बिजनेस स्टैंडर्ड - तेल कंपनियों की आय पर पड़ सकता है दबाव
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तेल कंपनियों की आय पर पड़ सकता है दबाव

उज्ज्वल जौहरी /  10 07, 2018

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनियों में निवेशक धारणा कमजोर हुई है, क्योंकि ब्रोकरों ने इन शेयरों की रेटिंग घटाई है और रुपये को लेकर आरबीआई के रुख से भी रुपया और कमजोर हुआ।

सरकार की घोषणा के बाद गुरुवार को लगभग 10-12 प्रतिशत की गिरावट के बाद एचपीसीएल, बीपीसीएल, आईओसीएल में शुक्रवार को भी कमजोरी बनी रही और इन शेयरों को 16 से 25 फीसदी के बीच गिरावट का सामना करना पड़ा। अधिक अनुपात में सब्सिडी विभाजन की चिंताओं से ओएनजीसी और गेल में 10 से 16 फीसदी के बीच गिरावट आई।

बाजार चिंतित है क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का बोझ तेल कंपनियों पर डाले जाने के गुरुवार का निर्णय पेट्रोल और डीजल के लिए मुक्त मूल्य निर्धारण व्यवस्था पर सरकार के रुख के विपरीत था। इस वजह से बाजार मान रहा है कि सरकार इसे देखते हुए फिर से हस्तक्षेप कर सही है कि अगले एक वर्ष का समय राज्य के साथ साथ राष्ट्रीय चुनावी गतिविधियों वाला है। रुपये में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के साथ सरकार के कदम ने तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के मुनाफे को लेकर अनिश्चितता पैदा की है।

कमजोर पड़ते विपणन मार्जिन से जुड़ी चिंताएं नई नहीं हैं। पिछले साल के अंत में ओएमसी को कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी के बावजूद राज्य चुनावों से पहले हल्की दर वृद्घि का मौका मिला था। शेयरखान के अभिजीत बोरा जैसे विश्लेषकों का मानना है कि सरकार 2018-2019 में कई राज्यों में चुनाव और मई 2019 में प्रस्तावित राष्टï्रीय चुनाव को देखते हुए वाहन ईंधन कीमतों को आंशिक रूप से नियंत्रित करने का सिलसिला बरकरार रख सकती है। 

मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने ओएमसी के लिए अपने वित्त वर्ष 2020 के आय अनुमानों को 24-48 प्रतिशत तक संशोधित कर दिया। अपनी बिक्री का बड़ा हिस्सा ईंधन रिटेलिंग से प्राप्त करने वाली एचपीसीएल अधिक प्रभावित हुई है जबकि विभिन्न व्यवसायों (रिफाइनिंग, पेट्रो रसायन, पाइपलाइन) से राजस्व प्राप्त करने वाली आईओसी पर कम दबाव दिखा है। 

कच्चे तेल में तेजी और रुपये में गिरावट को देखते हुए ओएमसी को कई और कीमत वृद्घि की जरूरत होगी और इसकी मात्रा पर नजर रखे जाने की जरूरत होगी। सरकार के ताजा कदम के बाद ऐम्बिट के विश्लेषकों का मानना है कि 1.3 रुपये प्रति लीटर के परिचालन खर्च को देखते हुए ओएमसी को पेट्रोल पर नुकसान और डीजल पर काफी कम मुनाफा होगा।

इसलिए, यदि सरकार द्वारा आगे भी हस्तक्षेप किया जाता है और ओएमसी कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डालने में विफल रहती हैं तो इससे उनके विपणन मार्जिन और मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का अनुमान है कि कच्चे तेल की मौजूदा कीमतों और रुपये के मूल्य को ध्यान में रखते हुए ओएमसी को 3-4 रुपये प्रति लीटर तक की कीमत वृद्घि करने की जरूरत होगी।

तेल पीएसयू के लिए आय अनिश्चितता बढ़ सकती है, क्योंकि सरकार ने वित्तीय अनुशासन के लिए ईंधन कीमतों को नियंत्रित बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है। हालांकि ओएमसी ने संकेत दिया है कि सरकार का कदम अस्थायी है। एचपीसीएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एम के सुराणा ने एक निवेशक सम्मेलन के दौरान कहा कि सरकारी नीति में कोई स्थायी बदलाव नहीं आया है और मौजूदा पहल उपभोक्ता कीमतों को शांत करने के लिए सिर्फ एक अल्पावधि हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि दैनिक मूल्य निर्धारण की व्यवस्था बरकरार रहेगी।

एचपीसीएल विपणन मार्जिन में 1 रुपये प्रति लीटर के प्रभाव की भरपाई के लिए अन्य उपायों का सहारा लेगी। हालांकि शुक्रवार को न सिर्फ डाउनस्ट्रीम कंपनियों बल्कि ओएनजीसी, ऑयल इंडिया और गेल जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। सरकार द्वारा ओएमसी के विपणन मार्जिन को सीमित किए जाने के बाद अब सब्सिडी विभाजन को लेकर गतिरोध प्रमुख चिंता है।

ओएनजीसी कच्चे तेल की ऊंची कीमतों पर बेहतर शुद्घ प्राप्तियां हासिल करती है और कच्चे तेल की कीमत में प्रत्येक 1 डॉलर प्रति बैरल की वृद्घि से ओएनजीसी के लिए 10 अरब रुपये का लाभ होता है। कंपनी की शुद्घ प्राप्तियां 74.2 डॉलर प्रति बैरल पर जून तिमाही में सालाना आधार पर 46 प्रतिशत बढ़ीं। हालांकि इनमें गिरावट भी सब्सिडी बोझ के अनुपात में आएगी। इसके अलावा एचपीसीएल (जिसमें ओएनजीसी की बड़ी हिस्सेदारी है) द्वारा कम आय दर्ज करने का मतलब है कि ओएनजीसी की समेकित आय पहले ही प्रभावित हो चुकी है और उसे एचपीसीएल से लाभांश भुगतान भी कम मिलेगा।

ऐंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के विश्लेषकों का कहना है कि यदि सरकार अपस्ट्रीम कंपनियों से सब्सिडी बोझ वहन करने को नहीं करती है तो मौजूदा शुल्क कटौती की वजह से राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए अपस्ट्रीम से ऊंचे लाभांश पर विचार किया जा सकता है। 

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