बिजनेस स्टैंडर्ड - प्रो कबड्डी लीग का बढ़ता जादू
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प्रो कबड्डी लीग का बढ़ता जादू

धु्व मुंजाल /  October 05, 2018

'स्कोर?' 

'25-13' 
'क्या घटिया स्कोर है।'
 
इस एकतरफा मैच की वजह प्रदीप नरवाल का शानदार प्रदर्शन है। पटना पाइरेट्स के कप्तान बेहद आक्रामक खेल रहे हैं। अपनी पिछली दो रेड में उन्होंने जबरदस्त खेल के दम पर चार डिफेंडरों को छकाया है। यही वजह है कि उन्हें लेकर विपक्षी टीम में खौफ है। यह स्थिति तब है जबकि यह असली मैच नहीं है। यह अभ्यास मैच हैं और प्रदीप अपने टीम साथियों के साथ खेल रहे हैं। यह मैच एक पांच सितारा होटल के बॉलरूम में कृत्रिम चटाई पर खेला जा रहा है। वातानुकूलित माहौल मैच की गर्मी को ठंडा कर रही है। खिलाड़ी चाहते हैं कि एसी को बंद कर दिया जाए जबकि मैच खेलते हुए उनका शरीर पसीने में नहाया हुआ है। 
 
स्कोरकीपर के पास स्कोर देखने के बाद कोच मेहर सिंह ने डिफेंडर रवीन्द्र कुमार को प्रदीप पर नरमी बरतने को कहा। सिंह ने भारतीय टीम का ट्रैकसूट पहन रखा है। वह पिछले महीने हुए एशियाई खेलों में हिस्सा लेने वाली टीम के कोच थे। वह रवींद्र से कहते हैं, 'पॉइंट जाने दे। उसका पैर मत तोड़ दियो।' सिंह अच्छी तरह जानते हैं कि स्टार रेडर प्रदीप की पटना पाइरेट्स और यहां तक कि प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के लिए क्या अहमियत है। इस लीग का छठा संस्करण रविवार को शुरू हो रहा है।  
 
पीकेएल के पिछले संस्करण में प्रदीप 369 अंकों के साथ शीर्ष पर रहे थे। दूसरे स्थान पर रहे रेडर उनसे 150 अंक पीछे रहे। टूर्नामेंट के आधिकारिक प्रसारक स्टार इंडिया ने पीकेएल के प्रचार के लिए जो वीडियो बनाया है, उसमें प्रदीप को मुख्य भूमिका में दिखाया गया है। वीडियो में वह फर्राटा लगाते हुए दिख रहे हैं जैसे कोई जिमनास्ट वॉल्ट की तैयारी कर रहा हो। यह एक प्राचीन खेल के बारे में आधुनिक नजरिया है।  20 साल के प्रदीप भारतीय कबड्डी के निर्विवाद सुपरस्टार हैं। कुछ साल पहले तक प्रदीप और कबड्डी की ज्यादा पूछ नहीं थी। लेकिन आज दोनों घर-घर में जाने जाते हैं और लाखों लोग इस खेल के दीवाने हैं। पिछले साल का फाइनल 2.62 करोड़ लोगों ने देखा था। खिताबी मुकाबले में प्रदीप ने गुजरात फॉच्र्यून जाएंट्स के खिलाफ 19 अंक बटोरे थे। केवल इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के फाइनल को ही इससे ज्यादा दर्शक (3.94 करोड़) मिले हैं। 2016 के ओलंपिक में बैडमिंटन खिलाड़ी पी वी सिंधु का स्वर्ण पदक मैच 1.52 करोड़ लोगों ने देखा था। स्टार इंडिया के मुताबिक पीकेएल को 31.3 करोड़ दर्शकों ने देखा था और इसे 100 अरब मिनट देखा गया था। 
 
