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छूट तो मजेदार, लेकिन जायदाद खरीदने से पहले करें थोड़ा विचार

तिनेश भसीन और संजय कुमार सिंह /  October 07, 2018

त्योहारों के दिन नजदीक आ रहे हैं और रियल्टी पर इसका असर दिखने भी लगा है। डेवलपरों ने आवासीय संपत्तियों पर छूट और मुफ्त उपहार के जरिये ग्राहकों को लुभाने के लिए अखबारों के पन्ने रंगने शुरू कर दिए हैं। सबसे आम छूट वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में है, जो कमोबेश हरेक डेवलपर दे रहा है।

रियल्टी पर जीएसटी की दर 12 फीसदी है, जिसे डेवलपर खत्म कर रहे हैं। अगर आप 50 लाख रुपये की संपत्ति खरीदने जा रहे हैं तो आपके लिए यह सीधे 6 लाख रुपये की बचत का तोहफा होगा। जीएसटी ही नहीं कई डेवलपर तो स्टांप शुल्क और निबंधन यानी रजिस्ट्री का शुल्क भी खुद उठाने को तैयार हैं। इन दोनों पर होने वाला खर्च आम तौर पर संपत्ति की कीमत का 5 से 7 फीसदी बैठता है। इसके अलावा आसान भुगतान की योजना, सोने के सिक्के, मॉड्यूलर किचन और एयर कंडीशनर जैसे उपहार तो हैं ही।

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले साल भी ऐसी ही छूट मिल रही थीं, लेकिन इस बार छूट बहुत ज्यादा दी जा रही हैं। कॉलियर्स इंटरनैशनल इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक (मुंबई एवं डेवलपर सर्विसेज) रवि आहूजा ने कहा, 'अगर आप खुद रहने के लिए मकान तलाश रहे हैं तो उसे खरीदने के लिए यह वाकई अच्छा समय है। लेकिन अगर आपका इरादा आवासीय संपत्ति में निवेश भर का है तो कुछ और वक्त इंतजार कीजिए। छूट और तोहफों की पेशकश के बाद भी इस समय इंतजार करना ही अच्छा है।'

निवेशकों के लिए यह बाजार अब भी अनिश्चितता भरा है। अभी तस्वीर साफ नहीं है कि कीमतें इसी स्तर पर बनी रहेंगी या कुछ अरसे में ही बढऩा शुरू कर देंगी। विशेषज्ञों की राय है कि निवेशकों को चुनाव निपटने के बाद और अर्थव्यवस्था में ज्यादा स्थिरता आने के बाद ही रियल एस्टेट पर नजर डालनी चाहिए।

सुधार के आसार नहीं

रियल एस्टेट की बिक्री में सुधार शुरू होने और कीमतों में तेजी का रुख साफ होने के बाद ही निवेशकों को रियल एस्टेट में पैसे लगाने के बारे में विचार करना चाहिए। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि बिक्री पिछले साल से बेहतर है, जो इस क्षेत्र में सुधार का संकेत है। लेकिन प्रॉपर्टी सलाहकारों का कहना है कि ये आंकड़े तुलनात्मक हैं। ये पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले बेहतर नजर आ रहे हैं, लेकिन ये तीन साल पहले के मुकाबले कहीं नजदीक भी नहीं ठहरते हैं। बिके मकानों की संख्या पिछले साल से अधिक हो सकती है, लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। आवासीय बाजार में दांव तभी लगाएं, जब लगातार दो तिमाहियों में कीमतें बढ़ें। 

प्रॉपर्टी सलाहकार निकट भविष्य में कीमतों में बहुत अधिक बढ़ोतरी नहीं होने के आसार जता रहे हैं। प्रॉपटाइगर डॉट कॉम के मुख्य निवेश अधिकारी अंकुर धवन ने कहा, 'इसकी वजह यह है कि रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) अधिनियम या रेरा के स्थिर हो जाने पर आपूर्ति में इजाफा होगा। मेरा मानना है कि बहुत से डेवलपरों के पास परियोजनाएं शुरू करने के लिए जमीन उपलब्ध है। इसके अलावा किफायती आवास खंड में बहुत सी मांग प्रधानमंत्री आवास योजना से पूरी हो रही है।'

