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वित्तीय क्षेत्र पर पड़ सकता है बड़ा असर

अद्वैत राव पालेपू / मुंबई October 02, 2018

आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) ने इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएलऐंडएफएस) से जुड़े मामले की गंभीरता पर चिंता जताई है। नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में सौंपी अपनी याचिका में विभाग ने कहा है कि आईएलऐंडएफएस समूह द्वारा डिफॉल्ट से वित्तीय क्षेत्र में जोखिम बढ़ सकता है। विभाग ने कहा है, 'इस समूह की वित्तीय ऋण शोधन क्षमता और अच्छा शासन एवं प्रबंधन सुनिश्चित करने में सार्वजनिक हित है। आईएलऐंडएफएस गु्रप द्वारा डिफॉल्ट का वित्तीय क्षेत्र पर प्रभाव काफी व्यापक होगा, जैसा कि कुछ कंपनियों के आंशिक डिफॉल्ट से संकेत मिला है।'
 
मुख्य चिंता समूह की कमजोर होती वित्तीय स्थिति है। वर्ष 2017-18 में आईएलऐंडएफएस समूह ने 26.7 अरब रुपये का ऋण नुकसान दिखाया, जबकि 69.5 अरब रुपये की इक्विटी पूंजी और रिजर्व के आधार पर उसकी कुल उधारी 910 अरब रुपये पर थी। वहीं 29 सितंबर , 2018 को समूह की आईएलऐंडएफएस फाइनैंशियल सर्विसेज जैसी सहायक कंपनियां 37.6 अरब रुपये के भुगतान में विफल रहीं। अक्टूबर 2018 तक आईएलऐंडएफएस के 10.66 अरब रुपये के अन्य बॉन्ड भी पुनर्भुगतान के लिए देय होंगे। 
 
चूंकि बैंकों, एनबीएफसी, म्युचुअल फंडों और परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी), भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के साथ साथ विदेशी निवेशकों ने भी आईएलऐंडएफएस की डेट योजनाओं में निवेश कर रखा है, जिससे ये डिफॉल्ट पूरे वित्तीय क्षेत्र के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं और कुछ हद तक इनसे सरकारी खर्च की रफ्तार भी प्रभावित होगी। डीईए ने कहा है कि आईएलऐंडएफएस बॉन्डों में एएमसी का 28 अरब रुपये का निवेश है। इन फंडों को उन कॉरपोरेट ग्राहकों से बिकवाली दबाव का सामना करना पड़ सकता है जिन्होंने डेट फंडों में 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। ऐसे समय में जब कॉरपोरेट डेट बाजार को नकदी संकट का सामना करना पड़ रहा है, कुछ एनबीएफसी शेयरों में ताजा दबाव भी एएमसी को सरकारी प्रतिभूतियां बेचने को बाध्य कर सकता है जिससे बॉन्ड प्रतिफल 8.30-8.50 के स्तर पर पहुंच सकता है।
 
कोष उगाही के लिए कॉरपोरेट डेट बाजार पर निर्भरता को लेकर विश्लेषकों द्वारा जताई गई चिंताओं से इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस, दीवान हाउसिंग फाइनैंस और बजाज फाइनैंस जैसे एनबीएफसी शेयरों को दबाव का सामना करना पड़ा है। एनसीएलटी में सौंपी गई याचिका के अनुसार, कॉरपोरेट बॉन्डों के सक्रिय खरीदार म्युचुअल फंडों ने खरीदारी पूरी तरह बंद कर दी है और कॉरपोरेट बॉन्ड प्रतिफल में आईएलऐंडएफएस संकट के बाद लगभग 40-50 आधार अंक तक का और इजाफा हो गया है। 
 
यह आशंका भी गहरा गई है कि लगभग 1500 एनबीएफसी को अपने लाइसेंस से हाथ धोना पड़ सकता है क्योंकि उनके पास पर्याप्त पूंजी नहीं है। नकदी संकट और ताजा घटनाक्रम से एनबीएफसी के लिए फंड लागत बढ़ रही है जिससे उनका मुनाफा प्रभावित हो रहा है। सोमवार को एनसीएलटी ने कंपनीज ऐक्ट की धारा 241 के तहत कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) के अनुरोध को स्वीकार किया। इसके परिणामस्वरूप ट्रिब्यूनल ने आईएलऐंडएफएस के बोर्ड को भंग कर दिया और सरकार द्वारा सुझाए गए नामों के आधार पर 6 सदस्यों के साथ नया बोर्ड बनाया। 
Keyword: IL&FS, fund, share, LIC, sidbi, इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंस सर्विसेज,
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