पीकेएल के पांच सत्र हो चुके हैं लेकिन इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और लोगों की इसमें दिलचस्पी बनी हुई है। क्रिकेट के इतर बाकी खेलों की लीग की शुरुआत पूरी चकाचौंध के साथ हुई लेकिन बाद में उन्हें अपना आकर्षण बरकरार रखने में संघर्ष करना पड़ा। लेकिन पीकेएल इसमें अपवाद है। पिछले साल के संस्करण में लीग चरण में औसत दर्शक संख्या 2016 की तुलना में 14 फीसदी अधिक रही। यह इस बात का सबूत है कि यह लीग न केवल चल रही है बल्कि इसके दर्शकों की संख्या भी बढ़ रही है।
 
कोई भी खेल लीग अपने खेल के दम पर ही लोकप्रिय होती है लेकिन ग्लैमर के इस दौर में असल खेल ही पीछे छूट जाता है। पीकेएल के केंद्र में तेज रफ्तार और लोगों को बांधकर रखने वाला खेल है। कबड्डी ऐसा खेल है जिसमें आप कभी भी बोर नहीं होते हैं। जेएसडब्ल्यू ग्रुप के मालिकाना हक वाली टीम हरियाणा स्टीलर्स के मुख्य कार्याधिकारी मुस्तफा गौस कहते हैं, 'अगर आप इस खेल के नियम नहीं भी जानते हैं तो भी अगर आप पांच मिनट मैच देखें तो आपको यह पूरी तरह समझ में आ जाएगा। यही कबड्डी की खूबी है।'
 
कबड्डी की लोकप्रियता का कारण यह धारणा भी है कि यह हमारा अपना देसी खेल है। चारु शर्मा ने 1994 में उद्योगपति आनंद्र महिंद्रा के साथ मशाल स्पोट्र्स की स्थापना की थी जो पीकेएल का आयोजन करती है। शर्मा कहते हैं, 'शायद हम यह बात नहीं जानते हैं लेकिन कबड्डी के प्रति हमारे दिल में स्वाभाविक प्यार है। यह हमारे खून में है। इसलिए सही ढंग से इसका प्रदर्शन करना जरूरी था।' सह-संस्थापक होने के कारण शर्मा पीकेएल की यात्रा के गवाह रहे थे। पहले सीजन में इस लीग के पास कोई प्रायोजक नहीं था जबकि आज यह एक दिग्गज खेल लीग बन चुकी है। 
 
अगर इस खेल को टीवी पर शानदार ढंग से प्रसारित नहीं किया जाता तो यह सबकुछ संभव नहीं हो पाता। 2015 में पहले सत्र के बाद स्टार इंडिया ने मशाल स्पोट्र्स में 74 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी जो क्रांतिकारी कदम था। उसके बाद से स्टार इंडिया ने इसमें अच्छा खासा निवेश किया है।  शर्मा कहते हैं, 'पीकेएल के संदर्भ में पैकेजिंग शब्द का बहुत इस्तेमाल होता है। यह समझना अहम है कि इससे खेल का कोई नुकसान नहीं होता है। हमें इसे ज्यादा आकर्षक बनाने की कोशिश की है और टीवी पर सीधे प्रसारण के लिए इसके कुछ नियमों में बदलाव किए गए हैं।'
 
चार साल बाद यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि स्टार इंडिया ने शानदार काम किया है। पीकेएल की प्रॉडक्शन क्वालिटी शीर्ष स्तर की है। आधुनिक इंडोर स्टेडियमों, मैट वाले कोर्ट, कोर्ट पर माइक्रोफोन की मौजूदगी, रचनात्मक संगीत, चकाचौंध और जुनूनी प्रशंसकों के कारण यह सबकुछ संभव हुआ है। यह भारतीय टेलीविजन में उन दुर्लभ खेलों में से एक हैं जिनका हिंदी में स्तरीय प्रसारण होता है। दिल्ली के वकील विशाल पूनिया केवल हिंदी कमेंट्री के लिए पीकेएल देखना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा, 'क्या कबड्डी जैसे देसी खेल का अंग्रेजी में प्रसारण किया जा सकता है।' कबड्डी के बारे में गहरी जानकारी रखने वाले कमेंटेंटर सुनील तनेजा ने उन्हें कभी निराश नहीं किया। शायद पीकेएल की सफलता का राज उसका साफ सुथरा कामकाज है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारतीय खेल वित्तीय गड़बडिय़ों और हितों के टकराव से संबंधित मुद्दों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। लेकिन पीकेएल में पूरा जोर कबड्डी पर ही रहा है। स्टार इंडिया ने इस लेख के लिए टिप्पणी करने से इनकार किया। 
 
