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इस साल फरवरी तक एजेंसी ने नहीं घटाई रेटिंग

अमृता पिल्लई / मुंबई October 02, 2018

रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने पिछले हफ्ते आईएलऐंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवक्र्स (आईटीएनएल) की रेटिंग घटाकर डिफॉल्ट कर दी थी। लेकिन जून 2016 मेंं ही एजेंसी ने शायद दबाव का अनुमान लगाया था और भविष्य में कंपनी की रेटिंग घटाने की संभावना दिखी थी, लेकिन एजेंसी ने इस साल फरवरी तक ऐसा नहीं किया। 6 जून 2016 को आईटीएनएल की रेटिंग के संदर्भ में इंडिया रेटिंग्स ने उसके लिए 'ए' रेटिंग की पुष्टिï कर दी, हालांकि कंपनी पर अपना नजरिया स्टेबल से हटाकर निगेटिव कर दिया। आईटीएनएल पर अपनी रिपोर्ट में इंडिया रेटिंग्स ने कहा है, 'यदि कर्ज जोखिम को 4.5 गुना से नीचे लाने की संभावना कमजोर पड़ती है तो रेटिंग घटाई जा सकती है।' इंडिया रेटिंग्स ने कर्ज जोखिम वित्त वर्ष 2017 तक घटकर लगभग 6 गुना और वित्त वर्ष 2018 तक 5 गुना से नीचे रह जाने का अनुमान लगाया था। 
 
जून 2016 से फरवरी 2018 के बीच, रेटिंग एजेंसी ने आईटीएनएल पर अपने नजरिये या रेटिंग को बरकरार रखने या बदलने के संबंध में कोई रिपोर्ट जारी नहीं की। उद्योग के एक अधिकारी ने अपना नाम नहीं बताने के अनुरोध के साथ कहा, 'नकारात्मक परिदृश्य का मतलब है कि 12 से 18 महीने के संदर्भ में रेटिंग में कमी की आशंका पैदा हो सकती है और एक वर्ष के समय में इसमें समीक्षा की जरूरत होगी।' हालांकि इंडिया रेटिंग्स ने इस संबंध में सोमवार को भेजे गए सवाल पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। 
 
फरवरी 2018 में रेटिंग एजेंसी ने आईटीएनएल के लिए रेटिंग को पूर्व के नकारात्मक परिदृश्य से रेटिंग वॉच निगेटिव (आरडब्ल्यूएन) पर रखा। अपनी फरवरी की रिपोर्ट में इंडिया रेटिंग्स ने कहा, 'आरडब्ल्यूएन आईटीएनएल की कर्ज से मुक्त होने की योजनाओं से जुड़ी अनिश्चितता को दर्शाता है।' हालांकि यदि जून 2016 और फरवरी 2018 दोनों में साझा किए गए विवरणों पर विचार किया जाए तो पता चलता है कि इंडिया रेटिंग्स के लिए इसकी समीक्षा के तहत पर्याप्त मापदंड थे जिनमें आईटीएनएल का कर्ज जोखिम अनुपात शामिल है। अपनी 8 फरवरी 2018 की रिपोर्ट में इंडिया रेटिंग्स ने कहा था कि वित्त वर्ष 2016-17 में आईटीएनएल का कर्ज अनुपात बढ़कर 7.35 गुना हो गया। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि हालांकि कर्ज अनुपात में सुधार आया है, पर यह वित्त वर्ष 2017 के लिए उसके अनुमान (6 गुना) से ज्यादा था। यह स्पष्टï नहीं है कि इंडिया रेटिंंग ने अनुमान से ज्यादा कर्ज जोखिम अनुपात पर ध्यान क्यों नहीं दिया था, और लगभग एक साल बाद भी समान रुख बरकरार रखा। जून 2016 की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उसे परिसंपत्तियों की बिक्री में विफल रहने, उधारी में वृद्घि के लिए विशेष उद्देश्य वाली कंपनियों (एसपीवी) को अनुमान से ज्यादा समर्थन, एनएचएआई से क्लेम की वसूली में विलंब आदि जैसे हालात में कर्ज जोखिम घटने की संभावना कम दिख रही है। ये सभी समस्याएं 2016 में सामने आईं और आईटीएनएल और उसके मौजूदा ऋण प्रोफाइल पर इनका प्रभाव बना हुआ है। 
 
अपनी फरवरी 2018 की रिपोर्ट में इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि वह कर्ज घटाने की कुछ योजनाओं पर मौजूदा प्रगति से कुछ हद तक सहज महसूस कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'उदाहरण के लिए, आईटीएनएल ने नवंबर 2017 में 5.47 अरब रुपये के दावे के लिए एक मध्यस्थता फैसला किया था जो अगली कुछ तिमाहियों के दौरान प्राप्त होने की संभावना है। आईटीएनएल ने अपनी तीन एसपीवी के लगभग 33.28 अरब रुपये के कर्ज का पुनर्भुगतान भी पूरा किया है। आईटीएनएल ने वित्त वर्ष 2018 की चौथी तिमाही के दौरान 20 अरब रुपये के मसाला बॉन्ड और 30 करोड़ डॉलर तक के डॉलर बॉन्ड जारी करने का भी प्रस्ताव रखा जिसका इस्तेमाल अल्पावधि ऋण को दीर्घावधि परिपक्वताओं में तब्दील करने और ब्याज खर्च घटाने के लिए किया जाएगा।'  
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