधार आएगा।

ओएनजीसी तेल अन्वेषण कंपनी है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में वृद्घि से उसे अधिक शुद्घ प्राप्तियों में मदद मिलती है, जबकि रुपये में गिरावट से उसकी सहायक इकाई ओवीएल (ओएनजीसी विदेश) को अपने वैश्विक कच्चे तेल उत्पादन से ज्यादा राजस्व कमाने में मदद मिल रही है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्घि सब्सिडी विभाजन का जोखिम बढ़ा सकती है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि जोखिम स्तर सस्ते मूल्यांकन को देखते हुए अनुकूल है।

सरकार अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों (अमेरिका, कनाडा और रूस में लागू) के आकलन के फॉर्मूले के आधार पर हर 6 महीने में घरेलू गैस कीमतों की समीक्षा करती है। चूंकि इन बाजारों में हाजिर कीमतें पिछले एक साल के दौरान तेजी से बढ़ी हैं और इसके प्रभाव को देखते हुए विश्लेषक पहले से ही 10-15 प्रतिशत कीमत वृद्घि की उम्मीद कर रहे थे।

चालू वित्त वर्ष में यह दूसरी कीमत वृद्घि है। सरकार ने अप्रैल-सितंबर के लिए गैस कीमतें 6 प्रतिशत तक बढ़ाकर 3.06 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू कीं। इससे ओएनजीसी को अपनी गैस प्राप्तियां जून तिमाही के दौरान एक साल पहले की तिमाही की तुलना में 19 प्रतिशत तक बढ़ाकर 3.1 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू करने में मदद मिली। इस प्रकार, कंपनी की गैस प्राप्तियों में वित्त वर्ष 2019 की दूसरी छमाही में और सुधार आएगा जिससे आय भी मजबूत होगी।

कंपनी का गैस उत्पादन जून तिमाही में लगभग तीन प्रतिशत तक बढ़ा। एडलवाइस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि गैस उत्पादन वित्त वर्ष 2018-22 के दौरान बढ़कर सालाना 7 प्रतिशत हो जाएगा, क्योंकि ओएनजीसी की 800 अरब रुपये की परियोजनाएं पूरी हो गई हैं।

इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में वृद्घि ओएनजीसी के लिए सकारात्मक है। कंपनी तेल के लिए अपनी शुद्घ प्राप्ति 74.2 डॉलर प्रति बैरल पर पहले ही दर्ज कर चुकी है जो जून तिमाही में सालाना आधार पर 46 प्रतिशत की वृद्घि है। आईआईएफएल के विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 1 डॉलर की वृद्घि से ओएनजीसी के लिए 10 अरब रुपये का फायदा होगा। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्घि से सब्सिडी विभाजन का जोखिम भी बढ़ रहा है। 

 

हालांकि एचडीएफसी सिक्योरिटीज के नीलेश घुगे का कहना है कि कच्चे तेल की 80 डॉलर प्रति बीबीएल तक की कीमत तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल/डीजल कीमतें बढ़ाने में आसानी से सक्षम बना सकती है, हालांकि अपस्ट्रीम कंपनियों को सब्सिडी का एक हिस्सा सरकार के साथ साझा करने की भी जरूरत पड़ सकती है।

यदि कच्चे तेल की हाजिर कीमतें बरकरार रहती हैं और दूसरी छमाही में रुपये की मौजूदा स्थिति कायम रहती है तो वित्त वर्ष 2019 में एलपीजी और केरोसिन पर अंडर-रिकवरी सालाना आधार पर लगभग 124 प्रतिशत तक बढ़कर 574 अरब रुपये हो जाएगी।  सीएलएसए ने ओएनजीसी के लिए रिस्क-रिवार्ड अनुकूल करार दिया है। 

Keyword: ONGC, MMBTU, Revenue, Crude Oil, Subsidy, America, Canada, Russia, Company, Gas,
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