पीकेएल की सफलता अन्यत्र भी दिखनी शुरू हो गई है। इस लीग सफलता की नई कहानी गढ़ रही है लेकिन यह केवल आंकड़ों तक ही सीमित नहीं है। यह अपने असली मकसद में भी कामयाब हो रही है और वह लक्ष्य है कबड्डी की लोकप्रियता को देखते हुए इसे वास्तव में एक आकांक्षापूर्ण खेल में बदलना।  मोनू गोयत जैसे खिलाडिय़ों की कहानी से निश्चित रूप से मदद मिलेगी। इस साल 30 मई को पाइरेट्स टीम का यह खिलाड़ी इस उम्मीद के साथ जागा कि उस दिन होने वाली नीलामी में उसे अच्छी कीमत मिलेगी। शाम होते-होते हरियाणा के हांसी के 25 साल के इस रेडर की बोली 1.51 करोड़ रुपये पहुंच चुकी थी जो आईपीएल के बाहर किसी खिलाड़ी को मिली सर्वाधिक राशि थी। उन्हें हरियाणा स्टीलर्स ने खरीदा था। 
 
प्रो-कबड्डी लीग ने जीवन के साथ-साथ व्यक्तित्व को भी बदला है। प्रदीप कभी एक शब्द से ज्यादा नहीं बोल पाते थे लेकिन आज पूरे आत्मविश्वास के साथ जवाब देते हैं। प्रसिद्घि ने उनमें बदलाव नहीं बल्कि सुधार आया है। वह कहते हैं, 'मैं पटना में अभ्यास नहीं कर सकता क्योंकि जैसे ही मैं अभ्यास के लिए निकलता हूं लोग तस्वीरें लेने लगते हैं। यह जुनून है।' जब भी वह बाहर निकलते हैं तो अंडर आर्मर के जूते पहनकर निकलते हैं। सफलता मिलने के बाद उन्हें उच्च जीवन शैली बिताने में भी कोई गुरेज नहीं है। यूपी योद्घाज के ऋषांक देवडिगा भी प्राइमटाइम पर चमकने के बाद फैशन शो में हिस्सा लेने लगे हैं। किसने सोचा था कि एक कबड्डी खिलाड़ी इतने दर्शक खींचेगा?
 
प्रदीप के टीम साथी दीपक नरवाल का कहना है कि इस लीग ने कबड्डी को गंभीर करियर विकल्प बना दिया है। उन्होंने कहा, 'हरियाणा में मेरे गांव कठूरा में हम मजे के लिए कबड्डी खेलते थे। हमारे लिए केवल राजनीति या पुलिस में ही करियर था। लेकिन अब मेरे गांव के करीब 15 खिलाड़ी पीकेएल में खेल रहे हैं। चीजें बदल गई हैं।' 25 साल के रेडर दीपक को पाइरेट्स ने 57 लाख रुपये देकर खरीदा है।  कोच सिंह ने बाद में मुझसे कहा, 'सबसे बड़ा बदलाव स्कूलो में देखने को मिला है। जिन शहरी बच्चों ने कभी यह खेल नहीं देखा है, वे भी अब इसे खेल रहे हैं। यह पीकेएल का वास्तविक असर है।' सिंह जो कुछ कह रहे हैं उसका अनुभव हमने पिछले साल की गर्मियों में किया था। दक्षिण दिल्ली के एक पार्क में जहां हम सप्ताहांत में फुटबॉल खेलते हैं, उसके एक हिस्से को कुछ स्कूली बच्चों ने कबड्डी कोर्ट बनाया था। इससे फुटबॉल खेलने में दिक्कत हुई लेकिन हमें बुरा नहीं लगा। 
 
