बिजनेस स्टैंडर्ड - ई-बाइक पर ध्यान दे सरकार: भार्गव
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ई-बाइक पर ध्यान दे सरकार: भार्गव

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली 10 02, 2018

तेल आयात पर लगेगी लगाम

बिजनेस स्टैंडर्ड ई-बाइक पर ध्यान दे सरकार: भार्गवभले ही यह आपको बेतुका लगे लेकिन कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी ने एक ऐसी नीति की वकालत की है जिसे कारों के बजाय दोपहिया वाहनों के विद्युतीकरण पर केंद्रित होना चाहिए। उनका तर्क है: दोपहिया वाहनों में पेट्रोल की काफी खपत होती है और ई-कार काफी महंगी होगी। मारुति सुजूकी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने कहा, 'देश में पेट्रोल की कुल खपत में दोपहिया वाहनों का योगदान 62 फीसदी है जबकि कारों का योगदान महज 36 फीसदी है। चूंकि इलेक्ट्रिक वाहन नीति का मुख्य उद्देश्य बढ़ते तेल आयात बिल में कमी लाना है, इसलिए हमें दोपहिया पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जहां विद्युतीकरण काफी आसान है।' वर्ष 2017-18 के दौरान भारत में कुल 32.8 लाख यात्री वाहनों की बिक्री हुई थी। इसमें कारों की संख्या 21.7 लाख थी। जबकि दोपहिया वाहनों की संख्या करीब 2.02 करोड़ थी जो कारों के मुकाबले कई गुना अधिक है।

भार्गव ने कहा कि वर्तमान औसत कीमत पर 1 केडब्ल्यूएच वाली लिथियम बैटरी की कीमत 200 डॉलर है। छोटी ई-कार सस्ती नहीं होगी क्योंकि उसके लिए कम से कम 14 केडब्ल्यूएच लिथियम बैटरी की जरूरत होगी जिसकी कीमत 2,800 डॉलर होगी। उन्होंने कहा, 'भारत में बिकने वाली करीब 78 फीसदी कारों की कीमत 5 लाख रुपये से 6 लाख रुपये के दायरे में होती है। विद्युतीकरण से उनकी कीमत में 4 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक का इजाफा होगा। ऐसे में यह बाजार की महंगी कार श्रेणियों की कीमत तक पहुंच जाएगी लेकिन उसका बाजार काफी छोटा है।'

भार्गव के अनुसार, प्रवेश स्तर के दोपहिया वाहनों के लिए महज 1.5 केडब्ल्यूएच बैटरी की जरूरत होगी और भारत में ऐसे वाहनों की औसत उपयोगिता 50 किलोमीटर प्रति दिन से अधिक नहीं है। इसलिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ की आशंका सीमित होगी। दूसरा, दोपहिया वाहनों के लिए बड़े पैमाने पर चार्जिंग बुनियादी ढांचा स्थापित करने की भी जरूरत नहीं होगी। मारुति सुजूकी के अनुसार, मान लीजिए कि 2030 तक करीब 30 फीसदी मौजूदा यात्री कारों को इलेक्ट्रिक कार में तब्दील कर दिया जाएगा तो वास्तव में उस समय सड़कों पर मौजूद कुल कारों का महज 17 फीसदी कार ही इलेक्ट्रिक होंगी। इसलिए अधिकतर कारें तब भी जीवाश्म ईंधन द्वारा चालित होंगी। यह गणना मौजूदा मांग अनुमानों पर आधारित है कि 2030 तक सड़कों पर कारों की संख्या बढ़कर 7 करोड़ तक पहुंच जाएगी जो फिलहाल 2.8 से 3 करोड़ के दायरे में है।

भार्गव ने कहा कि दोपहिया वाहनों द्वारा पेट्रोल की खपत के लिहाज से भारत एक अनोखी जगह है क्योंकि न तो यूरोप में और न ही चीन में दोपहिया वाहनों की पेट्रोल पर इतनी अधिक निर्भरता है। इसलिए उनकी तरह विद्युतीकरण का समाधान भारत के लिए प्रासंगिक नहीं है। उन्होंने कहा कि कारों के लिए समाधान यह हो सकता है कि उसे बड़े पैमाने पर सीएनजी की ओर बढ़ाया जाए जो आसानी से उपलब्ध है। लेकिन वितरण स्टेशनों की कमी सबसे बड़ी बाधा है। हालांकि सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 10,000 नए सीएनजी स्टेशन स्थापित करने की घोषणा की है जो काफी महत्त्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

भार्गव ने कहा कि ज्यूरी अभी भी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि इलेक्ट्रिक वाहन (लिथियम उपलब्धता की समस्याओं के मद्देनजर) बेहतरीन समाधान होगा अथवा हाइड्रोजन तकनीक को आगे बढ़ाना होगा। हालांकि दोपहिया विशेषज्ञों का कहना है कि भार्गव ने इलेक्ट्रिक दोपहिया के लिए बैटरी की कीमत को कमतर आंका है। एक दोपहिया विनिर्माता ने कहा, 'सवाल यह है कि आप सस्ता वाहन रेवा बना रहे हैं अथवा टेस्ला जो महंगा लेकिन अच्छी गुणवत्ता का वाहन है। ये दोनों वाहन इलेक्ट्रिक कार हैं। अथवा आप सस्ते चीनी इलेक्ट्रिक दोपहिया बना रहे हैं या उच्च गुणवत्ता वाला वाहन।'
Keyword: e bike, car, petrol, maruti, CNG,,
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