बिजनेस स्टैंडर्ड - दवाओं के हरित मानक व जीएसटी में मिले छूट
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दवाओं के हरित मानक व जीएसटी में मिले छूट

अनीश फडणीस / मुंबई 10 07, 2018

पर्यावरण संबंधी मंजूरी लेने में लगता है वक्त

बिजनेस स्टैंडर्ड दवाओं के हरित मानक व जीएसटी में मिले छूटनिर्यात में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए दवा कंपनियों ने कठोर पर्यावरण मानक खत्म करने और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लाभ दिए जाने की मांग की है। औषधि निर्यात संवर्धन परिषद के मुताबिक वित्त वर्ष 2018 में घरेलू कंपनियों ने 17.2 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात किया है। वित्त वर्ष 19 के अप्रैल जुलाई अवधि के दौरान कंपनियों ने 5.9 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात किया और इस दौरान निर्यात में 13.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 

दवा विनिर्माताओं का कहना है कि मानकों में ढील देने से उन्हें अमेरिका चीन कारोबारी युद्ध का लाभ उठाने में मदद मिलेगी और वे एशिया व अफ्रीका के नए बाजारों में बाजार तलाश सकेंगे और कुछ उत्पादों की कमी की स्थिति में प्रभावी तरीके से प्रतिक्रिया दे सकेंगे। 

मौजूदा मानकों के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मंजूरी देते समय अनुमति प्राप्त प्रदूषण सीमा तय करता है।इंडियन फार्मास्यूटिकल एलायंस के महासचिव डीजी शाह के मुताबिक इस नीति के परिणामस्वरूप प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दवाओं के विभिन्न सक्रिय तत्वों में उत्पाद के मिक्स व उसके उत्पादन की मात्रा के बारे में फैसला करता है। उन्होंने कहा, 'यह लाइसेंस राज की तरह ही है।'

आईपीए ने प्रस्ताव किया है कि किसी विनिर्माता को तय किए गए 'प्रदूषण भार' के भीतर किसी भी उत्पाद की कितनी भी मात्रा के उत्पादन की अनुमति मिलनी चाहिए। शाह ने वाणिज्य मंत्रालय को पिछले सप्ताह लिखे पत्र में कहा है, 'प्रस्तावित बदलाव होने से कंपनियों को अपने उत्पाद की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलेगी और वे अनुमति की सीमा के भीतर उत्पादन कर सकेंगे। इस तरह से कंपनी उन दवाओं का उत्पादन रोक सकती है, जिसकी मांग नहीं है या नई दवाओं का उत्पादन कर सकेगी और इसके लिए पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।' 

इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपनाथ रॉय चौधरी ने कहा, 'पर्यावरण संबंधी मंजूरी लेने में वक्त लगता है। इससे उत्पादन की क्षमता  और अवसर का लाभ उठाने व आपात कालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता सीमित होती है।' 

आईपीए ने निर्यात पर जीएसटी में छूट दिए जाने की भी मांग की है। साथ ही निर्यात आधारित इकाइयों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों व मशीनरी पर भी ब्याज संबंधी छूट दिए जाने की मांग की है। 

शाह ने कहा, 'मौजूदा प्रक्रिया में विनिर्माताओं को निर्यात किए जाने वाले सामान पर जीएसटी का भुगतान करना होता है और उसके रिफंड का दावा करना होता है। इसकी वजह से निर्यातकों पर अनावश्यक बोझ पड़ता है और इसके लिए अतिरिक्त कार्यशील पूंजी जुटानी पड़ती है।'  
Keyword: Export, Competition, Medicine Company, Environment, Standard, GST, Goods and Service Tax, Domestic Company, Dollar, US, China,
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