निवेश में नुकसान के आसार 

प्रॉपर्टी सलाहकारों का मानना है कि लेनदेन की संख्या बढऩे के बावजूद कीमतों में तिमाही दर तिमाही बढ़ोतरी की स्थिति आने में कम से कम दो साल लग सकते हैं। माना कि आप किसी घर खरीदने पर 1 करोड़ रुपये निवेश करते हैं और पहले साल कीमतें उसी स्तर पर रहती हैं या महज 2 से 3 फीसदी बढ़ती हैं तो आपका महंगाई समायोजित प्रतिफल ऋणात्मक होगा। उस एक साल में आप घर में निवेश के बजाय कम ब्याज वाली बैंक सावधि जमा में निवेश करने पर भी बेहतर स्थिति में रहेंगे।

पिछले 3-4 वर्षों के दौरान कीमतों में ऋणात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान बाजार में प्रवेश करने वाले निवेेशकों को भी अपने निवेश पर ऋणात्मक प्रतिफल मिला होगा। इस समय जो छूट दी जा रही हैं, वे निकट भविष्य में तब तक बनी रहेगी, जब तक बिक्री नहीं बढ़ती है और डेवलपर कीमतों में बढ़ोतरी की स्थिति में नहीं आते हैं यानी छूट का फायदा लेने से आगे धनात्मक प्रतिफल नहीं मिलेगा। 

कम प्रतिफल, लंबी अवधि 

अब रियल एस्टेट लंबी अवधि का निवेश बन गया है। एनरॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, 'जिन निवेशकों के पास पर्याप्त धैर्य है और वे कम से कम 5-6 साल के लिए निवेश करना चाहते हैं तो वे बाजार में प्रवेश कर सकते हैं, बशर्ते कि उन्होंने अपना डेवलपर, परियोजना और जगह ठीक से चुनी है।'

पुरी कहते हैं कि कमजोर बिक्री के माहौल में किराये से तब तक अच्छा प्रतिफल मिल सकता है, जब तक संपत्ति की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू नहीं हो जाती। इस समय भारत में किराया प्रतिफल 2.5 से 3 फीसदी है। पुरी कहते हैं कि इन सब नकारात्मक कारकों के होते हुए भी अगर कोई निवेशक प्रॉपर्टी की तलाश में है तो उसे उन शहरों और इन शहरों की भी उन जगहों पर ध्यान देना चाहिए, जहां रोजगार सृजन के बहुत मौके हैं। इन जगहों पर आवासीय मांग अच्छी होनी चाहिए। किफायती घर खरीदने के बारे में विचार करना चाहिए, जिनकी इन दिनों ज्यादा मांग है। 

आसान भुगतान रहेगा कारगर 

वर्तमान माहौल में कुछ भी आवासीय संपत्ति में निवेश के अनुकूल नहीं है। लेकिन अगर कोई निवेशक ऋण लिए बिना संपत्ति खरीद रहा है तो उसके लिए आसान भुगतान योजना कारगर साबित हो सकती है। ऐसी योजनाओं में खरीदार को संपत्ति की कीमत का 5 से 10 फीसदी भुगतान करना पड़ता है और शेष भुगतान मकान की सुपुर्दगी पर करना होता है। लेकिन ऐसी परियोजनाओं से आप पर परियोजना में देरी का जोखिम आ जाता है। इसलिए निवेशक को ऐसा डेवलपर चुनना चाहिए, जो अच्छा रिकॉर्ड रखता हो। ऐसे मामलों में छूट फायदेमंद साबित हो सकती है। 

कुशमैन ऐंड वेकफील्ड के भारत में प्रमुख और प्रबंध निदेशक अंशुल जैन ने कहा, 'हमारा अनुमान है कि वर्तमान परियोजनाओं के तहत ही नए संपत्तियां बनेंगी, जिनमें नए टावर या यूनिट बन सकती हैं।' अगर कोई प्रतिष्ठित डेवलपर वर्तमान परियोजना में कोई अतिरिक्त इमारत बनाता है और इसके लिए आसान भुगतान की पेशकश करता है तो इस विकल्प पर विचार किया जा सकता है। 

लेकिन छूट पहली वरीयता नहीं होनी चाहिए। सबसे पहले यह देखें कि आप जिस परियोजना के बारे में विचार कर रहे हैं, उसकी कीमतों में लंबी अवधि में बढ़ोतरी होगी। अगर कोई निवेशक मुफ्त उपहारों की पेशकश कर रहा है तो निवेेशक के लिए उस उपहार की जगह नकद छूट हासिल करना ज्यादा बेहतर रहेगा। 

सलाहकारों के मुताबिक रुपये में गिरावट के बाद बहुत से प्रवासी भारतीय (एनआरआई) भी प्रॉपर्टी बाजार में निवेश के अवसर तलाश रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एनआरआई के लिए भी कुछ समय, कम से कम चुनाव पूरे होने तक इंतजार करना ज्यादा बेहतर हो सकता है। 

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