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विदेश से उधार ले पाएंगी तेल कंपनियां

अनूप रॉय / मुंबई October 03, 2018

भारतीय रुपया बुधवार को पहली बार 73 के पार निकल गया क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक ने तेल विपणन कंपनियों को डॉलर की विशेष अदला-बदली की सुविधा देने से इनकार कर दिया। लेकिन बाजार बंद होने के बाद एक अधिसूचना के जरिए तेल विपणन कंपनियों को विदेशी बाजार से सीधे डॉलर जुटाने की मंजूरी दे दी और वह भी हेजिंग की जरूरत के बिना। ऐसी उधारी की न्यूनतम परिपक्वता अवधि तीन साल व पांच साल होनी चाहिए और योजना के तहत इसकी कुल सीमा 10 अरब डॉलर होगी। केंद्रीय बैंंक ने इसके तहत कई मानकों से छूट दी है। उदाहरण के लिए वैयक्तिक कंपनी की सीमा 75 करोड़ डॉलर थी, जिसे आरबीआई ने हटा दिया। इसके अलावा ऐसी फंडिंग के लिए हेजिंग जरूरी थी, लेकिन अब ऐसा जरूरी नहीं है, पर कंपनियों के पास बोर्ड से मंजूर फॉरेक्स मार्क टु मार्केट प्रक्रिया व जोखिम प्रबंधन की अच्छी नीति होनी चाहिए। आरबीआई ने वेबसाइट पर एक अधिसूचना के जरिए यह जानकारी दी।
 
हालांकि यह ऐलान बाजार बंद होने के बाद हुआ जब इस खबर के बाद रुपये में तेज गिरावट दर्ज हुई कि केंद्रीय बैंक ने डॉलर की अदला-बदली की सुविधा वाली खिड़की तेल विपणन कंपनियों को देने से इनकार कर दिया है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रमुख (प्राइवेट क्लाइंट ग्रुप व कैपिटल मार्केट स्ट्रैटिजी) वी के शर्मा ने कहा, आरबीआई ने तेल विपणन कंपनियों के लिए विशेष खिड़की खोलने से इनकार किया, जिससे रुपये में भारी गिरावट आई और यह डॉलर के मुकाबले अब तक के नए निचले स्तर 73.41 तक फिसल गया।
 
बाजार को तेल के लिए डॉलर की अदला-बदली की सुविधा मिलने की उम्मीद थी क्योंकि इससे बाजार का दबाव काफी हद तक कम हो जाता। तेल के लिए सालाना 120 अरब डॉलर की मांग होती है, जो हर कार्यदिवस के लिए रोजाना आधार पर करीब 50 करोड़ डॉलर बैठता है। ऐसी सुविधा से इनकार किए जाने से शायद बाजार का सेंंटिमेंट बिगड़ गया। कार्यशील पूंजी के कर्ज के लिए आरबीआई की नई सुविधा से कुछ मसलों का समाधान होगा, न कि पूरा। तेल की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल को छूने वाली हैं और तेल आयातक देश खास तौर से प्रभावित हुए हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया 73.34 पर बंद हुआ जबकि इसका पिछला बंद स्तर 72.91 रहा था। इस साल अब तक रुपये में 12 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई है और एशियाई बाजार में यह सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा है।
 
एस्सेल फाइनैंस वीकेसी फॉरेक्स लिमिटेड के सीईओ सलिल दातर ने कहा, रुपया 73 के पार निकल गया है और आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक में नई दिशा तय किए जाने तक रुपया 73-73.50 स्तर पर कारोबार कर सकता है। नकदी पर आरबीआई की घोषणा एनबीएफसी और बैंकों को राहत देने पर ज्यादा केंद्रित है, न कि विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की गिरावट को थामने के लिए। बुधवार को रुपये का नुकसान काफी ज्यादा था और यह मंगलवार के एशियाई बाजारों के सेंटिमेंट से प्रभावित हुआ। भारतीय बाजार मंगलवार को बंद रहे थे। करेंसी डीलरों ने कहा कि आरबीआई ने बाजार में मामूली हस्तक्षेप किया।
 
एक डीलर ने कहा, सुबह बाजार में थोड़ा हस्तक्षेप हुआ था, लेकिन इसके बाद आरबीआई ने हस्तक्षेप छोड़ दिया। बाजार बंद होने से पहले राष्ट्रीयकृत बैंकों ने फिर डॉलर खरीदे। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और इस हफ्ते दरों में बढ़ोतरी की संभावना समेत राजकोषीय अंकगणित पर इसके असर से बॉन्ड बाजार में मंदी का माहौल बना। 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल (जो सोमवार को 8 फीसदी के नीचे चला गया था) चार के उच्चस्तर 8.11 फीसदी तक उछल गया जबकि आरबीआई ने बाजार में 2 लाख करोड़ रुपये की नकदी छोड़ी और इस महीने द्वितीयक बाजार में 360 अरब रुपये के बॉन्ड की खरीद की घोषणा की है।
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