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महंगाई 3.9-4.5 फीसदी रहने का अनुमान

एजेंसियां / मुंबई October 05, 2018

भारतीय रिजर्व बैंक ने खाद्य उत्पादों की कीमतों में नरमी के चलते चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में खुदरा मुद्रास्फीति के 3.9 से 4.5 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया है। रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को अपनी चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति नरम स्तर पर बनी हुई है। इसको देखते हुए इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में महंगाई दर वृद्धि अनुमान को कम किया गया है।  उसने कहा, वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में महंगाई दर 4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं दूसरी छमाही (अक्टूबर 2018-मार्च 2019) में इसके 3.9 से 4.5 प्रतिशत तथा अप्रैल-जून 2019 तिमाही में 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि महंगाई दर के ऊपर जाने का कुछ जोखिम है।
 
आरबीआई ने अपने एक बयान में कहा, 'मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का निर्णय नीतिगत रुख को बदलकर तटस्थ की जगह सधे ढंग से सख्त करने के अनुरूप है। इसका मकसद आर्थिक वृद्धि को समर्थन देते हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 2 प्रतिशत घट-बढ़ के साथ 4 प्रतिशत रखने के लक्ष्य को हासिल करना है। एमपीसी ने मध्यम अवधि में सकल मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत पर रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।' अगर आवासीय किराया भत्ता (एचआरए) को ध्यान में नहीं रखा जाता है तो आरबीआई का मानना है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर और भी नीचे आ सकती है। आरबीआई के अनुसार अगर एचआरए प्रभाव को हटा दिया जाए तो सीपीआई मुद्राास्फीति 2018-19 की दूसरी तिमाही में 3.7 प्रतिशत तथा दूसरी छमाही में 3.8 से 4.5 प्रतिशत तथा 2019-20 की पहली तिमाही में 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
 
शीर्ष बैंक ने यह भी कहा कि पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से भी खुदरा महंगाई दर नरम होगी। हालांकि वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का मुद्रास्फीति परिदृश्य पर नकारात्मक प्रभाव जारी है। बिजली के दाम बढऩे के साथ कच्चे माल की लागत में तीव्र वृद्धि से वस्तुओं एवं सेवाओं के खुदरा मूल्य का भार आगे बढ़ाने का जोखिम है। रिजर्व बैंक ने कहा कि मुद्रास्फीति पर अगले कुछ महीनों में नजर रखने की जरूरत है क्योंकि इसके बढऩे को लेकर कई जोखिम बने हुए हैं। पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने खुदरा महंगाई दर के चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 4.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। रिजर्व बैंक ने कहा कि केंद्र तथा राज्यों को राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर कायम रहना चाहिए क्योंकि इसमें किसी प्रकार के चूक से मुद्रास्फीति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति पैदा होगी। आरबीआई ने वैश्विक व्यापार तनाव तथा तेल के बढ़ते दाम के प्रभाव को बेअसर करने के लिए घरेलू वृहत आर्थिक बुनियादी में सुधार का मजबूती से हवाला दिया। 
Keyword: RBI, food, inflation,,
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