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मछली निर्यात में आएगी तीव्र उछाल

निर्माल्य बेहड़ा / भुवनेश्वर October 07, 2018

एशियाई देशों से बड़े स्तर पर मछली निर्यात किए जाने के कारण 2030 तक भारत के मछली निर्यात में 61.2 प्रतिशत तक इजाफा होने की उम्मीद है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन की रिपोर्ट - द स्टेट ऑफ वल्र्ड फिशरीज ऐंड एक्वाकल्चर के अनुसार 2016 में दर्ज 10.7 लाख टन की तुलना में भारत का मछली निर्यात बढ़कर 17.2 लाख तक पहुंच जाएगा। 

वैश्विक रूप में 2030 तक मछली निर्यात में 24 प्रतिशत का विस्तार होगा। इस मामले में भारत एशियाई महाद्वीप में अन्य देशों से आगे रहेगा। उसके बाद इंडोनेशिया (57.6 प्रतिशत), वियतनाम (42 प्रतिशत), जापान (40 प्रतिशत) और थाईलैंड (24.8 प्रतिशत) का स्थान रहेगा। चीन का मछली उत्पादन 22.9 प्रतिशत बढ़कर 94 लाख टन तक पहुंच जाएगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मछली और मत्स्य उत्पादों के कारोबार में तेजी जारी रहेगी। अनुमान लगाया गया है कि 2030 में कुल मत्स्य उत्पादन का लगभग 31 प्रतिशत (अगर यूरोपीय संघ के व्यापार को भी शामिल कर लिया जाए तो 38 प्रतिशत) निर्यात किया जाएगा।

यह निर्यात मानव उपभोग या गैर-खाद्य उद्देश्य से विभिन्न उत्पादों के रूप में होगा। मात्रा के हिसाब से मानव उपभोग के लिए मछली का वैश्विक व्यापार इस अवधि में 24 प्रतिशत तक बढऩे की उम्मीद है और यह 2030 में बढ़कर 4.8 करोड़ टन से अधिक (अगर इसमें यूरोपीय संघ के व्यापार को भी शामिल कर लिया जाता है तो 6.06 करोड़ टन) तक पहुंच जाएगा।

इस निर्यात वृद्धि में 2030 तक एशियाई क्षेत्र का योगदान लगभग 51 प्रतिशत होगा। 2030 में मानव उपभोग के लिए मछली के कुल व्यापार में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। 20 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ चीन मानव उपभोग के लिए प्रमुख मछली निर्यातक बना रहेगा। 
Keyword: Asian, Country, United Nation, UN, Fishery, Fish Export, Indonesia, Japan, Thailand,
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