स्टार इंडिया की आक्रामक मार्केटिंग और स्मार्ट पैकेजिंग के परिणाम सामने आए। इस बारे में सटीक आंकड़े मौजूद नहीं हैं लेकिन कुछ रिपोर्टों के मुताबिक पिछले वर्ष लीग के प्रायोजन राजस्व में 2016 की तुलना में 320 फीसदी बी बढ़ोतरी हुई। विज्ञापनदाताओं की संख्या में भी तीन गुना बढ़ोतरी हुई। पिछले सत्र में चार नई टीमें लीग से जुड़ी और अब इनकी संख्या 12 पहुंच गई है। विवो ने 5 साल के लिए मुख्य प्रायोजन के लिए 3 अरब रुपये का करार किया है।  2018 संस्करण के लिए स्टार इंडिया ने थम्स अप, होंडा और टाटा मोटर्स जैसी कंपनियों को साथ जोड़ा है। खेल कारोबार से जुड़ी शोध सलाहकार फर्म एमएसजी इनसाइट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जोसेफ ईपन ने कहा, 'स्टार लीग में प्रमुख हिस्सेदार है, इसलिए प्रायोजकों को मैच स्थल के साथ-साथ प्रसारण स्पॉट में अपने ब्रांड का प्रचार करने का मौका मिल रहा है।'
 
क्या और मजबूत हो सकती है पीकेएल? ईपन ने कहा, 'हमारे अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि फुटबॉल जैसे दूसरे खेलों के उलट कबड्डी में कोर्ट पर हमेशा कुछ न कुछ चलता रहता है। इसलिए लोग इससे नजरें नहीं हटा सकते हैं।' लेकिन इसे और ऊंचाई पर पहुंचने के लिए टीम स्तर पर चीजों में सुधार बहुत जरूरी है। लीग तो तेजी से मजबूत हो रही है लेकिन अधिकांश टीमें अभी तक नुकसान से नहीं उबरी हैं। पुनेरी पल्टन के मुख्य कार्याधिकारी कैलाश कांडपाल ने कहते हैं, 'ब्रांड्स ने अपने लक्षित ग्राहकों तक पहुंचने के लिए कबड्डी पर विचार करना शुरू कर दिया है लेकिन टीमों को नुकसान से उबरने के लिए अभी कुछ समय लगेगा।'
 
उद्योग के जानकारों के मुताबिक मुख्य प्रायोजकों ने पिछले सत्र में पीकेएल टीमों को केवल एक से चार करोड़ रुपये दिए थे जबकि इंडियन सुपर लीग टीमों कम से कम पांच करोड़ रुपये की मांग करती हैं। लेकिन पीकेएल की टीमें दूसरी लीगों की टीमों की तरह शक्तिशाली ब्रांड नहीं बन पाई हैं। कम से कम अभी तक तो नहीं। इतना ही नहीं करीब चार महीने तक रोजाना मैच खेलने से दर्शकों के उकता जाने की आशंका है। शर्मा कहते हैं, 'भविष्य में हम लीग की अवधि बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं जहां मैचों के बीच में अंतराल होगा। लेकिन अभी मुझे बदलाव का कोई कारण नजर नहीं आ रहा है। अभी यह अच्छी चल रही है। क्या हम रोज अखबार नहीं पढ़ते हैं?' अब फिर से मैट पर चलते हैं। उनका दाहिनी कोहनी में खरोच आ गई है। चोट पर बर्फ लगाने के बाद तीन बार पकड़ में आ चुके हैं। सिंह डिफेंस की तारीफ करते हैं। लगता है कि आखिरकार औसत का नियम प्रदीप पर लागू हो गया है। लीग के आयोजक उम्मीद करेंगे कि उनका ऐसा हश्र न हो। 
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