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नीलामी के लिए एमएमटीसी ने मांगी मंजूरी

दिलीप सत्पथी / भुवनेश्वर October 05, 2018

देश की सरकारी ट्रेडिंग कंपनी एमएमटीसी ने स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (जीएमएस) के तहत जमा 5 टन सोने की नीलामी के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मांगी है। एमएमटीसी पहले चरण में 8 टन सोने की सफलतापूर्वक नीलामी कर चुकी है।  कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमने जीएमएस के तहत जमा 8 टन सोने की नीलामी का लक्ष्य लगभग पूरा कर दिया है। अब हमने सरकार से 4 से 5 टन की और नीलामी करने की मंजूूरी मांगी है।' उन्होंने कहा, 'जहां सोना स्टॉक किया गया था, उन जगहों पर की गई नीलामी को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। अधिकतर कारोबारियों और सराफों ने नीलामी में हिस्सा लिया। नीलामियों में मिली कीमत उस समय सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों से मामूली अधिक थी।'

 
उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन आने के बावजूद पिछले कुछ सप्ताह से सोने के आयात का रुझान कमजोर है, जिसकी वजह डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट है। सरकार ने इस साल मार्च तक स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के तहत करीब 21 टन सोना जमा किया है। सरकार इसमें से 12 टन को नीलामी के जरिये बेचना चाहती है। वित्त मंत्रालय ने नीलामी के लिए एमएमटीसी को चुना था और इसके लिए कंपनी के साथ करार किया गया था।  इस योजना के तहत लोगों, मंदिरों और न्यासों से स्ïवर्ण जमाएं स्वीकार की जा रही हैं, जिनकी अवधि 1 से 3 साल (लघु अवधि), 5 से 7 साल (मध्यम अवधि) और 12 से 15 साल (लंबी अवधि) हैं। 
 
एमएमटीसी लघु अवधि के लिए जमा होने वाले सोने से सिक्के बना रही है, जबकि लंबी अवधि के लिए जमा सोने की नीलामी की जा रही है।  इस योजना के तहत ज्यादातर सोना मंदिरों और न्यासों ने जमा कराया है। लोगों ने बहुत कम सोना जमा कराया क्योंकि उनका अपने पूर्वजों से विरासत में मिले गहनों से भावनात्मक जुड़ाव है।  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2015-16 के बजट भाषण में कहा था कि भारत में सोने का स्टॉक 20,000 टन से अधिक होने का अनुमान है और इसमें से ज्यादातर सोने का न कारोबार हुआ है और न ही इसे पैसे में बदला गया है। स्वर्ण मुद्रीकरण योजना का मकसद अनुपयोगी पड़े इस सोने के एक हिस्से को चलन में लाना और आयात को कम करना था। 
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