बिजनेस स्टैंडर्ड - रबी फसलों का बढ़ा न्यूनतम समर्थन मूल्य
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रबी फसलों का बढ़ा न्यूनतम समर्थन मूल्य

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 10 03, 2018

किसानों के आंदोलन के बाद सरकार का फैसला

गेहूं का एमएसपी 105 रुपये बढ़कर 1,840 रुपये हुआ
फसलों की गिरती कीमत पर किसानों में रोष

बिजनेस स्टैंडर्ड रबी फसलों का बढ़ा न्यूनतम समर्थन मूल्यउत्तर भारतीय राज्यों के किसानों के राजधानी दिल्ली की ओर कूच करने के एक दिन बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2018-19 सत्र के लिए आज गेहूं सहित रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ा दिया। गेहूं का एमएसपी प्रति क्विंटल 105 रुपये यानी 6.1 फीसदी बढ़ाकर 1,840 रुपये कर दिया गया है।  गेहूं के साथ चने और सरसों का उत्पादन उत्तर भारतीय राज्यों खासकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में होता है। इन राज्यों में पिछले कुछ महीनों में किसानों ने व्यापक प्रदर्शन किया है जिसमें कल का प्रदर्शन भी शामिल है। कृषि उपज की कीमतों में गिरावट के कारण किसानों में रोष है। 

हालांकि एमएसपी में बढ़ोतरी से किसानों का गुस्सा किस हद तक शांत होगा, यह देखने वाली बात होगी क्योंकि कई फसलों की एमएसपी में वृद्धि 2017-18 से 2018-19 के बीच उत्पादन लागत में हुई बढ़ोतरी से कम है। सरसों का एमएसपी 200 रुपये बढ़ाकर 4,200 रुपये कर दिया गया है जबकि चने के एमएसपी में 220 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। चने का एमएसपी अब 4,620 रुपये हो गया है। इसी तरह मसूर के एमएसपी 225 रुपये की वृद्धि की गई है। जौ का एमएसपी 30 रुपये बढ़ाकर 1,440 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। 

सरकार का कहना है कि रबी और खरीफ की फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी से किसानों को 626 अरब रुपये की अतिरिक्त आय होगी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि गेहूं का एमएसपी ए2+एफएल उत्पादन लागत से 112 फीसदी अधिक है। चने के मामले में यह एमएसपी ए2+एफएल उत्पादन लागत की 75.2 फीसदी और सरसों के मामले में 89.9 फीसदी अधिक है।

जानकारों का कहना है कि मुद्रास्फीति पर उच्च एमएसपी का असर इन फसलों की सरकारी खरीद पर निर्भर करेगा। केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, 'गेहूं के एमएसपी में बढ़ोतरी कमोबेश उम्मीदों के मुताबिक है। यह धान के एमएसपी से कम ही है जिसमें पिछले साल की तुलना में करीब दस फीसदी इजाफा किया गया था।'

मंगलवार को हजारों किसानों ने दिल्ली की तरफ कूच किया था लेकिन उन्हें दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा पर रोक लिया गया था। उन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस को पानी की बौछार और आंसू गैस के गोले छोडऩे पड़े थे। आंदोलनकारी किसान पेट्रोल और बिजली बिलों में कमी, एमएसपी व्यवस्था को कानूनी दर्जा देने, स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करने सभी फसलों का ऋण माफ करने, किसान क्रेडिट कार्ड की शर्तों में बदलाव करने और दिल्ली-एनसीआर में दस साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों पर लगे पतिबंध को हटाने की मांग कर रहे थे। सरकार से मांगें मानने का आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया।
Keyword: farmer, protest, delhi, agri, MSP, cabinet,,
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