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इक्विटी पर दबाव डाल रहा बॉन्ड प्रतिफल

कृष्ण कांत / मुंबई October 05, 2018

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और भारत में पिछले 12 महीनों के दौरान 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड के प्रतिफल में लगातार तेजी से भारतीय इक्विटी में गिरावट अनिवार्य हो गई है। अपने मौजूदा स्तर पर सेंसेक्स कंपनियों ने औसत तौर पर 4.3 प्रतिशत का प्रतिफल दिया है जो 10 वर्षीय अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर चालू प्रतिफल से महज 110 आधार अंक अधिक है। यह सरकारी बॉन्ड दुनिया का सबसे लोकप्रिय और तरलीकृत जोखिम-मुक्त परिसंपत्ति वर्ग है। यह प्रतिफल अंतर आठ वर्षों में सबसे कम है और 212 आधार अंक के 20 वर्षीय औसत अंतर का लगभग आधा है।
 
विश्लेषकों का कहना है कि इससे भारतीय इक्विटी विदेशी निवेशकों के लिए वित्तीय रूप से आकर्षक नहीं रह गई हैं और इस वजह से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा बिकवाली को बढ़ावा मिल रहा है। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा, 'बाजार में ताजा गिरावट आश्चर्यजनक नहीं है, क्योंकि पी/ई मल्टीपल और प्रमुख सूचकांक में जोखिम-मुक्त प्रतिफल (बॉन्ड) का अंतर  अब वर्ष 2000 के डॉटकॉम बुलबुले जैसे हालात के दौरान दर्ज स्तरों के आसपास है।'
 
एफपीआई ने वर्ष 2018 में 2.2 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय शेयर बेचे। पिछले 20 वर्षों में लगभग 400 अरब रुपये के कुल निवेश के साथ एफपीआई भारत में सूचीबद्घ शेयरों में सबसे बड़े गैर-प्रवर्तक निवेशक हैं। इसके विपरीत भारतीय निवेशकों ने खासकर अगस्त 2002 और अगस्त 2004 के बीच की अवधि और उसके बाद अक्टूबर 2008 और अप्रैल 2009 के बीच की अवधि को छोड़कर अच्छा कारोबार किया। मौजूदा मूल्यांकन में सेंसेक्स कंपनियों की आय 10 वर्षीय सरकारी बॉन्डों के प्रतिफल की तुलना में लगभग 390 आधार अंक कम है और पिछली बार यह स्तर 31 दिसंबर 2007 (जनवरी 2008 की गिरावट की पूर्व संध्या पर) को देखा गया था। 
 
अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से 81 आधार अंक तक चढ़ा है, जबकि इस अवधि में भारत में इसमें 85 आधार अंक की वृद्घि दर्ज की गई। समान अवधि में सूचकांक कंपनियों के लिए आय प्रतिफल 35 आधार अंक बढ़ा, काफी हद तक पी/ई मल्टीपल में नरमी की वजह से। यह मल्टीपल अब घटकर 23.2 गुना पर रह गया है जो वित्त वर्ष 2018 के शुरू में 25.2 गुना पर था। विश्लेषकों का कहना है कि बॉन्ड प्रतिफल में तेजी से दलाल पथ पर नकदी घटी है।  इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवायजरी सर्विसेज के संंस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम कहते हैं, 'इक्विटी मूल्यांकन पर दबाव बढ़ रहा है जिससे बाजार में बिकवाली की स्थिति पैदा हो रही है।'  वह कहते हैं, 'रुपये में गिरावट से प्रत्यक्ष रूप से विदेशी निवेशकों का प्रतिफल घटा है जिससे उनके लिए भारतीय बाजारों का आकर्षण घट रहा है।' 
Keyword: equity, PE, market, bond,,
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